विराट पर्व
अध्याय
४३
कर्ण उवाच
अय़ुद्धमनसश्चैव सर्वांश्चैवानवस्थितान् ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
अय़ुद्धमव्यवस्थानं नैष धर्मः सनातनः |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२९
वासुदेव उवाच
अय़ुद्धे वा वर्तते धर्मतन्त्रं; तथैव ते वाचमिमां शृणोमि ||
१९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
अय़ुद्धेन निवृत्तिं च मनसा चिन्तय़ाभिभो |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९५
वामदेव उवाच
अय़ुद्धेनैव विजय़ं वर्धय़ेद्वसुधाधिपः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
अय़ुद्ध्वैव निय़ोगान्मे वशे वैदेह ते स्थितः ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८३
भीष्म उवाच
अय़ुध्यं जामदग्न्येन निवृत्तेऽहनि भारत ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
अय़ुध्यत महातेजा भार्गवेण महात्मना ||
७० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०५
धृतराष्ट्र उवाच
अय़ुध्यत महावीर्यः पाण्डवैः सहसृञ्जय़ैः ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१११
धृतराष्ट्र उवाच
अय़ुध्यत महावीर्यैः पाण्डवैः सहसृञ्जय़ैः ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
अय़ुध्यति न मोक्तव्या सा त्वय़्येव पतेदिति ||
५० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१००
सञ्जय़ उवाच
अय़ुध्यन्त महाराज मध्यं प्राप्ते दिवाकरे ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
अय़ुध्यन्त महावेगाः परस्परवधैषिणः |
४८ क
वन पर्व
अध्याय
११७
राम उवाच
अय़ुध्यमानं धर्मज्ञमेकं हत्वानपत्रपाः ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६९
सञ्जय़ उवाच
अय़ुध्यमानं यस्त्वाजौ तथा प्राय़गतं मुनिम् |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
अय़ुध्यमानं सङ्ग्रामे वरय़ामास केशवम् ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
अय़ुध्यमानं सचिवं वव्रे कृष्णं धनञ्जय़ः ||
१३९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
अय़ुध्यमानः कां वुद्धिमास्थाय़ाहं त्वय़ा वृतः ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७
कृष्ण उवाच
अय़ुध्यमानः सङ्ग्रामे न्यस्तशस्त्रोऽहमेकतः ||
१७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८२
अर्जुन उवाच
अय़ुध्यमानः सङ्ग्रामे संसक्तोऽन्येन भामिनि ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०३
युधिष्ठिर उवाच
अय़ुध्यमानः साहाय़्यं यथोक्तं कुरु माधव ||
४३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
अय़ुध्यमानमात्मानं मन्त्रिणं पुरुषर्षभौ |
१३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
अय़ुध्यमानस्तुरगान्संय़न्तास्मि जनार्दन |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११८
सञ्जय़ उवाच
अय़ुध्यमानस्य कथं रणे प्रहृतवानसि ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
कृष्ण उवाच
अय़ुध्यमानस्य वधस्तथाशस्त्रस्य भारत |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३१
भीष्म उवाच
अय़ुध्यमानस्य वधो दारामर्शः कृतघ्नता |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
अय़ुध्यमानाय़ हि सा केशवाय़ नराधिप |
५५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
अय़ुध्यमानो मनसापि यस्य; जय़ं कृष्णः पुरुषस्याभिनन्देत् |
६४ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२
विदुर उवाच
अय़ुध्यमानो म्रिय़ते युध्यमानश्च जीवति |
५ क
वन पर्व
अध्याय
११७
राम उवाच
अय़ुध्यमानो वृद्धः सन्हतः शरशतैः शितैः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
अय़ुध्येतां महाराज परस्परवधैषिणौ ||
७२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३५
सञ्जय़ उवाच
अय़ुध्येतां महावाहू चित्रं लघु च सुष्ठु च |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०८
धृतराष्ट्र उवाच
अय़ुध्येतां युधि श्रेष्ठौ परस्परवधैषिणौ ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८१
वैशम्पाय़न उवाच
अय़ुध्येतां सुसंरव्धावन्योन्यविजय़ैषिणौ ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५६
भीष्म उवाच
अय़ो हन्ति यदाश्मानमग्निश्चापोऽभिपद्यते |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
अय़ो हृत्वा तु दुर्वुद्धिर्वाय़सो जाय़ते नरः |
९७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५३
सञ्जय़ उवाच
अय़ोगुडैर्भिण्डिपालैर्गोशीर्षोलूखलैरपि |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
२३
वासुदेव उवाच
अय़ोजय़ं तद्वधाय़ ततः शव्द उपारमत् ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८२
भीष्म उवाच
अय़ोजय़त धर्मात्मा दिवसे दिवसे विभुः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
अय़ोजय़त्तमुन्माथं नित्यमस्तं गते रवौ ||
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
अय़ोजय़न्रथांस्तूर्णं पर्यधावंस्तथापरे ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८६
पराशर उवाच
अय़ोजय़ित्वा क्लेशेन जनं प्लाव्य च दुष्कृतम् |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
६८
वृहदश्व उवाच
अय़ोध्यां नगरीं गत्वा भाङ्गस्वरिरुपस्थितः ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
६३
वृहदश्व उवाच
अय़ोध्यां नगरीं रम्यामद्यैव निषधेश्वर ||
१९ ग
आदि पर्व
अध्याय
१६८
गन्धर्व उवाच
अय़ोध्यां व्योम शीतांशुः शरत्काल इवोदितः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
२७५
मार्कण्डेय़ उवाच
अय़ोध्यां स समासाद्य पुरीं राष्ट्रपतिस्ततः |
५९ क
वन पर्व
अध्याय
६९
वृहदश्व उवाच
अय़ोध्याधिपतिर्धीमान्विस्मय़ं परमं यय़ौ ||
२२ ख
सभा पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
अय़ोध्याय़ां तु धर्मज्ञं दीर्घप्रज्ञं महावलम् |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११३
नारद उवाच
अय़ोध्याय़ां महावीर्यं चतुरङ्गवलान्वितम् ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
१९०
वैशम्पाय़न उवाच
अय़ोध्याय़ामिक्ष्वाकुकुलोत्पन्नः पार्थिवः परिक्षिन्नाम मृगय़ामगमत् ||
३ क