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वन पर्व
अध्याय १११
लोमश उवाच
आश्रमं तं समासाद्य ददर्श तमृषेः सुतम् ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय ५
सूत उवाच
आश्रमं तस्य रक्षोऽथ पुलोमाभ्याजगाम ह ||
१३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
आश्रमं ते ततो जग्मुर्धृतराष्ट्रस्य पाण्डवाः |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
आश्रमं परमप्रीतो मित्रस्य वरुणस्य च ||
१२ ग
उद्योग पर्व
अध्याय १७३
भीष्म उवाच
आश्रमं पुण्यशीलानां तापसानां महात्मनाम् |
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८७
भीष्म उवाच
आश्रमं पुण्यशीलानां तापसानां महात्मनाम् ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५८
भीष्म उवाच
आश्रमं मम सम्प्राप्तस्त्रिलोकेशः पुरन्दरः |
४४ क
शल्य पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
आश्रमं सुमहद्दिव्यमगमज्जनमेजय़ ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय ८७
धौम्य उवाच
आश्रमः कक्षसेनस्य पुण्यस्तत्र युधिष्ठिर |
१० क
वन पर्व
अध्याय ८८
धौम्य उवाच
आश्रमः ख्याय़ते पुण्यस्त्रिषु लोकेषु विश्रुतः ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय ८७
धौम्य उवाच
आश्रमः शाम्यतां श्रेष्ठ मृगद्विजगणाय़ुतः ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
आश्रमः श्रमणः क्षामः सुपर्णो वाय़ुवाहनः ||
१०४ ख
वन पर्व
अध्याय १३५
लोमश उवाच
आश्रमः स्थूलशिरसो रमणीय़ः प्रकाशते |
८ क
आदि पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
आश्रमप्रवरं रम्यं ददर्श च मनोरमम् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय ११०
लोमश उवाच
आश्रमश्चैव पुण्याख्यः काश्यपस्य महात्मनः |
२ क
वन पर्व
अध्याय १३०
लोमश उवाच
आश्रमश्चैव रुक्मिण्या यत्राशाम्यदकोपना ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय १३९
लोमश उवाच
आश्रमस्तस्य पुण्योऽय़ं सदापुष्पफलद्रुमः |
२४ क
वन पर्व
अध्याय १०१
विष्णुरु उवाच
आश्रमस्थं तपोराशिं कर्मभिः स्वैरभिष्टुवन् ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६६
भीष्म उवाच
आश्रमस्थं तमप्याहुर्नरश्रेष्ठं युधिष्ठिर ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय ११६
अकृतव्रण उवाच
आश्रमस्थं विना रामं जमदग्निमुपाद्रवन् ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
आश्रमस्थः कपोतस्थो विश्वकर्मा पतिर्वरः |
९४ क
वन पर्व
अध्याय ११६
अकृतव्रण उवाच
आश्रमस्थस्तय़ा सार्धं तपस्तेपेऽनुकूलय़ा ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय १६९
गन्धर्व उवाच
आश्रमस्था ततः पुत्रमदृश्यन्ती व्यजाय़त |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६६
भीष्म उवाच
आश्रमस्थानि सर्वाणि यस्तु वेश्मनि भारत |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
आश्रमस्थान्महर्षींश्च धर्षय़न्तस्ततस्ततः |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२१
श्रीरु उवाच
आश्रमस्थान्विकर्मस्थाः प्रद्विषन्ति परस्परम् |
६४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७३
भीष्म उवाच
आश्रमस्थैर्महाभागैस्तपोनित्यैर्महात्मभिः ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय २०७
मार्कण्डेय़ उवाच
आश्रमस्थो महाभागो हव्यवाहं विशेषय़न् |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६२
विदुर उवाच
आश्रमस्थो मुनिः कश्चिद्ददर्शाथ कृताह्निकः ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय १८६
मार्कण्डेय़ उवाच
आश्रमा मनुजव्याघ्र न भवन्ति युगक्षय़े ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६३
भीष्म उवाच
आश्रमा विहिताः सर्वे वर्जय़ित्वा निराशिषम् ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
आश्रमांश्च महर्षीणां तीर्थान्याय़तनानि च ||
६८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३
युधिष्ठिर उवाच
आश्रमांश्च विशेषांस्त्वं ममाचक्ष्व पितामह ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
आश्रमांस्तुलय़ा सर्वान्धृतानाहुर्मनीषिणः |
११ क
वन पर्व
अध्याय १८९
मार्कण्डेय़ उवाच
आश्रमाः सहपाषण्डाः स्थिताः सत्ये जनाः प्रजाः ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
आश्रमाणां गृहस्थस्त्वमीश्वराणां महेश्वरः |
१५५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २४
भीष्म उवाच
आश्रमाणां च कर्तारः कुलानां चैव भारत |
८८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४४
व्रह्मो उवाच
आश्रमाणां च गार्हस्थ्यं सर्वेषां नात्र संशय़ः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६२
स्यूमरश्मिरु उवाच
आश्रमाणां च सर्वेषां निष्ठाय़ामैक्यमुच्यते ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
आश्रमाणां महावाहो शृणु सत्यपराक्रम |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६५
इन्द्र उवाच
आश्रमाणां विकल्पाश्च निवृत्तेऽस्मिन्कृते युगे ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६६
भीष्म उवाच
आश्रमाणां स सर्वेषां फलं प्राप्नोत्यनुत्तमम् ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय २९५
वैशम्पाय़न उवाच
आश्रमात्त्वरितः शीघ्रं प्लवमानो महाजवः ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३६
व्यास उवाच
आश्रमादाश्रमं सद्यः पूतो गच्छति कर्मभिः ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय २५८
मार्कण्डेय़ उवाच
आश्रमाद्राक्षसेन्द्रेण रावणेन विहाय़सा |
२ क
वन पर्व
अध्याय १८८
मार्कण्डेय़ उवाच
आश्रमानभिपत्स्यन्ति फलमूलोपजीविनः ||
७१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
भीष्म उवाच
आश्रमान्सम्परित्यज्य पर्यधावन्नितस्ततः ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय ८६
धौम्य उवाच
आश्रमान्सरितः शैलान्सरांसि च नराधिप ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३०
उमो उवाच
आश्रमाभिरता देव तापसा ये तपोधनाः |
३४ क
वन पर्व
अध्याय ५८
वृहदश्व उवाच
आश्रमाश्च महर्षीणाममी पुष्पफलान्विताः ||
२१ ख