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शल्य पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
अतीता सा त्वनावृष्टिर्घोरा द्वादशवार्षिकी ||
३६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
अतीतानागतं चैव वर्तमानं च यद्विभो |
१८८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
अतीतानागतं राजन्स हि वेत्ति जनार्दनः |
३९ क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
अतीतानागता भावा ये च वर्तन्ति साम्प्रतम् |
१९० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९९
भीष्म उवाच
अतीतानागते चोभे पितृवंशं च भारत |
२६ क
वन पर्व
अध्याय २९७
युधिष्ठिर उवाच
अतीतानागते चोभे स वै सर्वधनी नरः ||
६४ ख
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
अतीतानागते विद्वान्कुशलः सर्वधर्मवित् |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२४
भीष्म उवाच
अतीतानागते विद्वान्सर्वज्ञः सर्वधर्मवित् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
अतीतानागते हित्वा प्रत्युत्पन्नेन वर्तय़ ||
६५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४३
सनत्सुजात उवाच
अतीतानागतेभ्यश्च मुक्तो ह्येतैः सुखी भवेत् ||
२१ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २५३
भीष्म उवाच
अतीतास्वथ वर्षासु शरत्काल उपस्थिते |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३९
विदुर उवाच
अतीते कार्यशेषज्ञो नरोऽर्थैर्न प्रहीय़ते ||
४१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
अतीते द्वादशे वर्षे जाम्ववत्यव्रवीद्धि माम् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६९
भीष्म उवाच
अतीते पात्रसञ्चारे भिक्षां लिप्सेत वै मुनिः ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १११
भीष्म उवाच
अतीतेष्वनपेक्षा ये प्राप्तेष्वर्थेषु निर्ममाः |
१० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४३
व्रह्मो उवाच
अतीतोऽद्वन्द्वमभ्येति तमोमृत्युजरातिगम् ||
२५ ग
उद्योग पर्व
अध्याय १७२
भीष्म उवाच
अतीत्य च तमध्वानमाससाद नराधिपम् ||
२ ग
उद्योग पर्व
अध्याय ११३
नारद उवाच
अतीत्य च नृपानन्यानादित्यकुलसम्भवान् |
४ क
सभा पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
अतीत्य जग्मुर्मिथिलां मालां चर्मण्वतीं नदीम् ||
२८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
अतीत्य ता महावाहुः क्रोशन्तीः कुररीरिव |
१० क
वन पर्व
अध्याय १७४
वैशम्पाय़न उवाच
अतीत्य दुर्गं हिमवत्प्रदेशं; पुरं सुवाहोर्ददृशुर्नृवीराः ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
अतीत्य पितरं युद्धे यदय़ुध्यत भारत ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७६
सञ्जय़ उवाच
अतीत्य मरुधन्वेव प्रय़ान्तौ तृषितौ गजौ |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय १७६
द्रुपद उवाच
अतीत्य लक्ष्यं यो वेद्धा स लव्धा मत्सुतामिति ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय ३९
वैशम्पाय़न उवाच
अतीत्य वनदुर्गाणि संनिकर्षे महागिरेः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
अतीत्य स महाराज द्रोणानीकमहार्णवम् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
अतीत्य समरे योधांस्तावकान्पाण्डुनन्दनः ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
भीष्म उवाच
अतीत्य सर्वदुःखानि सुखी जीवेन्निरामय़ः ||
६२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४१
व्यास उवाच
अतीत्य सुखमासीत अशोचंश्छिन्नसंशय़ः ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०६
भीष्म उवाच
अतीत्य सुरलोकं च गवां लोकं च भारत |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
अतीत्य सेनां पार्थानामवतस्थे चमूमुखे ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२५
भीष्म उवाच
अतीत्यातीत्य राजेन्द्र पुनरभ्येति चान्तिकम् ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
अतीन्द्रः सङ्ग्रहः सर्गो धृतात्मा निय़मो यमः ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०२
याज्ञवल्क्य उवाच
अतीन्द्रिय़मवीजं च जन्ममृत्युतमोनुदम् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२२
युधिष्ठिर उवाच
अतीन्द्रिय़ा निराहारा अनिष्पन्दाः सुगन्धिनः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
एकतद्वितत्रिता ऊचुः
अतीन्द्रिय़ा निराहारा अनिष्पन्दाः सुगन्धिनः ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२२
भीष्म उवाच
अतीन्द्रिय़ाश्चानशनाश्च तत्र; निष्पन्दहीनाः सुसुगन्धिनश्च |
९ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
सूत उवाच
अतीन्द्रिय़ेण शुचिना तपसा भावितात्मना ||
३२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
अतीन्द्रिय़ो महामाय़ो महोत्साहो महावलः ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३५
व्यास उवाच
अतीर्थे व्रह्मणस्त्यागी तीर्थे चाप्रतिपादकः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय ७४
वृहदश्व उवाच
अतीव कृष्णताराभ्यां रक्तान्ताभ्यां जलं तु तत् |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
अतीव गुणसम्पन्नमनिर्देश्यं च वर्चसा |
२५ ख
वन पर्व
अध्याय ७३
केशिन्यु उवाच
अतीव चान्यत्सुमहदाश्चर्यं दृष्टवत्यहम् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय २७३
मार्कण्डेय़ उवाच
अतीव चित्रमाश्चर्यं शक्रप्रह्लादय़ोरिव ||
१८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
अतीव चुक्षोभय़िषुर्जनार्दनं; धनञ्जय़ं चाभिजघान तोमरैः ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय ६९
शकुन्तलो उवाच
अतीव जल्पन्दुर्वाचो भवतीह विहेठकः ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५४
सञ्जय़ उवाच
अतीव तच्चित्रमतीव रूपं; वभूव युद्धं रविभीमसून्वोः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५५
तुलाधार उवाच
अतीव तत्सदा पुण्यं पुण्याभिजनसंहितम् ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५३
भीष्म उवाच
अतीव तपसा युक्तो घोरेण स वभूव ह |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय ४३
सूत उवाच
अतीव तपसा युक्तो वैश्वानरसमद्युतिः |
१२ ख