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उद्योग पर्व
अध्याय १०९
सुपर्ण उवाच
अत्र ते ऋषय़ः सप्त देवी चारुन्धती तथा |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०
वासुदेव उवाच
अत्र ते कथय़िष्यामि यथा वृत्तं जनेश्वर |
४ क
वन पर्व
अध्याय ४९
वृहदश्व उवाच
अत्र ते कथय़िष्यामि यदि शुश्रूषसेऽनघ |
३६ क
शल्य पर्व
अध्याय ३
सञ्जय़ उवाच
अत्र ते पाण्डवैः सार्धं सन्धिं मन्ये क्षमं प्रभो ||
४३ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
अत्र ते पृथिवीपालाः प्राय़शो निधनं गताः |
१६६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
अत्र ते राजशार्दूल वर्तय़िष्ये कथामिमाम् |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११०
सञ्जय़ उवाच
अत्र ते वर्णय़िष्यामि यथा युद्धमवर्तत ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
अत्र ते वर्णय़िष्यामि वर्षं भारत भारतम् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४६
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्णय़िष्येऽहमितिहासं पुरातनम् |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६३
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि इतिहासं पुरातनम् |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७७
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि इतिहासं पुरातनम् |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि इतिहासं पुरातनम् |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१०
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि जन्मय़ोगफलं यथा |
१० क
वन पर्व
अध्याय १८१
मार्कण्डेय़ उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि तदिहैकमनाः शृणु |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय २०
वैशम्पाय़न उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि तदेकाग्रमनाः शृणु ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६४
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि धर्ममर्थविनिश्चय़म् |
१० क
स्त्री पर्व
अध्याय ५
विदुर उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि नमस्कृत्वा स्वय़म्भुवे |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६४
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि नारदेनानुकीर्तितम् |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १००
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि पुरावृत्तं जनाधिप |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११८
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि पुरावृत्तमिदं नृप |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२३
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि पृच्छतो भरतर्षभ |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६०
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि प्रामाण्यमुभय़ोस्तय़ोः |
४ क
वन पर्व
अध्याय १०
व्यास उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि महदाख्यानमुत्तमम् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७९
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि यथा धर्मः पुरातनः |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५८
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि यथा धर्मः सनातनः |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९
युधिष्ठिर उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि यथा नैतत्प्रधानतः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७९
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि यथा पूर्वं महाय़शाः |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि यथादृष्टं यथाश्रुतम् |
२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ११
वासुदेव उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि यथाधर्मं यथाश्रुतम् |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि यन्मां त्वमनुपृच्छसि |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२५
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि युधिष्ठिर निवोध तत् |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्यामि शृणु राजन्यथागमम् |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८८
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्येऽहमितिहासं पुरातनम् |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९१
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्येऽहमितिहासं पुरातनम् |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९८
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्येऽहमितिहासं पुरातनम् |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२४
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तय़िष्येऽहमितिहासं पुरातनम् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
अत्र ते संशय़ो मा भूज्ज्ञानं साङ्ख्यं परं मतम् |
९६ क
आदि पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
अत्र ते हृदय़ं वेद सत्यस्यैवानृतस्य च |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८५
पराशर उवाच
अत्र तेषामधीकारो धर्मेषु द्विपदां वर ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९७
नारद उवाच
अत्र तेऽधर्मनिरता वद्धाः कालेन पीडिताः |
११ क
वन पर्व
अध्याय १२५
लोमश उवाच
अत्र त्वं सह सोदर्यैः पितॄन्देवांश्च तर्पय़ ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०६
सुपर्ण उवाच
अत्र दत्तानि सूर्येण यजूंषि द्विजसत्तम |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९७
नारद उवाच
अत्र दिव्यं हय़शिरः काले पर्वणि पर्वणि |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०७
सुपर्ण उवाच
अत्र दुष्कृतकर्माणो नराः पच्यन्ति गालव |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०७
सुपर्ण उवाच
अत्र देवर्षय़ो नित्यं पितृलोकर्षय़स्तथा |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०८
सुपर्ण उवाच
अत्र देवीं दितिं सुप्तामात्मप्रसवधारिणीम् |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०९
सुपर्ण उवाच
अत्र देव्या तपस्तप्तं महेश्वरपरीप्सय़ा |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०७
सुपर्ण उवाच
अत्र धर्मश्च सत्यं च कर्म चात्र निशाम्यते |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०८
सुपर्ण उवाच
अत्र ध्वजवती नाम कुमारी हरिमेधसः |
१३ क
वन पर्व
अध्याय १८३
मार्कण्डेय़ उवाच
अत्र नः प्रथमं स्थाता महेन्द्रो वै प्रजापतिः ||
१२ ग