उद्योग पर्व
अध्याय
२६
युधिष्ठिर उवाच
अत्रैव च स्यादवधूय़ एष; कामः शरीरे हृदय़ं दुनोति ||
७ ख
विराट पर्व
अध्याय
५०
अर्जुन उवाच
अत्रैव चाविरोधेन एष धर्मः सनातनः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
अत्रैव चेदमव्यग्रः शृण्वाख्यानमनुत्तमम् |
१ क
वन पर्व
अध्याय
१२९
लोमश उवाच
अत्रैव नाहुषो राजा राजन्क्रतुभिरिष्टवान् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
१३०
लोमश उवाच
अत्रैव पुत्रशोकेन वसिष्ठो भगवानृषिः |
९ क
वन पर्व
अध्याय
१२९
लोमश उवाच
अत्रैव पुरुषव्याघ्र मरुत्तः सत्रमुत्तमम् |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
अत्रैव प्रतितिष्ठन्ति पुनरत्रोदय़न्ति च |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
१२९
लोमश उवाच
अत्रैव भरतो राजा मेध्यमश्वमवासृजत् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
११४
लोमश उवाच
अत्रैव रुद्रो राजेन्द्र पशुमादत्तवान्मखे |
७ क
शल्य पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
अत्रैव व्राह्मणी सिद्धा कौमारव्रह्मचारिणी |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
अत्रैव हि महाराज त्रिवर्गः केवलं फलम् ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
वसिष्ठ उवाच
अत्रैवात्रेति च विभो जातमत्रिं वदन्त्यपि ||
१७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२१०
गुरुरु उवाच
अत्रैवावस्थितं सर्वं त्रैलोक्यं सचराचरम् |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०६
सुपर्ण उवाच
अत्रैवोक्ता सवित्रासीत्सावित्री व्रह्मवादिषु ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७१
भीष्म उवाच
अत्रैवोदाहरन्तीमं वोध्यस्य पदसञ्चय़म् |
५७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१
देवस्थान उवाच
अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१९
भीष्म उवाच
अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११
अर्जुन उवाच
अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६७
भीष्म उवाच
अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७५
भीष्म उवाच
अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९
भीष्म उवाच
अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९६
भीष्म उवाच
अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३३
विदुर उवाच
अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् |
८४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
विदुर उवाच
अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् |
१ क
वन पर्व
अध्याय
१३४
अष्टावक्र उवाच
अत्रोग्रसेनसमितेषु राज; न्समागतेष्वप्रतिमेषु राजसु |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०९
गुरुरु उवाच
अत्रोच्यते यथा ह्येतद्वेद योगेश्वरो हरिः |
५ क
वन पर्व
अध्याय
१३०
लोमश उवाच
अत्रोत्तराणां सर्वेषामृषीणां नाहुषस्य च |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
अत्रोपनिषदं पुण्यां कृष्णद्वैपाय़नोऽव्रवीत् |
१९१ क
वन पर्व
अध्याय
१२९
लोमश उवाच
अत्रोपस्पृश्य राजेन्द्र सर्वाँल्लोकान्प्रपश्यति |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०७
गुरुरु उवाच
अत्रोपाय़ं प्रवक्ष्यामि यथावच्छास्त्रचक्षुषा |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८६
दुर्योधन उवाच
अत्रोपाय़ं यथा सम्यङ्न वुध्येत जनार्दनः |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०७
सुपर्ण उवाच
अत्रोष्मपानां देवानां निवासः श्रूय़ते द्विज ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
१३९
लोमश उवाच
अत्रोष्य राजशार्दूल सर्वपापैः प्रमोक्ष्यसे ||
२४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४६
व्रह्मो उवाच
अत्वगस्थ्यथ वामज्जममांसमपि चैव ह ||
४६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७७
वैशम्पाय़न उवाच
अत्वरावानसंरव्धः संरव्धैर्विजिगीषुभिः ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
अथ कन्यापरिवृता गृहात्तस्माद्विनिःसृताः |
४० क
वन पर्व
अध्याय
२७९
मार्कण्डेय़ उवाच
अथ कन्याप्रदाने स तमेवार्थं विचिन्तय़न् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
अथ कर्णः पुनर्द्रोणमाहार्जुनिशरार्दितः |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
अथ कर्णः शरव्रातैर्भीमं वलवदर्दय़त् |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
अथ कर्णस्य सचिवान्षट्शूरांश्चित्रय़ोधिनः |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
अथ कर्णास्त्रमस्त्रेण प्रतिहत्यार्जुनः स्वय़म् |
३१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
अथ कर्णो भृशं क्रुद्धः शीघ्रमस्त्रमुदीरय़न् |
३१ क
वन पर्व
अध्याय
३१
द्रौपद्यु उवाच
अथ कर्म कृतं पापं न चेत्कर्तारमृच्छति |
४२ क
शल्य पर्व
अध्याय
५०
वैशम्पाय़न उवाच
अथ कश्चिदृषिस्तेषां सारस्वतमुपेय़िवान् |
४१ क
शल्य पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
अथ कस्मात्परानेव घ्नतो मर्षय़से नृप ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
दुर्योधन उवाच
अथ कस्मात्पाण्डवानामेकतो मन्यसे जय़म् ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४३
धृतराष्ट्र उवाच
अथ कस्मात्प्रलापोऽय़ं व्राह्मणानां सनातनः ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
धृतराष्ट्र उवाच
अथ कस्मात्स कौन्तेय़ः सखाय़ं रूक्षमव्रवीत् ||
८ ख