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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९४
जनमेजय़ उवाच
अथ कस्मात्स नकुलो गर्हय़ामास तं क्रतुम् |
६ क
विराट पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
अथ कस्मात्स्थिता ह्येते रथेषु रथसत्तमाः |
१६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
धृतराष्ट्र उवाच
अथ कस्माद्धते क्षत्रे कर्मेदं कृतवानसौ |
१४५ क
आदि पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
अथ कस्मान्मद्विशिष्टो लोकादपि च वीर्यवान् |
२८ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
अथ कस्य विकारोऽय़ं येनाय़ं पतितो भुवि ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
अथ कस्यचित्कालस्य वेदं व्राह्मणं जनमेजय़ः पौष्यश्च क्षत्रिय़ावुपेत्योपाध्याय़ं वरय़ां चक्रतुः ||
८५ क
कर्ण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
अथ काकस्य चित्राणि पतितानीतराणि च |
३४ क
कर्ण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
अथ काकाः प्रजहसुर्ये तत्रासन्समागताः |
३० क
सभा पर्व
अध्याय १६
कृष्ण उवाच
अथ काक्षीवतः पुत्रं गौतमस्य महात्मनः |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
अथ काम्वोजमुख्यैस्तु वृहद्भिः शीघ्रगामिभिः |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
अथ कार्मुकमादाय़ महाजलदनिस्वनम् |
३६ क
द्रोण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
अथ कार्ष्णाय़सैर्वाणैः पूर्णकार्मुकनिःसृतैः |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४७
वासुदेव उवाच
अथ कालस्य पर्याय़े वृद्धो नृपतिसत्तमः |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय १३
सूत उवाच
अथ कालस्य महतः पाण्डवेय़ो नराधिपः |
३९ क
आदि पर्व
अध्याय ३६
सूत उवाच
अथ कालस्य महतः स मुनिः संशितव्रतः |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११४
नारद उवाच
अथ काले पुनर्धीमान्गालवः प्रत्युपस्थितः |
१८ क
सभा पर्व
अध्याय १६
कृष्ण उवाच
अथ काले महाप्राज्ञ यथासमय़मागते |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४७
भीष्म उवाच
अथ काले वहुतिथे पूर्णे प्राप्तो भुजङ्गमः |
१ क
वन पर्व
अध्याय ६२
वृहदश्व उवाच
अथ काले वहुतिथे वने महति दारुणे |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४२
भीष्म उवाच
अथ काले व्यतिक्रान्ते कस्मिंश्चित्कुरुनन्दन |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
अथ काले व्यतिक्रान्ते महत्यतिभय़ङ्करे |
३४ क
वन पर्व
अध्याय १२८
लोमश उवाच
अथ काले व्यतीते तु सोमकोऽप्यगमत्परम् ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय ५४
वृहदश्व उवाच
अथ काले शुभे प्राप्ते तिथौ पुण्ये क्षणे तथा |
१ क
वन पर्व
अध्याय १८५
मार्कण्डेय़ उवाच
अथ कालेन महता स मत्स्यः सुमहानभूत् |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय ९६
वैशम्पाय़न उवाच
अथ काशिपतेर्भीष्मः कन्यास्तिस्रोऽप्सरःसमाः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
अथ किञ्चिदपश्यन्तौ दानवौ मधुकैटभौ |
५५ क
शल्य पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
अथ कूले स्वके राजञ्जपन्तमृषिसत्तमम् |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६८
व्राह्मण उवाच
अथ कृच्छ्रगता शान्तां वुद्धिमास्थापय़त्तदा ||
४७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९१
भीष्म उवाच
अथ कृत्वोपहार्याणि चतुर्दश्यां महामतिः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३
नारद उवाच
अथ कृमिः श्लेष्ममय़ो मांसशोणितभोजनः |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
अथ कृष्णं महावाहुरव्रवीत्पाकशासनिः |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
अथ कृष्णो महावाहुरर्जुनं प्रत्यभाषत |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
अथ कृष्णोऽप्यसम्भ्रान्तः पार्थेन सह मारिष |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय ७८
सञ्जय़ उवाच
अथ कृष्णौ महाभागौ तावका दृश्य दंशितौ |
४६ क
कर्ण पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
अथ कृष्णौ शरशतैरश्वत्थाम्नार्दितौ भृशम् |
५१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४५
युधिष्ठिर उवाच
अथ केन प्रमाणेन पुंसामादीय़ते धनम् |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय २५
अर्जुन उवाच
अथ केन प्रय़ुक्तोऽय़ं पापं चरति पूरुषः |
३६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३५
केशिन्यु उवाच
अथ केन स्म पर्यङ्कं सुधन्वा नाधिरोहति ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय २९७
यक्ष उवाच
अथ केनानुभावेन सापत्नं जीवमिच्छसि ||
६९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
अथ कोशाद्विनिष्कृष्य खड्गं भूरिश्रवा रणे |
५३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
अथ कोसलराजस्तु विरथः खड्गचर्मधृत् |
२१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
कृष्ण उवाच
अथ कौशिकमभ्येत्य प्राहुस्तं सत्यवादिनम् |
४४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७६
भीष्म उवाच
अथ क्रुद्धं महादेवं प्रजापतिरभाषत |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
अथ क्रुद्धो रणे पार्थस्त्रिगर्तान्प्रति भारत |
१८ क
वन पर्व
अध्याय २०५
व्याध उवाच
अथ क्षिप्तः शरो घोरो मय़ापि द्विजसत्तम |
२५ क
वन पर्व
अध्याय १९०
वैशम्पाय़न उवाच
अथ क्षुत्तृष्णार्दितः श्रान्तोऽतिमात्रमतिमुक्तागारमपश्यत् ||
२४ क
आदि पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
अथ गङ्गा सरिच्छ्रेष्ठा समुपाय़ात्पितामहम् |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
अथ गङ्गापि तं गर्भमसहन्ती विधारणे |
९ क
वन पर्व
अध्याय २९०
सूर्य उवाच
अथ गच्छाम्यहं भद्रे त्वय़ासङ्गम्य सुस्मिते |
१५ क
वन पर्व
अध्याय ८०
पुलस्त्य उवाच
अथ गच्छेत राजेन्द्र देविकां लोकविश्रुताम् |
११० क