भीष्म पर्व
अध्याय
२४
श्रीभगवानु उवाच
अथ चैनं नित्यजातं नित्यं वा मन्यसे मृतम् |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१
भीष्म उवाच
अथ चैवङ्गते दोषो मय़ि त्वमपि दोषवान् ||
५० ख
सभा पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
अथ चैषां वरिष्ठाय़ समर्थाय़ोपनीय़ताम् ||
२५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१७
सिद्ध उवाच
अथ चोद्वन्धनादीनि परीतानि व्यवस्यति ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय
११८
वैशम्पाय़न उवाच
अथ छत्राणि शुभ्राणि पाण्डुराणि वृहन्ति च |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
१६७
गन्धर्व उवाच
अथ छित्त्वा नदी पाशांस्तस्यारिवलमर्दन |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
अथ जग्राह गोविन्दो रश्मीन्रश्मिवतां वरः |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
अथ जाता महीपालाः केचिद्वलसमन्विताः |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८३
पराशर उवाच
अथ जातिसहस्राणि वहूनि परिवर्तते ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
७२
केशिन्यु उवाच
अथ जानाति वार्ष्णेय़ः क्व नु राजा नलो गतः |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
अथ जाम्वूनदवपुर्विमानेन महार्चिषा |
७ क
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
अथ जिष्णुरुपावृत्य पृथुधारेण कार्मुकम् |
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
अथ जीवति ते भर्ता प्रोषितोऽप्यथ वा क्वचित् |
६२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
अथ ज्ञातुं प्रपद्यस्व मनसा वृषभध्वजम् ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२९
व्यास उवाच
अथ ज्ञानप्लवं धीरो गृहीत्वा शान्तिमास्थितः |
१ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
अथ ज्येष्ठिलमासाद्य तीर्थं परमसंमतम् |
११५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५२
भीष्म उवाच
अथ तं कुशिको हृष्टः प्रावेशय़दनुत्तमम् |
२३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
अथ तं छिन्नधन्वानमभ्यविध्यत्स्तनान्तरे |
३३ ख
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
अथ तं जडसर्वाङ्गं व्यावृत्तनय़नोल्वणम् |
६५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
अथ तं तापसं शूद्रः सोऽव्रवीद्भरतर्षभ |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
अथ तं देशमभ्यागाद्ययातिर्नहुषात्मजः |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
१२८
लोमश उवाच
अथ तं नरके घोरे पच्यमानं ददर्श सः |
१० क
वन पर्व
अध्याय
२३९
वैशम्पाय़न उवाच
अथ तं निश्चय़ं तस्य वुद्ध्वा दैतेय़दानवाः |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६७
भीष्म उवाच
अथ तं पापकर्माणं राजधर्मा वकाधिपः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
२०८
वैशम्पाय़न उवाच
अथ तं पुरुषव्याघ्रमन्तर्जलचरो महान् |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
अथ तं प्रमदाः प्राहुर्भगवान्प्रविशत्विति ||
४२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९७
भीष्म उवाच
अथ तं प्रहरिष्यन्तं सूर्योऽभ्येत्य वचोऽव्रवीत् |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
अथ तं रथमाय़ान्तं दृष्ट्वात्यद्भुतदर्शनम् |
३७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१
भीष्म उवाच
अथ तं स्नाय़ुपाशेन वद्ध्वा सर्पममर्षितः |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
अथ तत्कर्म दृष्ट्वास्याः प्रीतस्त्रिभुवनेश्वरः |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६६
भीष्म उवाच
अथ तत्र महार्चिष्माननलो वातसारथिः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
अथ तत्र विरागी स गच्छति त्वथ संशय़म् |
१२१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
अथ तत्रागमद्व्यासो यथोक्तं ते मय़ानघ ||
७ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
५
विदुर उवाच
अथ तत्रापि चान्योऽस्य भूय़ो जात उपद्रवः |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६
शल्य उवाच
अथ तत्रापि पद्मानि विचिन्वन्भरतर्षभ |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१२
भीष्म उवाच
अथ तत्राप्युपादत्ते तमो व्यक्तमिवानृतम् ||
३८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३८
वैशम्पाय़न उवाच
अथ तत्रासतस्तस्य चतुर्वक्त्रस्य धीमतः |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
१९३
दुर्योधन उवाच
अथ तत्रैव वा तेषां निवासं रोचय़न्तु ते ||
६ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१८
वासुदेव उवाच
अथ तत्सहसा राजंश्छिन्नज्यं विस्फुरद्धनुः ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
अथ तदन्नं मुक्तकेश्या स्त्रिय़ोपहृतं सकेशमशुचि मत्वोत्तङ्कं प्रसादय़ामास |
१२९ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
अथ तद्दक्षिणेनापि ग्रहीतुमुपचक्रमे |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९९
मनुरु उवाच
अथ तद्द्रक्ष्यसे व्रह्म मणौ सूत्रमिवार्पितम् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
अथ तद्वनमाजग्मुः कदाचिद्भरतर्षभ |
११ क
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
अथ तद्विद्रुतं सैन्यं दृष्ट्वा देवः पुरन्दरः |
३९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
अथ तव नरदेव सैनिका; स्तव च सुताः सुरसूनुसंनिभाः |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
अथ तव रथमुख्यास्तान्प्रतीय़ुस्त्वरन्तो; हृदिकसुतकृपौ च द्रौणिदुर्योधनौ च |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय
११९
वैशम्पाय़न उवाच
अथ तस्मादवरजं ज्येष्ठं चैव युधिष्ठिरम् |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३२
भीष्म उवाच
अथ तस्मादुद्विजते सर्वो लोको वृकादिव ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११९
नारद उवाच
अथ तस्मादुपगतो गालवोऽप्याह पार्थिवम् |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
अथ तस्मिन्ननागच्छत्युपाध्याय़ः शिष्यानवोचत् |
५३ क