शल्य पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
अथ त्रितो वृकं दृष्ट्वा पथि तिष्ठन्तमग्रतः |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय
१९६
द्रोण उवाच
अथ त्वं मन्यसे दुष्टं व्रूहि यत्परमं हितम् ||
२७ ख
सभा पर्व
अध्याय
५८
युधिष्ठिर उवाच
अथ त्वं शकुने कस्माद्वित्तं समनुपृच्छसि ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२१
सञ्जय़ उवाच
अथ त्वमस्य मूर्धानं पातय़िष्यसि भूतले |
२७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
अथ त्वरन्कर्णवधाय़ पाण्डवो; महेन्द्रवज्रानलदण्डसंनिभम् |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३३
मातो उवाच
अथ त्वां पूजय़िष्यामि हत्वा वै सर्वसैन्धवान् |
१९ क
विराट पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
अथ त्वाचार्यमुख्येन शरान्सृष्टाञ्शिलाशितान् |
४३ क
आदि पर्व
अध्याय
१९२
वैशम्पाय़न उवाच
अथ त्वाज्ञापय़ामास द्रौपद्या भूषणं वहु |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
अथ त्विदानीं तुमुले विमर्दे; द्विषद्भिरेको वहुभिः समावृतः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
११३
वैशम्पाय़न उवाच
अथ त्विमं प्रवक्ष्यामि धर्मं त्वेतं निवोध मे |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
अथ दक्षिणमावृत्य वृसीं परमशीर्षिकाम् |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४६
सञ्जय़ उवाच
अथ दध्मुर्महाशङ्खान्धृष्टद्युम्नशिखण्डिनौ |
४९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५
वासुदेव उवाच
अथ दर्पान्वितो मोहान्न कुर्याद्धृतराष्ट्रजः |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
अथ दर्भांश्च वन्याश्च ओषधीर्भरतर्षभ |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
कृष्ण उवाच
अथ दस्युभय़ात्केचित्तदा तद्वनमाविशन् |
४३ क
वन पर्व
अध्याय
२३
वासुदेव उवाच
अथ दानवसङ्घास्ते विकृताननमूर्धजाः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
१३६
वैशम्पाय़न उवाच
अथ दानापदेशेन कुन्ती व्राह्मणभोजनम् |
५ क
वन पर्व
अध्याय
१४७
हनूमानु उवाच
अथ दाशरथिर्वीरो रामो नाम महावलः |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
अथ दाशार्णको राजा सहसाभ्यागमत्तदा |
१२ क
शल्य पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
अथ दीप्तोऽग्निना ह्याशु प्रजज्वाल महीपते ||
१३ ख
सभा पर्व
अध्याय
१७
कृष्ण उवाच
अथ दीर्घस्य कालस्य तपोवनगतो नृपः |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
७६
वैशम्पाय़न उवाच
अथ दीर्घस्य कालस्य देवय़ानी नृपोत्तम |
१ क
वन पर्व
अध्याय
६८
वृहदश्व उवाच
अथ दीर्घस्य कालस्य पर्णादो नाम वै द्विजः |
१ क
स्त्री पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
अथ दीर्घस्य कालस्य लव्धसञ्ज्ञो महीपतिः |
५ क
वन पर्व
अध्याय
१२२
लोमश उवाच
अथ दीर्घस्य कालस्य शर्यातिर्नाम पार्थिवः |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
अथ दीर्घस्य कालस्य स तप्यञ्शूद्रतापसः |
३१ क
आदि पर्व
अध्याय
२०५
वैशम्पाय़न उवाच
अथ दीर्घेण कालेन व्राह्मणस्य विशां पते |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
अथ दुर्योधनं दृष्ट्वा भीमसेनो महावलः |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
अथ दुर्योधनं राजा धृतराष्ट्रोऽभ्यभाषत |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
अथ दुर्योधनं राजा धृतराष्ट्रोऽभ्यभाषत |
३३ क
सभा पर्व
अध्याय
६६
वैशम्पाय़न उवाच
अथ दुर्योधनः कर्णः शकुनिश्चापि सौवलः |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६१
सञ्जय़ उवाच
अथ दुर्योधनः कर्णः शकुनिश्चापि सौवलः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
अथ दुर्योधनः कर्णमव्रवीद्वाह्लिकं कृपम् |
१५ क
विराट पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
अथ दुर्योधनः कर्णो दुःशासनविविंशती |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
अथ दुर्योधनः कृष्णं शकुनिश्चापि सौवलः |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
अथ दुर्योधनस्तत्र भ्रातृभिः सह भारत |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
२२९
वैशम्पाय़न उवाच
अथ दुर्योधनो राजा तत्र तत्र वने वसन् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१००
सञ्जय़ उवाच
अथ दुर्योधनो राजा दृढमादाय़ कार्मुकम् |
३६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५३
सञ्जय़ उवाच
अथ दुर्योधनो राजा दृष्ट्वा हतमलाय़ुधम् |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
अथ दुर्योधनो राजा भीमं विव्याध पत्रिभिः |
४३ क
आदि पर्व
अध्याय
१९२
वैशम्पाय़न उवाच
अथ दुर्योधनो राजा विमना भ्रातृभिः सह |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२३०
वैशम्पाय़न उवाच
अथ दुर्योधनो राजा शकुनिश्चापि सौवलः |
१७ क
विराट पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
अथ दुर्योधनो राजा समरे भीष्ममव्रवीत् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
अथ दुर्योधनो राजा सात्यकिं प्रत्यभाषत |
२२ क
सभा पर्व
अध्याय
१६
कृष्ण उवाच
अथ दृष्ट्वा तथाभूते राजानं चेष्टसन्ततिम् |
४५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
भीष्म उवाच
अथ दृष्ट्वा परिव्राट्स तान्महर्षीञ्शुनःसखः |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
अथ दृष्ट्वा व्यतिक्रान्तौ ज्वलिताविव पावकौ |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
अथ दृष्ट्वा हतं पुत्रमश्वत्थाम्ना महावलम् |
५४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३८
कुन्त्यु उवाच
अथ देवः सहस्रांशुर्मत्समीपगतोऽभवत् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१४
भीष्म उवाच
अथ देवगणं सर्वं सम्भ्रान्तेन्द्रिय़मानसम् |
११ क