शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
अथ पञ्चदशो राजन्गुणस्तत्रापरः स्मृतः |
१०६ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
अथ पञ्चनदं गत्वा निय़तो निय़ताशनः |
९९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
अथ पणवमृदङ्गदुन्दुभीनां; कृकरमहानकभेरिझर्झराणाम् |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
अथ पर्यपतद्द्रोणः पाण्डवानां वलं वली |
४२ क
वन पर्व
अध्याय
६९
वृहदश्व उवाच
अथ पर्यपतन्भूमौ जानुभिस्ते हय़ोत्तमाः ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०२
भीष्म उवाच
अथ पर्याय़श ऋषीन्वाहनाय़ोपचक्रमे |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
१६
सूत उवाच
अथ पर्वतराजानं तमनन्तो महावलः |
७ क
शल्य पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
अथ पश्चात्ततः कृष्णो रश्मीनुत्सृज्य वाजिनाम् |
११ क
वन पर्व
अध्याय
१८०
वैशम्पाय़न उवाच
अथ पश्चात्तपोवृद्धो वहुवर्षसहस्रधृक् |
३९ ख
वन पर्व
अध्याय
१७७
सर्प उवाच
अथ पश्चाद्विमोक्ष्यामि भ्रातरं ते वृकोदरम् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
अथ पश्याम्यहं पार्थान्प्राप्तानिह कथञ्चन |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
अथ पाञ्चालचेदीनां सृञ्जय़ानां च मारिष |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
अथ पाण्डवमस्यन्तं यमकालान्तकाञ्शरान् |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
अथ पाण्डुर्मृगय़ां चरन्मैथुनगतमृषिमपश्यन्मृग्यां वर्तमानम् |
६४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
अथ पाण्डुसुताः सर्वे परिवार्य युधिष्ठिरम् |
४४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
अथ पाण्डून्कुरूंश्चैव प्रणिपत्याग्रतः स्थितान् |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
९३
भीष्म उवाच
अथ पापं कृतं वुद्ध्या न च पश्यत्यवुद्धिमान् |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
१०६
वैशम्पाय़न उवाच
अथ पारशवीं कन्यां देवकस्य महीपतेः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
अथ पार्थं महावाहुर्धनञ्जय़मुपासदत् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
अथ पार्थैर्जितां कृत्स्नां पृथिवीं प्रत्यपद्यथाः ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
अथ पार्थो महावाहुर्द्रावय़ित्वा वरूथिनीम् |
११७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६९
द्रोण उवाच
अथ पार्श्वे स्थितं विष्णुं शक्रादींश्च सुरोत्तमान् |
५२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
अथ पीतोदकं सोऽश्वं वृक्षे वद्ध्वा नृपोत्तमः |
९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
अथ पुण्यं गिरिवरमस्तमभ्यगमद्रविः |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
१२४
वैशम्पाय़न उवाच
अथ पुण्याहघोषस्य पुण्यस्य तदनन्तरम् |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
अथ पुत्रो विकर्णस्ते क्षत्रव्रतमनुस्मरन् |
८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
अथ पुरुषवरौ कृताह्निकौ; भवमभिपूज्य यथाविधि प्रभुम् |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५२
सञ्जय़ उवाच
अथ पूर्णाय़तोत्सृष्टैः शरैराशीविषोपमैः |
३८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६३
नारद उवाच
अथ पूर्वास्वषाढासु दधिपात्राण्युपोषितः |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५
भीष्म उवाच
अथ पृष्टः शुकः प्राह मूर्ध्ना समभिवाद्य तम् |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११९
नारद उवाच
अथ प्रचलितः स्थानादासनाच्च परिच्युतः |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३५
विदुर उवाच
अथ प्रच्छन्नपापानां शास्ता वैवस्वतो यमः ||
६१ ख
वन पर्व
अध्याय
७३
केशिन्यु उवाच
अथ प्रज्वलितस्तत्र सहसा हव्यवाहनः |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
अथ प्रतीपकर्तारं सततं विजितात्मनाम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
१९१
वैशम्पाय़न उवाच
अथ प्रत्यभिजानाति मां भवानिति ||
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
अथ प्रत्यागतप्राणास्तव पुत्रा महारथाः |
५० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५९
द्युमत्सेन उवाच
अथ प्रथमकल्पेन सत्यवन्सङ्करो भवेत् |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
अथ प्रववृते युद्धं द्रौणिराक्षसय़ोर्मृधे |
९० क
आदि पर्व
अध्याय
१३६
वैशम्पाय़न उवाच
अथ प्रवाते तुमुले निशि सुप्ते जने विभो |
९ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
अथ प्रविश्य तद्वेश्म धृष्टद्युम्नस्य भारत |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
अथ प्रवृत्ते गान्धर्वे दिव्ये ऋषिरुपावसत् |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
अथ प्रहस्य वीभत्सुर्ललित्थान्मालवानपि |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६७
भीष्म उवाच
अथ प्राह यमः कञ्चित्पुरुषं कृष्णवाससम् |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
अथ प्रय़ान्तं राजानमन्वय़ुस्ते तदाच्युतम् |
४१ क
वन पर्व
अध्याय
१७२
वैशम्पाय़न उवाच
अथ प्रय़ोक्ष्यमाणेन दिव्यान्यस्त्राणि तेन वै |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०
शल्य उवाच
अथ फेनं तदापश्यत्समुद्रे पर्वतोपमम् ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय
२८१
मार्कण्डेय़ उवाच
अथ भार्यासहाय़ः स फलान्यादाय़ वीर्यवान् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
भीष्म उवाच
अथ भास्करमुद्यन्तं रश्मिजालपुरस्कृतम् |
१० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
अथ भीमः सुहृन्मध्ये वाहुशव्दं तथाकरोत् |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
अथ भीमरथः शाल्वमाशुगैराय़सैः शितैः |
२६ क