शान्ति पर्व
अध्याय
२९८
याज्ञवल्क्य उवाच
अथ सप्त तु व्यक्तानि प्राहुरध्यात्मचिन्तकाः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
२१५
मार्कण्डेय़ उवाच
अथ सप्तर्षय़ः श्रुत्वा जातं पुत्रं महौजसम् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११२
भीष्म उवाच
अथ सम्पूज्य तद्वाक्यं मृगेन्द्रस्य महात्मनः |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
अथ सम्प्रतिपत्तिज्ञः प्राव्रवीद्दीर्घदर्शिनम् |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
शुक्र उवाच
अथ सर्जरसादीनां गन्धैः पार्थिवदारवैः |
४१ क
आदि पर्व
अध्याय
३०
सूत उवाच
अथ सर्पानुवाचेदं सर्वान्परमहृष्टवत् ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
अथ सर्वमुपन्यस्तमग्रतश्च्यवनस्य तत् |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
११
शकुनिरु उवाच
अथ सर्वाणि कर्माणि मन्त्रसिद्धानि चक्षते ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७२
भीष्म उवाच
अथ सर्वाणि कुर्वीथाः कार्याणि सपुरोहितः ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२५
वैशम्पाय़न उवाच
अथ सर्वे भवन्तो मां विद्विषन्ति सराजकाः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
२३७
दुर्योधन उवाच
अथ सर्वे रणं मुक्त्वा प्रय़ाताः खचरा दिवम् |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४५
वासुदेव उवाच
अथ सर्वेऽमरा रुद्रं जग्मुः शरणमर्दिताः ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
अथ सर्वेऽमरा रुद्रं जग्मुः शरणमर्दिताः ||
५४ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
अथ ससम्भ्रमस्तक्षकोऽग्नितेजोभय़विषण्णस्ते कुण्डले गृहीत्वा सहसा स्वभवनान्निष्क्रम्योत्तङ्कमुवाच |
१५९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
अथ सा तान्सुतान्गृह्य पूर्वपुत्रानभाषत |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
१९०
वैशम्पाय़न उवाच
अथ सा राज्ञः समीपे पर्यक्रामत् ||
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
अष्टावक्र उवाच
अथ सा वेपमानाङ्गी निमित्तं शीतजं तदा |
५० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
भीष्म उवाच
अथ सा शकुनी राजन्नागमत्फलहारिका |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
अथ सा स्त्री तदोवाच भगवन्पश्य वै रवेः |
७५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२१
भीष्म उवाच
अथ सा स्त्री तमुक्त्वा तु विप्रमेवं भवत्विति |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
१८१
कर्ण उवाच
अथ साक्षाद्धरिहय़ः साक्षाद्वा विष्णुरच्युतः ||
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
अथ सात्यकिमुत्सृज्य त्वरन्कर्णोऽर्जुनं त्रिभिः |
२३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
अथ सात्यकिरागत्य कर्णं विद्ध्वा शितैः शरैः |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७२
भीष्म उवाच
अथ साम्नैव लिप्सेथा धनमव्राह्मणेषु यत् ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
अथ सुन्दरिकातीर्थं प्राप्य सिद्धनिषेवितम् |
५१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
अथ सुव्याहृतं तस्य श्रुत्वा शत्रुर्विचक्षणः |
६३ क
विराट पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
अथ सूदेन तं मल्लं योधय़ामास मत्स्यराट् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२३
एकतद्वितत्रिता ऊचुः
अथ सूर्यसहस्रस्य प्रभां युगपदुत्थिताम् |
३५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
अथ सूर्यो ददौ तस्मै छत्रोपानहमाशु वै ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५२
भीष्म उवाच
अथ सूर्योऽतिचक्राम तेषां संवदतां तथा |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
अथ सैन्यस्य मध्ये तु प्राक्रोशत्पाण्डवाग्रजः |
८९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९१
उतथ्य उवाच
अथ सोऽन्वतपत्पश्चाच्छ्रिय़ं दृष्ट्वा पुरन्दरे ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६३
भीष्म उवाच
अथ सौम्येन वपुषा देवानुचरमन्तिके |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२१
भीष्म उवाच
अथ स्त्री भगवन्तं सा सुप्यतामित्यचोदय़त् |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
अथ स्थितानां पाण्डूनां दीनानां भरतर्षभ |
३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
अथ स्नातः स भगवान्सिंहासनगतः प्रभुः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९८
युधिष्ठिर उवाच
अथ स्म कर्मणा येन लोकाञ्जय़ति पार्थिवः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५५
जाजलिरु उवाच
अथ स्वकर्मणा केन वाणिज प्राप्नुय़ात्सुखम् |
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
अथ स्वर्गस्तथा रूपी व्राह्मणं वाक्यमव्रवीत् |
१४ क
विराट पर्व
अध्याय
४
धौम्य उवाच
अथ स्वविषय़ं प्राप्य यथाकामं चरिष्यथ ||
४४ ख
सभा पर्व
अध्याय
१३
श्रीकृष्ण उवाच
अथ हंस इति ख्यातः कश्चिदासीन्महान्नृपः |
३९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
अथ हंसः स तच्छ्रुत्वा प्रापतत्पश्चिमां दिशम् |
३९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
अथ हंसवचो मूढः कुत्सय़ित्वा पुनः पुनः |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
५०
वृहदश्व उवाच
अथ हंसा विससृपुः सर्वतः प्रमदावने |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
अथ हंसाः समुद्रान्ते कदाचिदभिपातिनः |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
अथ हंसोऽभ्यतिक्रम्य मुहूर्तमिति चेति च |
४३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३८
कुन्त्यु उवाच
अथ हर्म्यतलस्थाहं रविमुद्यन्तमीक्षती |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
अथ हर्षपरीताङ्गः सात्यकिर्भीममव्रवीत् |
६६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९४
ऋषय़ ऊचुः
अथ हित्वा यय़ुः सर्वे वनमाहारकाङ्क्षिणः ||
२१ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
अथ हेमत्सरुं दिव्यं खड्गमाकाशवर्चसम् |
१४ क