उद्योग पर्व
अध्याय
१२
वृहस्पतिरु उवाच
इन्द्राणीहितमेतद्धि तथास्माकं भविष्यति ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय
८४
वैशम्पाय़न उवाच
इन्द्रादनवरः शक्तः सुरसूनुः सुराधिपम् |
६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
इन्द्रादनवरः श्रीमान्देवैरपि सुदुर्जय़ः ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
इन्द्रादनवरः सङ्ख्ये गजय़ानविशारदः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
इन्द्रादीन्वीर्यसम्पन्नान्विवस्वन्तमथापि च ||
९ ग
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
इन्द्राद्धनञ्जय़ः श्रीमान्सर्वशस्त्रभृतां वरः ||
९७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२
शल्य उवाच
इन्द्राद्विशिष्टो नहुषो देवराजो महाद्युतिः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
२७
सूत उवाच
इन्द्रार्थं च भवन्तोऽपि यत्नवन्तस्तपोधनाः ||
१८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
इन्द्रार्थमभिकामेन निर्मितं विश्वकर्मणा ||
३६ ख
आदि पर्व
अध्याय
२७
सूत उवाच
इन्द्रार्थोऽय़ं समारम्भः सर्वेषां नः प्रजापते |
२२ क
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
इन्द्राविष्णू महावीर्यौ सूर्याचन्द्रमसौ तथा |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
इन्द्राविष्णू यथा प्रीतौ जम्भस्य वधकाङ्क्षिणौ ||
८१ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१२१
सञ्जय़ उवाच
इन्द्राशनिसमस्पर्शं दिव्यमन्त्राभिमन्त्रितम् ||
३० ख
विराट पर्व
अध्याय
४३
कर्ण उवाच
इन्द्राशनिसमस्पर्शं महेन्द्रसमतेजसम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
इन्द्राशनिसमस्पर्शं वज्रसंहननं दृढम् |
९४ क
शल्य पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
इन्द्राशनिसमस्पर्शा गाण्डीवप्रेषिताः शराः ||
५५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८५
भीष्म उवाच
इन्द्राशनिसमस्पर्शां यमदण्डोपमप्रभाम् |
५ क
शल्य पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
इन्द्राशनिसमस्पर्शानविषह्यान्महौजसः |
२ क
शल्य पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
इन्द्राशनिसमस्पर्शैः समन्तात्पर्यवाकिरत् |
५० ख
वन पर्व
अध्याय
१६७
अर्जुन उवाच
इन्द्राशनिसमस्पर्शैर्वेगवद्भिरजिह्मगैः |
२७ क
शल्य पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
इन्द्राशनिसमां घोरां यमदण्डमिवोद्यताम् |
२५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
कृष्ण उवाच
इन्द्राशनिसमान्घोरानसृजत्पावकोपमान् ||
४६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३४
विदुर उवाच
इन्द्राय़ स प्रणमते नमते यो वलीय़से ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६७
भीष्म उवाच
इन्द्राय़ स प्रणमते नमते यो वलीय़से ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५
कृष्ण उवाच
इन्द्राय़ुधपिनद्धाङ्गं विद्युन्मालागवाक्षकम् |
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
इन्द्राय़ुधसवर्णं तत्स विस्फार्य महद्धनुः |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३९
कर्ण उवाच
इन्द्राय़ुधसवर्णश्च कुन्तिभोजो महारथः ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
इन्द्राय़ुधसवर्णाभाः पताका भरतर्षभ |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
इन्द्राय़ुधसवर्णाभिः पताकाभिरलङ्कृतः |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
इन्द्राय़ुधसवर्णैस्तु कुन्तिभोजो हय़ोत्तमैः |
३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
इन्द्राय़ुधसहस्राभं धनुस्तस्य महात्मनः |
१२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२४४
व्यास उवाच
इन्द्रिय़ं घ्राणसञ्ज्ञानं नासिकेत्यभिधीय़ते |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४२
व्रह्मो उवाच
इन्द्रिय़ग्राम इत्येष मन एकादशं भवेत् |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०४
याज्ञवल्क्य उवाच
इन्द्रिय़ग्राममखिलं मनस्यभिनिवेश्य ह ||
१४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५०
व्रह्मो उवाच
इन्द्रिय़ग्रामसंय़ुक्तो मनःसारथिरेव च |
५ क
वन पर्व
अध्याय
३२
युधिष्ठिर उवाच
इन्द्रिय़प्रीतिसम्वद्धं यदिदं लोकसाक्षिकम् |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
श्रीरु उवाच
इन्द्रिय़स्य विसर्गं तेऽरोचय़न्त कदाचन ||
४४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२५
श्रीभगवानु उवाच
इन्द्रिय़स्येन्द्रिय़स्यार्थे रागद्वेषौ व्यवस्थितौ |
३४ क
वन पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
इन्द्रिय़ाणां च पञ्चानां मनसो हृदय़स्य च |
३७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२२
व्राह्मण उवाच
इन्द्रिय़ाणां च संवादं मनसश्चैव भामिनि ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३१
व्यास उवाच
इन्द्रिय़ाणां तथैवेषां सर्वेषामीश्वरं मनः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३८
व्यास उवाच
इन्द्रिय़ाणां तु सर्वेषां वश्यात्मा चलितस्मृतिः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
इन्द्रिय़ाणां तु सर्वेषां स्वस्थानेष्वेव सर्वशः |
८६ क
वन पर्व
अध्याय
१९७
स्त्र्यु उवाच
इन्द्रिय़ाणां निग्रहं च शाश्वतं द्विजसत्तम |
३८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४२
व्रह्मो उवाच
इन्द्रिय़ाणां निरोधेन स तांस्त्यजति दुस्त्यजान् ||
५५ ख
वन पर्व
अध्याय
२००
व्याध उवाच
इन्द्रिय़ाणां निरोधेन सत्येन च दमेन च |
५२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४२
व्रह्मो उवाच
इन्द्रिय़ाणां निरोधेन सर्वेषां विषय़ैषिणाम् |
४७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२४०
व्यास उवाच
इन्द्रिय़ाणां पृथग्भावाद्वुद्धिर्विक्रिय़ते ह्यणु |
४ क
वन पर्व
अध्याय
२०२
व्याध उवाच
इन्द्रिय़ाणां प्रसङ्गेन दोषमृच्छत्यसंशय़म् |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१०
भीष्म उवाच
इन्द्रिय़ाणां प्रसङ्गेन दोषमृच्छत्यसंशय़म् |
८ क