आदि पर्व
अध्याय
१६२
गन्धर्व उवाच
अथाजगाम विप्रर्षिस्तदा द्वादशमेऽहनि ||
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
अथाजग्मुः सुवहुलं रत्नमादाय़ पाण्डवाः ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
२४२
वैशम्पाय़न उवाच
अथाजग्मुर्नरश्रेष्ठा नानाजनपदेश्वराः |
१७ क
शल्य पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
अथाजग्मुस्ततो राजन्राक्षसास्तत्र भारत |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
अथात्मकृत्यत्वरितः सम्यक्प्रश्रय़माचरन् |
९५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७७
सञ्जय़ उवाच
अथात्मजं तव पुनर्गाङ्गेय़ो ध्यानमास्थितम् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
अथात्मजास्ते सहिताभिपेतु; रन्ये च योधास्त्वरितास्त्वदीय़ाः |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
अथात्यर्थविसृष्टेन द्विषतामसुभोजिना |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
अथात्र नाराय़णगीतमाहु; र्महर्षय़स्तात महानुभावाः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
२६
सूत उवाच
अथात्र लम्वतोऽपश्यद्वालखिल्यानधोमुखान् ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
भीष्म उवाच
अथात्रिप्रमुखा राजन्वने तस्मिन्महर्षय़ः |
१ क
वन पर्व
अध्याय
१८३
मार्कण्डेय़ उवाच
अथात्रिरपि राजेन्द्र गौतमं प्रत्यभाषत |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९१
भीष्म उवाच
अथात्रिस्तं तथा दृष्ट्वा पुत्रशोकेन कर्शितम् |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
अथात्वरद्भीष्मवधाय़ जिष्णु; र्वलानि राज्ञां समरे निहत्य ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९३
भीष्म उवाच
अथाददानः कल्याणमनसूय़ुर्जितेन्द्रिय़ः |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
अथाददे वारुणमन्यदस्त्रं; शिखण्ड्यथोग्रं प्रतिघाताय़ तस्य |
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९७
मनुरु उवाच
अथादर्शतलप्रख्ये पश्यत्यात्मानमात्मनि ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०२
भीष्म उवाच
अथादितेय़ाः सन्त्रस्ता व्रह्माणमिदमव्रुवन् |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७९
सञ्जय़ उवाच
अथादृश्यत धर्मात्मा भृगुश्रेष्ठो महातपाः |
३१ क
वन पर्व
अध्याय
२७१
मार्कण्डेय़ उवाच
अथाद्रिशृङ्गमादाय़ हनूमान्मारुतात्मजः |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
व्रह्मो उवाच
अथाधिज्यं धनुः कृत्वा शर्वः सन्धाय़ तं शरम् |
११५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
अथानन्तमपारं च नरेन्द्रस्तिमितह्रदम् ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१८
भीष्म उवाच
अथानुज्ञाप्य तमृषिं नारदं लोकविश्रुतम् |
६० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३१
राजो उवाच
अथानुपदमेवाशु तत्रागच्छत्प्रतर्दनः |
४३ क
वन पर्व
अध्याय
२४६
व्यास उवाच
अथानुलिलिपेऽङ्गानि जगाम च यथागतम् ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
११६
अकृतव्रण उवाच
अथानूपपतिर्वीरः कार्तवीर्योऽभ्यवर्तत ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
अथान्तरा तु धर्मस्य अधर्ममुपसेवते |
३६ क
वन पर्व
अध्याय
१०४
लोमश उवाच
अथान्तरिक्षाच्छुश्राव वाचं गम्भीरनिस्वनाम् ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
अथान्तरिक्षे दिवि चेह चासकृ; द्वभूव हाहेति जनस्य निस्वनः ||
५१ ख
आदि पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
अथान्तरिक्षे दुःषन्तं वागुवाचाशरीरिणी |
२८ ख
विराट पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
अथान्तरिक्षे नादोऽभूद्द्रोणं तत्र प्रशंसताम् |
५५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५३
भीष्म उवाच
अथान्तरिक्षे वागासीत्तां स शुश्राव जाजलिः |
४२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३५
कुन्त्यु उवाच
अथान्तरिक्षे वागासीद्दिव्यरूपा मनोरमा |
२ क
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
अथान्यं रथमास्थाय़ धनुरादाय़ चापरम् |
२८ क
शल्य पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
अथान्यं रथमास्थाय़ धर्मराजो युधिष्ठिरः |
२३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
अथान्यं रथमास्थाय़ वृषसेनो महारथः |
६७ क
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
अथान्यं रथमास्थाय़ सात्यकिः सत्यविक्रमः |
२८ क
शल्य पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
अथान्यं रथमास्थाय़ हार्दिक्यः समपद्यत ||
३६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
अथान्यं रथमास्थाय़ हार्दिक्योऽपि न्यवर्तत ||
८१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
अथान्यत्स समादाय़ दिव्यमाङ्गिरसं धनुः |
१२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
अथान्यदादाय़ धनुः सुशीघ्रं; कर्णात्मजः पाण्डवमभ्यविध्यत् |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
अथान्यद्धनुरादाय़ कर्णो भारत दुर्मनाः |
६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
अथान्यद्धनुरादाय़ कर्णो वैकर्तनस्तदा |
६३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
अथान्यद्धनुरादाय़ कृतवर्मा महारथः |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
अथान्यद्धनुरादाय़ कृतवर्मा वृकोदरम् |
२९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
अथान्यद्धनुरादाय़ कृपः शस्त्रभृतां वरः ||
५० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४४
सञ्जय़ उवाच
अथान्यद्धनुरादाय़ गौतमो रथिनां वरः |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
अथान्यद्धनुरादाय़ गौतमो रथिनां वरः |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
अथान्यद्धनुरादाय़ त्यक्त्वा तच्च महद्धनुः |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
अथान्यद्धनुरादाय़ दृढं भारसहं महत् |
७९ क