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कर्ण पर्व
अध्याय ४९
कृष्ण उवाच
अथापश्यत्स पीतोदं श्वापदं घ्राणचक्षुषम् ||
३६ ख
सभा पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
अथापश्यत्सुतान्सर्वान्हृताभरणवाससः ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय २७
सूत उवाच
अथापश्यदृषीन्ह्रस्वानङ्गुष्ठोदरपर्वणः |
८ क
मौसल पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
अथापश्यद्योगय़ुक्तस्य तस्य; नागं मुखान्निःसरन्तं महान्तम् |
१२ क
स्त्री पर्व
अध्याय ५
विदुर उवाच
अथापश्यद्वनं घोरं समन्ताद्वागुरावृतम् |
८ क
आदि पर्व
अध्याय ६६
शकुन्तलो उवाच
अथापश्यद्वरारोहा तपसा दग्धकिल्विषम् |
२ क
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
अथापश्यन्कुरवकान्वनराजिषु पुष्पितान् |
५८ ख
वन पर्व
अध्याय १०५
लोमश उवाच
अथापश्यन्त ते वीराः पृथिवीमवदारिताम् |
१९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९६
भीष्म उवाच
अथापश्यन्पुष्करं ते ह्रिय़न्तं; ह्रदादगस्त्येन समुद्धृतं वै ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
अथापश्यन्महात्मानं देवर्षिं तत्र नारदम् |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
अथापश्यन्महावाहुरृषीनध्वनि केशवः |
६० क
वन पर्व
अध्याय १४६
वैशम्पाय़न उवाच
अथापश्यन्महावाहुर्गन्धमादनसानुषु |
४२ क
मौसल पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
अथापश्यन्राममनन्तवीर्यं; वृक्षे स्थितं चिन्तय़ानं विविक्ते ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
भीष्म उवाच
अथापश्यन्सुपीनांसपाणिपादमुखोदरम् |
२ क
वन पर्व
अध्याय २६६
मार्कण्डेय़ उवाच
अथापि घटतेऽस्माकमर्थे वानरपुङ्गवः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३
सहदेव उवाच
अथापि च सहोत्पत्तिः सत्त्वस्य प्रलय़स्तथा |
७ क
स्त्री पर्व
अध्याय ७
विदुर उवाच
अथापि तैर्विमुच्येत व्याधिभिः पुरुषो नृप |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२
व्यास उवाच
अथापि लोके कर्माणि समावर्तन्त भारत |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
अथापीमासु सञ्ज्ञासु लौकिकीषु प्रतिष्ठसि |
१६६ क
आदि पर्व
अध्याय १
महाभारत कथा
अथापृच्छदृषिस्तत्र कश्चित्प्रस्तावय়न्कथाः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय २०६
व्याध उवाच
अथाप्युपाय़ं पश्येत दुःखस्य परिमोक्षणे |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१७
नारद उवाच
अथाप्युपाय़ं सम्पश्येद्दुःखस्य परिमोक्षणे |
२५ क
वन पर्व
अध्याय २५४
द्रौपद्यु उवाच
अथाप्येनं पश्यसि यं रथस्थं; महाभुजं शालमिव प्रवृद्धम् |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
अथाप्लुत्य पदान्यष्टौ संनिपत्य गजाविव |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
अथाप्लुत्य रथात्तूर्णं यूपकेतुरमित्रहा |
५३ क
आदि पर्व
अध्याय ८
सूत उवाच
अथाप्सरा मेनका सा तं गर्भं भृगुनन्दन |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
अथापय़ाति सङ्ग्रामाद्विजय़ात्तद्विशिष्यते ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
अथापय़ानं कुरवः सभीष्माः; सद्रोणदुर्योधनवाह्लिकाश्च |
१२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
अथाभवत्ते विमुखः पुत्रः शरशतार्दितः ||
३० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९४
भीष्म उवाच
अथाभवदनावृष्टिर्महती कुरुनन्दन |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६२
सञ्जय़ उवाच
अथाभवद्युद्धमतीव दारुणं; पुनः कुरूणां सह पाण्डुसृञ्जय़ैः |
४० क
वन पर्व
अध्याय १०२
लोमश उवाच
अथाभिजग्मुर्मुनिमाश्रमस्थं; तपस्विनं धर्मभृतां वरिष्ठम् |
७ क
वन पर्व
अध्याय २२१
मार्कण्डेय़ उवाच
अथाभिद्रुत्य महिषो देवांश्चिक्षेप तं गिरिम् |
५४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
अथाभिनत्सुतसोमं शरेण; स संशितेनाधिरथिर्महात्मा ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२
व्यास उवाच
अथाभिपत्तिर्लोकस्य कर्तव्या शुभपापय़ोः |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५३
सञ्जय़ उवाच
अथाभिपत्य वेगेन समुद्भ्राम्य च राक्षसम् |
३१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
अथाभिमन्युं समरे भीमसेनेन सङ्गतम् |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५
सञ्जय़ उवाच
अथाभिषिषिचुर्द्रोणं दुर्योधनमुखा नृपाः |
३७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५७
कर्ण उवाच
अथाभिसृत्य प्रतिवार्य तानरी; न्धनञ्जय़स्याभि रथं महारथाः |
६६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
अथाभ्यगच्छद्गोविन्दो वृष्णिभिः सह धर्मजम् |
४ क
आदि पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
अथाभ्यगच्छद्भरतान्वसिष्ठो भगवानृषिः ||
३६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
अथाभ्यगच्छन्देवास्ते पितामहमरिन्दम |
६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
अथाभ्यधावंस्त्वरिताः शतं रथाः; शतं च नागार्जुनमातताय़िनः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
अथाभ्यषिञ्चत्साम्राज्ये सर्वक्षत्रस्य पौरवम् |
३९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
अथाभ्याशगतानां स खड्गेनामित्रकर्शनः |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
अथाभ्येत्य ततो व्रह्मा दृष्ट्वा च स महेश्वरम् |
६२ क
शल्य पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
अथाभ्येत्य पदान्यष्टौ संनिपातोऽभवत्तय़ोः |
२० क
वन पर्व
अध्याय १५८
वैशम्पाय़न उवाच
अथाभ्रघनसङ्काशं गिरिकूटमिवोच्छ्रितम् |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९७
भीष्म उवाच
अथाभ्रेषु निगूढश्च रश्मिभिः परिवारितः |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय १७
सूत उवाच
अथाम्वराद्भय़जननाः प्रपेदिरे; सपादपा वहुविधमेघरूपिणः |
२५ क