chevron_left  युधिष्ठिरंarrow_drop_down
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं पाण्डवेय़ं हतेति भरतर्षभ |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं पुनः षष्ट्या विव्याध निशितैः शरैः |
३१ ख
विराट पर्व
अध्याय ६५
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं पुरस्कृत्य सर्वाभरणभूषिताः |
२ क
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं पुरस्कृत्य ह्रीनिषेधमरिन्दमम् ||
५४ ख
सभा पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं पूजय़ित्वा भीमसेनं यमौ तथा ||
१८ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं प्रीतिय़ुक्तो नरेन्द्रं; श्लक्ष्णैर्वाक्यैः संस्तवसम्प्रय़ुक्तैः ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८१
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं भीमसेनं यमौ च; पार्थं तथा युधि सञ्जातकोपः |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७८
नकुल उवाच
युधिष्ठिरं भीमसेनं वीभत्सुं चापराजितम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं भोजय़ित्वा शेषमश्नाति पार्षती ||
७ ग
वन पर्व
अध्याय ९०
लोमश उवाच
युधिष्ठिरं भ्रातरं मे योजय़ेर्धर्म्यया श्रिय़ा ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं मद्रपतिर्विद्ध्वा सिंह इवानदत् ||
१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं महातेजाः पुनरेव विशां पते ||
९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं महातेजाः सर्ववुद्धिमतां वरः ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं महात्मानं परीप्सन्तो महाजवाः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं महाप्राज्ञं धर्मज्ञो वेदपारगः ||
४ ख
सभा पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं महाप्राज्ञं यिय़क्षुमिदमव्रुवन् ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८१
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं महाराज जिगीषुं समवस्थितम् |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं महाराज महत्या सेनय़ा वृतम् |
४७ क
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं महाराज महद्भय़मथाविशत् ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं महाराज विसृजन्तं शरान्वहून् |
३६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं मैवमित्येवमुक्त्वा; निगृह्याथोदीधरत्सीदमानः ||
७ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं याज्ञसेनी धर्मराजं यशस्विनी ||
१६ ख
सभा पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं राजपुत्रं हि गत्वा; मद्वाक्येन क्षिप्रमिहानय़स्व ||
२० ख
शल्य पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं शतेनाजौ विव्याध भरतर्षभ |
९ क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
युधिष्ठिरं शून्यमधर्षय़न्तं; तदा नाशंसे विजय़ाय़ सञ्जय़ ||
१४७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं स विद्ध्वा तु शरैः संनतपर्वभिः |
३१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं समभ्येत्य वाग्मी वचनमव्रवीत् ||
११ ख
शल्य पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं समाजघ्ने सर्वसैन्यस्य पश्यतः ||
५० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं समासाद्य सर्वतः पर्यवारय़त् ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय ११८
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं सम्परिवार्य राज; न्नुपाविशन्देवगणा यथेन्द्रम् ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं ससोदर्यं सहितं केशवेन ह ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५०
जनमेजय़ उवाच
युधिष्ठिरं सहानीकमुपय़ान्तं युय़ुत्सय़ा |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५२
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं सहामात्यमनुजज्ञे नदीसुतः ||
४ ख
सभा पर्व
अध्याय ४४
शकुनिरु उवाच
युधिष्ठिरं स्वय़ं राजंस्तन्निवोध जुषस्व च ||
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं हतामित्रं कृताञ्जलिरथाच्युतः ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६३
धृतराष्ट्र उवाच
युधिष्ठिरं हि कौन्तेय़ं परं धर्ममिहास्थितम् |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरः काञ्चनभाण्डय़ोक्त्रं; समास्थितो नागकुलस्य मध्ये ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरः परां प्रीतिमगच्छद्भ्रातृभिः सह ||
१०४ ख
वन पर्व
अध्याय १२०
सात्यकिरु उवाच
युधिष्ठिरः पारय़ते महात्मा; द्यूते यथोक्तं कुरुसत्तमेन ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरः पुनः कर्णमविध्यत्त्रिंशता शरैः |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५४
दुर्योधन उवाच
युधिष्ठिरः पुरं हित्वा पञ्च ग्रामान्स याचति |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरः प्रीतमना वभूव जनमेजय़ ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरः शतेनैव राक्षसं प्रत्यविध्यत |
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय १३१
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरः शनैर्दीनमुवाचेदं वचस्तदा ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरः शान्तनवं पुनरेवाभ्यभाषत ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय २३५
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरः सप्रणय़मिदं वचनमव्रवीत् ||
२० ख
विराट पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरः सभास्तारः सभ्यानामभवत्प्रिय़ः |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरः ससोदर्यः शरणार्थं प्रय़ाचकः ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७२
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरः सहानीकः कृतवर्माणमाहवे ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरः स्वय़ं राजा मद्रराजानमभ्ययात् |
२६ क