कर्ण पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
अथैनं छिन्नधन्वानं नाराचानां त्रिभिः शतैः |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
अथैनं छिन्नधन्वानं नाराचेन स्तनान्तरे |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
अथैनं छिन्नधन्वानं पुनर्विव्याध पञ्चभिः ||
८ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
अथैनं छिन्नधन्वानं भग्नशृङ्गमिवर्षभम् |
६७ क
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
अथैनं छिन्नधन्वानं रुक्मपुङ्खैः शिलाशितैः |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
अथैनं छिन्नधन्वानं विंशत्या समवाकिरत् ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
अथैनं छिन्नधन्वानं विव्याध नवभिः शरैः ||
२९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
अथैनं छिन्नधन्वानं विव्याध निशितैः शरैः ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
अथैनं छिन्नधन्वानं शरेण नतपर्वणा |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
अथैनं छिन्नधन्वानं शरैः संनतपर्वभिः |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
अथैनं छिन्नधन्वानं शरैर्वहुभिराचिनोत् ||
१४ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
अथैनं छिन्नधन्वानं साय़कानां शतैस्त्रिभिः |
६१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
अथैनं छिन्नधन्वानं हताश्वं हतसारथिम् |
५० क
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
अथैनं तत्र संलीनमस्पृशद्धनुषा पुनः |
७७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४३
सञ्जय़ उवाच
अथैनं दशभिर्भल्लैश्छिन्नधन्वानमार्दय़त् ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
अथैनं दशभिर्वाणैः प्रत्यविध्यत्स्तनान्तरे ||
११ ख
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
अथैनं दशभिर्वाणैः प्रत्यविध्यत्स्तनान्तरे |
४२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
अथैनं दशभिर्वाणैस्तोत्त्रैरिव महागजम् |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
अथैनं दशभिर्विद्ध्वा ध्वजमेकेन चिच्छिदे |
४७ क
आदि पर्व
अध्याय
११८
वैशम्पाय़न उवाच
अथैनं देशजैः शुक्लैर्वासोभिः समय़ोजय़न् |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
अथैनं धनुषोऽग्रेण तुदन्भूय़ोऽव्रवीद्वचः |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
अथैनं नवभिर्वाणैराजघान स्तनान्तरे ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
अथैनं निशितैर्वाणैः सात्यकिः प्रत्यविध्यत |
४४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
अथैनं निशितैर्वाणैश्चतुर्भिर्भरतर्षभ |
४१ क
विराट पर्व
अध्याय
५६
वैशम्पाय़न उवाच
अथैनं पञ्चभिः पश्चात्प्रत्यविध्यत्स्तनान्तरे |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
अथैनं पञ्चभिर्वाणैराजघान स्तनान्तरे |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
अथैनं पञ्चविंशत्या क्षिप्रमेव समर्पय़त् |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
अथैनं पञ्चविंशत्या क्षुद्रकाणां समर्दय़त् |
५० क
भीष्म पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
अथैनं पञ्चविंशत्या क्षुद्रकाणां समाचिनोत् ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
अथैनं पञ्चविंशत्या क्षुद्रकाणां समार्दय़त् ||
२१ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
अथैनं पञ्चविंशत्या क्षुद्रकाणां समार्पय़त् |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
अथैनं पञ्चविंशत्या पुनश्चैव समर्पय़त् ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
अथैनं पञ्चविंशत्या साय़कानां समार्पय़त् ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
अथैनं पञ्चविंशत्या साय़कानां समार्पय़त् |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
अथैनं परिपप्रच्छुः को भवान्कस्य वेत्युत ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५९
भीष्म उवाच
अथैनं परिरक्षेत पिता पुत्रमिवौरसम् ||
१३ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
अथैनं पुनराजघ्ने नवत्या निशितैः शरैः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
पूजन्यु उवाच
अथैनं प्रतिपिंषन्ति पूर्णं घटमिवाश्मनि ||
६९ ख
वन पर्व
अध्याय
१२४
लोमश उवाच
अथैनं भार्गवो राजन्नुवाच परिसान्त्वय़न् |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
अथैनं मृत्युपाशेन कण्ठे वध्नाति मृत्युराट् ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
अथैनं रथवंशेन सर्वतः संनिवार्य ते |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
अथैनं रथवृन्देन कोष्टकीकृत्य भारत |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
अथैनं रुक्मपुङ्खानां शतेन नतपर्वणाम् |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७०
भीष्म उवाच
अथैनं रूपमानश्च धनमानश्च विन्दति |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
अथैनं वाग्भिरुग्राभिस्त्रासय़ां चक्रिरे तदा ||
१०२ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
अथैनं विमुखीकृत्य पश्चात्प्रहरणं कुरु ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३७
वैशम्पाय़न उवाच
अथैनं वुद्धिसंय़ुक्तं पुनः स ददृशे हरिः |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
अथैनं शरवर्षेण छादय़ामास भारत |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
अथैनं शरवर्षेण समन्तात्पर्यवारय़न् |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
अथैनं सप्तसप्तत्या नाराचानां समार्पय़त् ||
३८ ख