वन पर्व
अध्याय
११५
भृगुरु उवाच
अथोवाच महातेजा भृगुः सत्यवतीं स्नुषाम् |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
अथोवाच स राजर्षिः स्त्रीभूतो वदतां वरः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५४
वैशम्पाय़न उवाच
अथोवाच हृषीकेशं पाण्डुपुत्रो युधिष्ठिरः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२
भीष्म उवाच
अथौघवान्नाम नृपो नृगस्यासीत्पितामहः |
३७ क
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
अदंशमशके देशे वहुमूलफलोदके |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५४
भीष्म उवाच
अदंशमशके देशे सुखं संवर्धितान्पशून् |
४२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
अदक्षिणमय़ज्वानं तं वै संशाम्य मा शुचः ||
३९ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
अदक्षिणमय़ज्वानं श्वैत्य संशाम्य मा शुचः ||
२७ ग
सौप्तिक पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
अदक्षो निन्द्यते वैश्यः शूद्रश्च प्रतिकूलवान् ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
अदण्ड्यत्वं च विप्राणां युक्त्या दण्डनिपातनम् |
६९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
अदण्ड्या मे द्विजाश्चेति प्रतिजानीष्व चाभिभो |
११४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५६
भीष्म उवाच
अदण्ड्याश्चैव ते नित्यं विप्राः स्युर्ददतां वर |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३०
भीष्म उवाच
अदत्तमप्याददीत दातुर्वित्तं ममेति वा ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३७
व्यास उवाच
अदत्तस्यानुपादानं दानमध्ययनं तपः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२४
व्यास उवाच
अदत्तादानमेवेदं कृतं पार्थिवसत्तम |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२८
महेश्वर उवाच
अदत्तादानविरमो मधुमांसस्य वर्जनम् ||
२६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८३
वैशम्पाय़न उवाच
अदत्तानुनय़ो युद्धे यदि त्वं पितृभिर्मम |
७ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
अदत्त्वा काञ्चनं गाश्च दरिद्रो नाम जाय़ते ||
३९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७१
शक्र उवाच
अदत्त्वा गोप्रदाः सन्ति केन वा तच्च शंस मे ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
अदत्त्वा भक्षय़न्त्यग्रे ते वै निरय़गामिनः ||
८० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११३
वृहस्पतिरु उवाच
अदत्त्वापि प्रदानानि विविधानि समाहितः |
५ क
सभा पर्व
अध्याय
४८
दुर्योधन उवाच
अददद्गजरत्नानां शतानि सुवहून्यपि ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२१
भीष्म उवाच
अददद्दण्ड एवास्मै ध्रुवमैश्वर्यमेव च |
४१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३९
वाय़ुरु उवाच
अददाच्छरणं गत्वा भार्यामाङ्गिरसाय़ वै ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
अददात्कुन्तिभोजाय़ सखा सख्ये महात्मने ||
६२ ख
आदि पर्व
अध्याय
८८
यय़ातिरु उवाच
अददाद्देवय़ानाय़ यावद्वित्तमविन्दत |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
अददाद्रोहितान्मत्स्यान्व्राह्मणेभ्यो महीपतिः ||
८४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
अददान्मुदितो राजन्पूजय़ित्वा द्विजोत्तमान् ||
३१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२५
व्राह्मण उवाच
अदन्ह्यविद्वानन्नानि ममत्वेनोपपद्यते |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२२
मैत्रेय़ उवाच
अदन्ह्यविद्वान्हन्त्यन्नमद्यमानं च हन्ति तम् |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५२
सञ्जय़ उवाच
अदर्शनं गमिष्यामि न मां द्रक्ष्यन्ति पाण्डवाः ||
१२ ख
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
अदर्शनं ज्ञानवतामालस्यं क्षिप्तचित्तताम् ||
९६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१६
नारद उवाच
अदर्शनमसंस्पर्शस्तथासम्भाषणं सदा |
१७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४२
सूत उवाच
अदर्शनादापतितः पुनश्चादर्शनं गतः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६८
व्राह्मण उवाच
अदर्शनादापतितः पुनश्चादर्शनं गतः |
१७ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२
विदुर उवाच
अदर्शनादापतिताः पुनश्चादर्शनं गताः |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३७
सञ्जय़ उवाच
अदर्शय़त तत्कार्ष्णिः कृष्णाभ्यामविशेषय़न् ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
अदर्शय़त तेजस्वी दिक्षु सर्वासु भारत ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
अदर्शय़दधीकारं पौरुषं च महावलः |
५३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
अदर्शय़दमेय़ात्मा दिक्षु सर्वासु पाण्डवः ||
९८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
अदर्शय़द्वासुदेवो हय़याने परं वलम् |
५८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
अदर्शय़द्वासुदेवो हय़याने परं वलम् |
४८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८३
मुनिरु उवाच
अदर्शय़न्निमं दोषमेकैकं दुर्वलं कुरु |
५८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
अदर्शय़न्निव तदा कुरून्वै दक्षिणोत्तरान् ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
अदर्शय़ेतां वहुधा सूतसामर्थ्यलाघवात् ||
५३ ख
आदि पर्व
अध्याय
३९
सूत उवाच
अदशद्वृक्षमभ्येत्य न्यग्रोधं पन्नगोत्तमः ||
४ ख
सभा पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
अदहद्द्वारकामेष स्वस्रीय़ः सन्नराधिपाः ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०४
सञ्जय़ उवाच
अदहन्निशितैर्वाणैः कृष्णवर्त्मेव काननम् ||
३८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०६
भगीरथ उवाच
अदां च तत्राश्वतरीसहस्रं; नारीपुरं न च तेनाहमागाम् ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२३
भीष्म उवाच
अदाता यत्र यत्रैति सर्वतः सम्प्रणुद्यते ||
१२ ख