शान्ति पर्व
अध्याय
९३
भीष्म उवाच
अदाता ह्यनतिस्नेहो दण्डेनावर्तय़न्प्रजाः |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८५
वृहस्पतिरु उवाच
अदाता ह्यपि भूतानां मधुरामीरय़न्गिरम् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
अदातारोऽशरण्याश्च राजकिल्विषभागिनः |
३० क
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
अदातुकामा वचनमिदं वदति दारुणम् ||
८७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५९
भीष्म उवाच
अदातृभ्यो हरेन्नित्यं व्याख्याप्य नृपतिः प्रभो |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५४
भीष्म उवाच
अदान्तः पुरुषः क्लेशमभीक्ष्णं प्रतिपद्यते |
१३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
अदान्तो व्राह्मणोऽसाधुर्निस्तेजाः क्षत्रिय़ोऽधमः |
२० क
आदि पर्व
अध्याय
८८
यय़ातिरु उवाच
अदामहं पृथिवीं व्राह्मणेभ्यः; पूर्णामिमामखिलां वाहनस्य |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४
द्रुपद उवाच
अदारिश्च नदीजश्च कर्णवेष्टश्च पार्थिवः |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
अदारय़द्रणे कर्णं वज्रवेग इवाचलम् ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६७
भीष्म उवाच
अदासः क्रिय़ते दासो ह्रिय़न्ते च वलात्स्त्रिय़ः |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
अदासाः पाण्डवाः सन्तु सरथाः साय़ुधा इति |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय
३०
सूत उवाच
अदासी चैव मातेय़मद्यप्रभृति चास्तु मे |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
२५६
भीमसेन उवाच
अदासो गच्छ मुक्तोऽसि मैवं कार्षीः पुनः क्वचित् |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
२२०
जनमेजय़ उवाच
अदाहे ह्यश्वसेनस्य दानवस्य मय़स्य च |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
अदाहय़च्च विस्रव्धान्पावकेन पुनस्तदा ||
१७ ख
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
अदाहय़च्चन्दनैश्च गन्धैरुच्चावचैरपि ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय
२१९
मार्कण्डेय़ उवाच
अदितिं रेवतीं प्राहुर्ग्रहस्तस्यास्तु रैवतः |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३४
महेश्वर उवाच
अदितिः कश्यपस्याथ सर्वास्ताः पतिदेवताः |
५ क
आदि पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
अदितिर्दितिर्दनुः काला अनाय़ुः सिंहिका मुनिः |
१२ क
सभा पर्व
अध्याय
११
नारद उवाच
अदितिर्दितिर्दनुश्चैव सुरसा विनता इरा |
२९ क
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
अदितिर्देवमाता च ह्रीः श्रीः स्वाहा सरस्वती |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
१३५
लोमश उवाच
अदितिर्यत्र पुत्रार्थं तदन्नमपचत्पुरा ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
१३
अर्जुन उवाच
अदितेरपि पुत्रत्वमेत्य यादवनन्दन |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
अदितेर्विवस्वान् |
७ ख
वन पर्व
अध्याय
२९१
सूर्य उवाच
अदित्या कुण्डले राज्ञि दत्ते मे मत्तकाशिनि |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
अदित्या विष्णुना प्रीतिर्यथाभूदभिवर्धिता |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
अदित्यां द्वादशः पुत्रः सम्भविष्यामि कश्यपात् ||
७५ ख
आदि पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
अदित्यां द्वादशादित्याः सम्भूता भुवनेश्वराः |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०३
गरुड उवाच
अदित्यां य इमे जाता वलविक्रमशालिनः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
अदित्याः सप्तरात्रं तु पुराणे गर्भतां गतः |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८२
भीष्म उवाच
अदित्यास्तप्यमानाय़ास्तपो घोरं सुदुश्चरम् |
२५ क
सभा पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
अदीक्षितानामजिनानि यद्व; द्वलीय़सां पश्यत पाण्डवानाम् ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२३
वासुदेव उवाच
अदीनोऽक्रोधनोऽलुव्धस्तस्मात्सर्वत्र पूजितः ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
अदीप्यतार्जुनो येन हिमवानिव वह्निना ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७२
भीमसेन उवाच
अदीर्घदर्शी निष्ठूरी क्षेप्ता क्रूरपराक्रमः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२३
वासुदेव उवाच
अदीर्घसंशय़ो वाग्मी तस्मात्सर्वत्र पूजितः ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
अदुःखमजरं शान्तं स्थानं तत्प्रतिपद्यते ||
१२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४२
व्यास उवाच
अदुःखमसुखं व्रह्म भूतभव्यभवात्मकम् ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२९
महेश्वर उवाच
अदुःखमसुखं सौम्यमजरामरमव्ययम् ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय
१४४
नकुल उवाच
अदुःखार्हा परं दुःखं प्राप्तेय़ं मृदुगामिनी |
७ क
वन पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
अदुःखार्हान्मनुष्येन्द्र नोपशाम्यति मे मनः ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७
अगस्त्य उवाच
अदुष्टं दूषय़सि वै यच्च मूर्ध्न्यस्पृशः पदा ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८८
हंस उवाच
अदुष्टं वर्तमाने तु हृदय़ान्तरपूरुषे |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८८
हंस उवाच
अदुष्टचेता मुदितोऽनसूय़ुः; स आदत्ते सुकृतं वै परेषाम् ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५९
भीष्म उवाच
अदुष्टा हि स्त्रिय़ो रत्नमाप इत्येव धर्मतः ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६०
युधिष्ठिर उवाच
अदूरसम्प्रस्थितय़ोः किं स्विच्छ्रेय़ः पितामह ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४०
भीष्म उवाच
अदूरात्तु ततस्तेषां व्रह्मदत्तवरं सरः |
१८ क
विराट पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
अदूरात्पर्यवस्थाय़ पूरय़ामासुरादृताः ||
६ ख
विराट पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
अदूरादनवद्याङ्गीं स्तम्भमालिङ्ग्य तिष्ठतीम् ||
४ ख