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कर्ण पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
अद्य कर्णे हते युद्धे सोमकानां महारथाः |
२५ क
शल्य पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
अद्य कीर्तिमय़ीं मालां प्रतिमोक्ष्याम्यहं त्वय़ि |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
अद्य कीर्तिमय़ीं मालां प्रतिमोक्ष्ये तवानघ |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५१
सञ्जय़ उवाच
अद्य कुन्तीसुतान्सर्वान्वासुदेवपुरोगमान् |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
अद्य कुन्त्याः परिक्लेशं वनवासं च कृत्स्नशः |
४ क
वन पर्व
अध्याय १७१
युधिष्ठिर उवाच
अद्य कृत्स्नामिमां देवीं विजितां पुरमालिनीम् |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
अद्य कृष्ण विकर्णा मे कर्णं नेष्यन्ति मृत्यवे |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
अद्य कृष्णश्च पार्थश्च धर्मराजश्च माधव |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
अद्य कृष्णस्य माहात्म्यं जानातु स महीपतिः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय २६१
मार्कण्डेय़ उवाच
अद्य कैकेय़ि दौर्भाग्यं राज्ञा ते ख्यापितं महत् |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९५
सात्यकिरु उवाच
अद्य कौरवसैन्यस्य दीर्यमाणस्य संय़ुगे |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
अद्य कौरव्य भीमस्य भवितास्म्यनृणो युधि |
८ क
शल्य पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
अद्य क्रोधं विमोक्ष्यामि निगूढं हृदय़े चिरम् |
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
अद्य क्रोधं विमोक्ष्यामि निहितं हृदय़े भृशम् |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
अद्य क्षत्तुर्वचः सत्यं स्मरतां व्रुवतो हितम् ||
१६ ग
कर्ण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
अद्य क्षेप्स्याम्यहं शल्य शरान्परमतेजनान् |
२६ क
वन पर्व
अध्याय २३२
अर्जुन उवाच
अद्य गन्धर्वराजस्य भूमिः पास्यति शोणितम् ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३
सञ्जय़ उवाच
अद्य गाण्डीवघोषस्य वीर्यज्ञाः सव्यसाचिनः |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
अद्य गाण्डीवधन्वानं तपन्तं युद्धदुर्मदम् |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३
सञ्जय़ उवाच
अद्य गाण्डीवमुक्तानामशनीनामिव स्वनः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय १४१
वैशम्पाय़न उवाच
अद्य गात्राणि क्रव्यादाः श्येना गोमाय़वश्च ते |
९ क
वन पर्व
अध्याय ७१
दमय़न्त्यु उवाच
अद्य चन्द्राभवक्त्रं तं न पश्यामि नलं यदि |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०५
सञ्जय़ उवाच
अद्य चापि महत्कर्म प्रकरिष्ये महाहवे |
२६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
अद्य चाप्यवगच्छामि गतिमिष्टामिहात्मनः |
२४ क
वन पर्व
अध्याय २३९
वैशम्पाय़न उवाच
अद्य चाप्यवगच्छामि न वृद्धाः सेवितास्त्वय़ा |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय २३
धृतराष्ट्र उवाच
अद्य चाप्यस्य राष्ट्रस्य हतोत्साहस्य सञ्जय़ |
१५ क
वन पर्व
अध्याय ७१
दमय़न्त्यु उवाच
अद्य चामीकरप्रख्यो विनशिष्याम्यसंशय़म् ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०२
भृगुरु उवाच
अद्य चासौ कुदेवेन्द्रस्त्वां पदा धर्षय़िष्यति |
२५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
अद्य चाहं दशामेतां गतः सञ्जय़ गर्हिताम् |
३६ ख
वन पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
अद्य चेय़ं मही कृत्स्ना दुर्योधनवशानुगा |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
अद्य चैव निशां व्युष्टामुदय़े भानुराहतः |
३३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
अद्य जातो ह्यहं देव अद्य मे सफलं तपः |
१७९ क
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
अद्य जानातु कौन्तेय़ं समर्थं सर्वधन्विनाम् |
१६ क
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
अद्य ज्ञास्यति भीमस्य वलं घोरं महात्मनः ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
अद्य ज्ञास्यति सङ्ग्रामे माद्रीपुत्रौ महावलौ |
२२ क
वन पर्व
अध्याय १५
कृष्ण उवाच
अद्य तं पापकर्माणं क्षुद्रं विश्वासघातिनम् |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५९
वासुदेव उवाच
अद्य तं पापकर्माणं क्षुद्रं सौभद्रघातिनम् |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५०
अर्जुन उवाच
अद्य तं पापकर्माणं सानुवन्धं रणे शरैः |
३१ क
विराट पर्व
अध्याय २१
भीमसेन उवाच
अद्य तं सूदय़िष्यामि कीचकं सहवान्धवम् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
अद्य तत्पुण्यकमुपाध्याय़िन्याः |
१६० ग
वन पर्व
अध्याय २८०
मार्कण्डेय़ उवाच
अद्य तद्दिवसं चेति हुत्वा दीप्तं हुताशनम् |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
अद्य तद्विपरीतं ते वदतोऽस्मासु दृश्यते |
८६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
अद्य तप्स्यति राधेय़ः पाञ्चालीं यत्तदाव्रवीत् |
१५ क
शल्य पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
अद्य ता अपि वेत्स्यन्ति सर्वा नागपुरस्त्रिय़ः |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
अद्य ता मधुरा वाचः श्रोतासि मधुसूदन |
८२ क
आदि पर्व
अध्याय १९३
दुर्योधन उवाच
अद्य तान्कुशलैर्विप्रैः सुकृतैराप्तकारिभिः |
४ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ३
सञ्जय़ उवाच
अद्य तान्सहितान्सर्वान्धृष्टद्युम्नपुरोगमान् |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०
धृतराष्ट्र उवाच
अद्य तामनुजानीमो भीष्मद्रोणवधेन च ||
४६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११९
व्यास उवाच
अद्य ते कीटतां प्राप्य स्मृतिर्जाताजुगुप्सिता ||
१८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३१
युधिष्ठिर उवाच
अद्य ते जीवितं नास्ति यद्यपि त्वं मनोजवः ||
३२ ख