वन पर्व
अध्याय
१६८
अर्जुन उवाच
अद्यास्त्रमाय़यैतेषां माय़ामेतां सुदारुणाम् |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
अद्यास्त्वनर्जुना भूमिरत्रिगर्ताथ वा पुनः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
अद्यास्य यातय़िष्यामि तद्वैरं चिरसम्भृतम् |
३४ क
शल्य पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
अद्यास्य शतधा देहं भिनद्मि गदय़ानय़ा |
१९ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
अद्याहं सर्वपाञ्चालान्निहत्य च निकृत्य च |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
अद्याहं सर्वपाञ्चालान्वासुदेवस्य पश्यतः |
३५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
अद्याहं सर्वपाञ्चालैः कृत्वा भूमिं शरीरिणीम् |
३१ क
विराट पर्व
अध्याय
३४
उत्तर उवाच
अद्याहमनुगच्छेय़ं दृढधन्वा गवां पदम् |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५२
सञ्जय़ उवाच
अद्याहमनृणः कृष्ण भविष्यामि धनुर्भृताम् |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
अद्याहमनृणस्तस्य कोपस्य भविता रणे |
७ क
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
अद्याहमनृणो भूत्वा भ्रातुः सख्युस्तथैव च |
३५ क
विराट पर्व
अध्याय
४३
कर्ण उवाच
अद्याहमृणमक्षय़्यं पुरा वाचा प्रतिश्रुतम् |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३९
विश्वामित्र उवाच
अद्याहमेतद्वृजिनं कर्म कृत्वा; जीवंश्चरिष्यामि महापवित्रम् |
८२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
अद्याहवे यस्य न तुल्यमन्यं; मध्येमनुष्यं धनुराददानम् |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
अद्याहवे यस्य न तुल्यमन्यं; मन्ये मनुष्यं धनुराददानम् |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
अद्याह्ना हि महाराजो हतामित्रो भविष्यति ||
१८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
अद्याय़ं कुरुराजस्य शन्तनोः कुलपांसनः |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११३
नारद उवाच
अद्याय़ं तारितो देशो मम तार्क्ष्य त्वय़ानघ ||
५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
अद्याय़ुर्धार्तराष्ट्रस्य दुर्मतेरकृतात्मनः |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
अद्युः पशून्मनुष्यांश्च यज्ञार्थानि हवींषि च ||
३६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
अद्येति द्वे दिने वीरो भारद्वाजः प्रतापवान् |
४० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०२
भृगुरु उवाच
अद्येन्द्रं स्थापय़िष्यामि पश्यतस्ते शतक्रतुम् |
२४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
अद्येह स्वर्णमभ्येतु यच्चान्यद्वसु दुर्लभम् |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
अद्यैतान्पातय़िष्यामि क्रुद्धो रुद्रः पशूनिव ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७७
सञ्जय़ उवाच
अद्यैतान्पातय़िष्यामि पश्यतस्ते जनार्दन |
३५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९७
जमदग्निरु उवाच
अद्यैनं दीप्तकिरणं रेणुके तव दुःखदम् |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७०
सञ्जय़ उवाच
अद्यैनं प्रतिय़ोत्स्यामि पश्यत्सु कुरुपाण्डुषु ||
५१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
अद्यैनं प्रेषय़िष्यामि वलहन्तुः प्रिय़ातिथिम् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
अद्यैनं भक्षय़िष्यामि पश्यतस्ते युधिष्ठिर ||
३६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
अद्यैनं सरथं साश्वं सशक्तिकवचाय़ुधम् |
८० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०२
भृगुरु उवाच
अद्यैनमहमुद्वृत्तं करिष्येऽनिन्द्रमोजसा ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६९
पुत्र उवाच
अद्यैव कुरु यच्छ्रेय़ो मा त्वा कालोऽत्यगादय़म् |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
९९
व्यास उवाच
अद्यैव गर्भं कौसल्या विशिष्टं प्रतिपद्यताम् ||
४३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५४
भीम उवाच
अद्यैव तद्विदितं पार्थिवानां; भविष्यति आकुमारं च सूत |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
अद्यैव तु रणे पार्थः कुरुवृद्धमुपाद्रवत् ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
११३
पाण्डुरु उवाच
अद्यैव त्वं वरारोहे प्रय़तस्व यथाविधि |
३९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
अद्यैव दास्याम्यपरं द्वितीय़ं; दुर्योधनं यज्ञपशुं विशस्य |
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
अद्यैव नक्षत्रमहश्च पुण्यं; यतामहे श्रेष्ठतमं क्रिय़ासु |
१५ क
विराट पर्व
अध्याय
४३
कर्ण उवाच
अद्यैव पततां भूमौ विनदन्भैरवान्रवान् ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
अद्यैव पश्य दुर्धर्षं पात्यमानं महाव्रतम् |
६९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
अद्यैव हि रिपुर्भूत्वा पुनरद्यैव सौहृदम् |
१५४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
अद्यैव ह्यहमेतांश्च ये चैताननु भारत |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय
११०
वैशम्पाय़न उवाच
अद्यैवावां प्रहास्यावो जीतिवं नात्र संशय़ः ||
२८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६
शल्य उवाच
अद्यैवाहं रणे सर्वान्पाञ्चालान्सह पाण्डवैः |
११ क
सभा पर्व
अध्याय
६४
भीम उवाच
अद्यैवैतान्निहन्मीह प्रशाधि वसुधामिमाम् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९५
सात्यकिरु उवाच
अद्यैषां कदनं कृत्वा क्षिप्रं यास्यामि पाण्डवम् ||
२० ग
द्रोण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
अद्यैषां प्रवरं वीरं पातय़िष्ये महारथम् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७७
भरद्वाज उवाच
अद्रवत्वादनग्नित्वादभौमत्वादवाय़ुतः |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
अद्राक्षं दीप्यमानान्वै ग्रहानष्टाविवोदितान् ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४२
हिडिम्वो उवाच
अद्राक्षं हेमवर्णाभं तव पुत्रं महौजसम् ||
७ ख