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सभा पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
सा तेन च समुद्धूता दुःखेन च तपस्विनी |
३ क
आदि पर्व
अध्याय ११२
वैशम्पाय़न उवाच
सा तेन सुषुवे देवी शवेन मनुजाधिप |
३३ क
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
सा तेऽहं दुःखमाख्यास्ये प्रणय़ान्मधुसूदन |
५२ क
वन पर्व
अध्याय ६२
वृहदश्व उवाच
सा तैः परिवृतागच्छत्समीपं राजवेश्मनः |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १११
नारद उवाच
सा तौ तदाव्रवीत्तुष्टा पतगेन्द्रद्विजर्षभौ |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
सा त्वं जातिं श्रुतं वृत्तं भावं प्रकृतिमात्मनः |
७५ क
वन पर्व
अध्याय २८७
वैशम्पाय़न उवाच
सा त्वं दर्पं परित्यज्य दम्भं मानं च भामिनि |
२८ क
स्त्री पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
सा त्वं धर्मं परिस्मृत्य वाचा चोक्त्वा मनस्विनि |
११ क
आदि पर्व
अध्याय १६१
गन्धर्व उवाच
सा त्वं पीनाय़तश्रोणि पर्याप्नुहि शुभानने ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
सा त्वं मदर्थे पुत्रानुत्पादय़ेति कुन्तीमुवाच ||
६८ क
आदि पर्व
अध्याय ६७
दुःषन्त उवाच
सा त्वं मम सकामस्य सकामा वरवर्णिनि |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय ११५
वैशम्पाय़न उवाच
सा त्वं माद्रीं प्लवेनेव तारय़ेमामनिन्दिते |
१४ क
वन पर्व
अध्याय २९०
सूर्य उवाच
सा त्वं मय़ा समागच्छ पुत्रं लप्स्यसि मादृशम् |
२६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
सा त्वं मय़ि मृते मातस्तथा गाण्डीवधन्वनि |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९१
भीष्म उवाच
सा त्वं सर्वविमोक्षाय़ तत्त्वमाख्याहि पृच्छतः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय २९०
सूर्य उवाच
सा त्वमात्मप्रदानं वै कुरुष्व गजगामिनि |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
सा त्वमेतान्यकार्याणि कार्यापेक्षा व्यवस्यसि |
६३ क
वन पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
सा त्वा पङ्कमलादिग्धं दृष्ट्वा मुह्यामि भारत ||
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६७
वैशम्पाय़न उवाच
सा त्वा प्रसाद्य शिरसा याचे शत्रुनिवर्हण |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय ७७
वैशम्पाय़न उवाच
सा त्वां याचे प्रसाद्याहमृतुं देहि नराधिप ||
१३ ख
विराट पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
सा त्विय़ं साधु वक्तव्या न त्वनीतिः कथञ्चन |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय १७३
भीष्म उवाच
सा त्वेनमव्रवीद्राजन्क्रिय़तां मदनुग्रहः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
सा त्वय़ा नानुय़ोक्तव्या कासि कस्यासि वाङ्गने ||
२१ ग
वन पर्व
अध्याय १२३
लोमश उवाच
सा तय़ोर्वचनाद्राजन्नुपसङ्गम्य भार्गवम् |
१३ क
वन पर्व
अध्याय २६३
मार्कण्डेय़ उवाच
सा ददर्श गिरिप्रस्थे पञ्च वानरपुङ्गवान् |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७८
वैशम्पाय़न उवाच
सा ददर्श ततः पुत्रं विमृशन्तमधोमुखम् |
९ क
आदि पर्व
अध्याय १०४
वैशम्पाय़न उवाच
सा ददर्श तमाय़ान्तं भास्करं लोकभावनम् |
९ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
सा ददर्श नगान्नैकान्नैकाश्च सरितस्तथा |
१०४ क
वन पर्व
अध्याय २९३
वैशम्पाय़न उवाच
सा ददर्शाथ मञ्जूषामुह्यमानां यदृच्छय़ा |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
सा दधार च तं गर्भं पुत्रहेतोर्महानदी ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय ८
सूत उवाच
सा दष्टा सहसा भूमौ पतिता गतचेतना |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
सा दुर्मुखस्य विपुलं वर्म भित्त्वा यशस्विनः |
३६ क
सभा पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
सा दृश्यतां भ्रातृभिः सार्धमेत्य; सुहृद्द्यूतं वर्ततामत्र चेति ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
सा दृष्ट्वा कृष्णमाय़ान्तं प्रसन्नादित्यवर्चसम् |
२ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
सा दृष्ट्वा महदाश्चर्यं विस्मिता अभवत्तदा |
९२ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
सा दृष्ट्वैव महासार्थं नलपत्नी यशस्विनी |
१०९ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
सा दृष्ट्वैवाश्रमपदं नानामृगनिषेवितम् |
६१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४४
भीष्म उवाच
सा दैवीं मानुषीं वाचमनृतां पर्युदस्यति ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
सा द्वैपाय़नमृषिं चिन्तय़ामास ||
५७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७७
वैशम्पाय़न उवाच
सा धनञ्जय़मासाद्य मुमोचार्तस्वरं तदा |
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय ९९
वैशम्पाय़न उवाच
सा धर्मतोऽनुनीय़ैनां कथञ्चिद्धर्मचारिणीम् |
४९ क
शल्य पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
सा ध्याता मुनिना तेन व्याकुलत्वं जगाम ह |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय १८७
भीष्म उवाच
सा नदी वत्सभूम्यां तु प्रथिताम्वेति भारत |
३९ क
आदि पर्व
अध्याय ११७
वैशम्पाय़न उवाच
सा नदीर्घेण कालेन सम्प्राप्ता कुरुजाङ्गलम् |
८ क
वन पर्व
अध्याय ५३
वृहदश्व उवाच
सा नमस्कृत्य देवेभ्यः प्रहस्य नलमव्रवीत् |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
सा नाशकद्यदा गन्तुं पदात्पदमपि स्वय़म् |
१० क
कर्ण पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
सा निर्भिद्य भुजं सव्यं पाण्डवस्य महात्मनः |
५९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४४
सञ्जय़ उवाच
सा निशा भरतश्रेष्ठ प्रदीपैरवभासिता |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२९
सञ्जय़ उवाच
सा निशीथे महाराज सेनादृश्यत भारती |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७३
भीष्म उवाच
सा निष्क्रमन्ती नगराच्चिन्तय़ामास भारत |
१ क