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आदि पर्व
अध्याय २१४
वैशम्पाय़न उवाच
अधिष्ठानवती लक्ष्मीः पराय़णवती मतिः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९५
वसिष्ठ उवाच
अधिष्ठानात्क्षेत्रमाहुरेतत्तत्पञ्चविंशकम् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९४
वसिष्ठ उवाच
अधिष्ठानादधिष्ठाता क्षेत्राणामिति नः श्रुतम् ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८७
भीष्म उवाच
अधिष्ठानानि वुद्धेर्हि पृथगर्थानि पञ्चधा |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय २४०
व्यास उवाच
अधिष्ठानानि वै वुद्ध्या पृथगेतानि संस्मरेत् |
९ ख
वन पर्व
अध्याय १७२
वैशम्पाय़न उवाच
अधिष्ठाने न वानार्तः प्रय़ुञ्जीत कदाचन |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७३
भीष्म उवाच
अधिष्ठाय़ च गां लोके भुञ्जते वाहय़न्ति च |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३७
श्रीभगवानु उवाच
अधिष्ठाय़ मनश्चाय़ं विषय़ानुपसेवते ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६३
धृतराष्ट्र उवाच
अधिष्ठितः पदा मूर्ध्नि भग्नसक्थो महीं गतः |
१ क
सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
अधिष्ठितः स शुशुभे कृष्णेनातीव भारत ||
२० ख
विराट पर्व
अध्याय ४०
अर्जुन उवाच
अधिष्ठितो मय़ा सङ्ख्ये रथो गाण्डीवधन्वना |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
अधिसृज्याथ पुत्रं स्वं प्रजानामधिपं ततः |
७१ क
सभा पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
अधिसेनापतिं चक्रे सुधर्माणं महावलम् ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३०
अर्जुन उवाच
अधिय़ज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन |
२ क
सभा पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
अधिय़ज्ञांश्च सम्भारान्धौम्योक्तान्क्षिप्रमेव हि |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३०
श्रीभगवानु उवाच
अधिय़ज्ञोऽहमेवात्र देहे देहभृतां वर ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
अधीतं भारतं तेन कृत्स्नं स्यादिति मे मतिः ||
२०६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
अधीतं विधिवद्दत्तं प्राप्तमाय़ुर्निरामय़म् |
२३ क
शल्य पर्व
अध्याय ६०
दुर्योधन उवाच
अधीतं विधिवद्दत्तं भूः प्रशास्ता ससागरा |
४७ क
वन पर्व
अध्याय १८०
वैशम्पाय़न उवाच
अधीतमग्रे चरता व्रतानि; सम्यग्धनुर्वेदमवाप्य कृत्स्नम् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
भीष्म उवाच
अधीतवांस्तदा शास्त्रं सम्यक्चित्रशिखण्डिजम् ||
३ ख
सभा पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
अधीतवान्कृती शास्त्रे लालितः सततं गृहे |
१४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४६
व्रह्मो उवाच
अधीतवान्यथाशक्ति तथैव व्रह्मचर्यवान् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३०
युधिष्ठिर उवाच
अधीतविद्यश्चरणोपपन्नो; योऽस्त्रं चतुष्पात्पुनरेव चक्रे |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८२
पराशर उवाच
अधीते चापि यो विप्रो वैश्यो यश्चार्जने रतः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७८
राजो उवाच
अधीते नाव्रती कश्चिन्मामकान्तरमाविशः ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३१
महेश्वर उवाच
अधीते स्वर्गमन्विच्छंस्त्रेताग्निशरणः सदा ||
३५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९०
भीष्म उवाच
अधीत्य च यथान्याय़ं विधिवत्तस्य कारिणः ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९४
भीष्म उवाच
अधीत्य च व्याकरणं सकल्पं; शिक्षां च भूतप्रकृतिं न वेद्मि ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
वृहस्पतिरु उवाच
अधीत्य चतुरो वेदान्द्विजो मोहसमन्वितः |
४० क
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
अधीत्य द्विजमध्ये च निर्मलत्वमवाप्नुय़ात् ||
८६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४९
युधिष्ठिर उवाच
अधीत्य नीतिं यस्माच्च नीतिय़ुक्तो न दृश्यते |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५२
द्रोण उवाच
अधीत्य विधिवद्वेदानग्नय़ः सुहुतास्त्वय़ा |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८६
पराशर उवाच
अधीत्य वेदांस्तपसा व्रह्मचारी; यज्ञाञ्शक्त्या संनिसृज्येह पञ्च |
३० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
गौतम उवाच
अधीत्य वेदांस्त्यजतु त्रीनग्नीनपविध्यतु |
६५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२६
व्यास उवाच
अधीत्य वेदानखिलान्गुरुशुश्रूषणे रतः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२४
भीष्म उवाच
अधीत्य वेदानखिलान्साङ्गोपनिषदस्तथा |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
अधीत्य वेदान्कृतसर्वकृत्यः; सन्तानमुत्पाद्य सुखानि भुक्त्वा |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय ४०
विदुर उवाच
अधीत्य वेदान्परिसंस्तीर्य चाग्नी; निष्ट्वा यज्ञैः पालय़ित्वा प्रजाश्च |
२४ क
विराट पर्व
अध्याय ४५
अश्वत्थामो उवाच
अधीत्य व्राह्मणो वेदान्याजय़ेत यजेत च |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०७
सुपर्ण उवाच
अधीत्य सखिलान्वेदानालभन्ते यमक्षय़म् ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ७
भीष्म उवाच
अधीत्य सर्ववेदान्वै सद्यो दुःखात्प्रमुच्यते |
२० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४५
व्रह्मो उवाच
अधीत्याध्यापनं कुर्यात्तथा यजनय़ाजने |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७४
भीष्म उवाच
अधीत्यापि हि यो वेदान्न्याय़विद्भ्यः प्रय़च्छति |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११५
भीष्म उवाच
अधीरजुष्टे पथि वर्तमानं; दमादपेतं विनय़ाच्च पापम् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१२
भीष्म उवाच
अधीष्व पुत्र मोक्षं वै धर्मांश्च विविधानपि ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१५
नारद उवाच
अधीय़तां भवान्वेदान्सार्धं पुत्रेण धीमता |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९०
भीष्म उवाच
अधीय़ते पुराणं ये धर्मशास्त्राण्यथापि च |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७८
राजो उवाच
अधीय़तेऽध्यापय़न्ति यजन्ते याजय़न्ति च |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
अधीय़न्ते तपस्यन्ति यजन्ते याजय़न्ति च |
२९ क