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कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
अश्रूय़त महाञ्शव्दस्तत्र तत्र विशां पते ||
२७ ग
भीष्म पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
अश्रूय़त महाराज योधानां प्रय़ुय़ुत्सताम् ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
अश्रूय़त महाराज वंशानां दह्यतामिव ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
अश्रूय़त महाराज सर्वसैन्येषु भारत ||
३२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
अश्रूय़त यथा काले जलदानां नभस्तले ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय ४८
सूत उवाच
अश्रूय़तानिशं शव्दः पच्यतां चाग्निना भृशम् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४७
सञ्जय़ उवाच
अश्रूय़न्त हि नामानि श्राव्यमाणानि पार्थिवैः |
३५ क
वन पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
अश्रेय़स्कावुभावेतौ पूर्वस्तत्र गुरुः स्मृतः ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७७
भीष्म उवाच
अश्रोत्रिय़ाः सर्व एव सर्वे चानाहिताग्नय़ः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३७
व्यास उवाच
अश्रोत्रिय़े मृतं दानं व्राह्मणेऽव्रह्मवादिनि ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
अश्रौषं त्वां व्यसनिनं युय़ुधानाद्यथातथम् ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २२
धृतराष्ट्र उवाच
अश्रौषं निहतान्पुत्रान्नित्यमेव च निर्जितान् ||
२२ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय ६९
व्राह्मण उवाच
अश्रौषं प्रच्युतश्चाहं यमस्योच्चैः प्रभाषतः |
२५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
अश्रौषं वहुशो राजन्सिंहस्य नदतो यथा ||
११७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५८
धृतराष्ट्र उवाच
अश्रौषं सततं तात दुःसहानि वहूनि च ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
अश्रौषमहमिष्टार्थां पश्चाद्धृदय़शोषिणीम् ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय १७१
और्व उवाच
अश्रौषमहमूरुस्थो गर्भशय़्यागतस्तदा |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
अश्रौषमहमेतद्वै भीष्मद्रोणौ निपातितौ ||
६२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३५
कुन्त्यु उवाच
अश्रौषीत्परुषा वाचस्तन्मे दुःखतरं मतम् ||
१७ ख
सभा पर्व
अध्याय ६९
विदुर उवाच
अश्रौषीरसितस्यापि महर्षेरञ्जनं प्रति ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय ३६
भीमसेन उवाच
अश्रौषीस्त्वं राजधर्मान्यथा वै मनुरव्रवीत् |
२० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७६
वैशम्पाय़न उवाच
अश्वं च तं परामृश्य विषय़ान्ते विषोपमाः |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७०
सञ्जय़ उवाच
अश्वकिम्पुरुषाकीर्णं शरासनलतावृतम् ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय २८
सूत उवाच
अश्वक्रन्देन वीरेण रेणुकेन च पक्षिणा |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
अश्वग्रीव इति ख्यातः सत्त्ववान्यो महासुरः |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
अश्वग्रीवः कर्मशीलो महात्मा; संसिद्धात्मा मोदते देवलोके ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
अश्वग्रीवः पुलोमा च स्वर्भानुरमितध्वजः ||
४९ ख
आदि पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
अश्वग्रीवश्च सूक्ष्मश्च तुहुण्डश्च महासुरः ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४
भीष्म उवाच
अश्वतीर्थं तदद्यापि मानवाः परिचक्षते ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११७
नारद उवाच
अश्वतीर्थे हय़ाँल्लव्ध्वा दत्तवान्पार्थिवाय़ वै ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३२
श्रीभगवानु उवाच
अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३७
श्रीभगवानु उवाच
अश्वत्थमेनं सुविरूढमूल; मसङ्गशस्त्रेण दृढेन छित्त्वा ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८४
देवा ऊचुः
अश्वत्थस्थोऽग्निरित्येवं प्राह देवान्भृगूद्वह ||
३३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८४
देवा ऊचुः
अश्वत्थान्निःसृतश्चाग्निः शमीगर्भगतस्तदा |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
सञ्जय़ उवाच
अश्वत्थामन्पुनः शीघ्रमस्त्रमेतत्प्रय़ोजय़ |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
दुर्योधन उवाच
अश्वत्थामन्प्रसीदस्व क्षन्तुमर्हसि मानद |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
दुर्योधन उवाच
अश्वत्थामन्प्रसीदस्व नाशय़ैतान्ममाहितान् |
७५ क
कर्ण पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
अश्वत्थामन्स्थिरो भूत्वा प्रहराशु सहस्व च ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
अश्वत्थाममय़ं लोकं मंस्यते सह सोमकैः ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
अश्वत्थामा कुरूणां च ये प्रवीरा महारथाः |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
अश्वत्थामा कृतवर्मा कर्णो मद्राधिपः कृपः ||
५० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
अश्वत्थामा कृतवर्मा शकुनिश्चापि सौवलः |
५५ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५
सञ्जय़ उवाच
अश्वत्थामा कृपश्चैव कृतवर्मा च सात्वतः ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
अश्वत्थामा कृपश्चैव कृतवर्मा च सात्वतः |
३६ ख
शल्य पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
अश्वत्थामा कृपश्चैव कृतवर्मा च सात्वतः |
५५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
अश्वत्थामा कृपश्चैव कृतवर्मा च सात्वतः |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
अश्वत्थामा कृपश्चैव कृतवर्मा च सात्वतः |
३९ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
अश्वत्थामा कृपश्चैव कृतवर्मा च सात्वतः ||
६ ग
शल्य पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
अश्वत्थामा कृपश्चैव कृतवर्मा च सात्वतः |
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७१
सञ्जय़ उवाच
अश्वत्थामा कृपश्चैव चक्षुरास्तां नरेश्वर ||
१५ ख