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उद्योग पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम सभामन्यां देवावसथवर्चसम् ||
८ ग
उद्योग पर्व
अध्याय १६
शल्य उवाच
आजगाम सरस्तच्च गूढो यत्र शतक्रतुः ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम सरिच्छ्रेष्ठा तं देशमृषिकारणात् |
२३ क
वन पर्व
अध्याय १२२
लोमश उवाच
आजगाम सरो रम्यं विहर्तुमिदमुत्तमम् ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम सहेन्द्राण्या शक्रः सुरगणैर्वृतः ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय ११६
अकृतव्रण उवाच
आजगाम सुषेणश्च वसुर्विश्वावसुस्तथा ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
आजगाम सुसङ्क्रुद्धः कालान्तकय़मोपमः ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय १५१
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम सुसङ्क्रुद्धो यत्र भीमो व्यवस्थितः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६३
भीष्म उवाच
आजगाम स्वभवनं व्रह्मलोकात्खगोत्तमः ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय १०६
लोमश उवाच
आजगाम हय़ं गृह्य यज्ञवाटं महात्मनः ||
२९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
आजगामाथ तं देशं यत्र रामो व्यवस्थितः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
आजगामाथ तं देशं स्थितो यत्र स शल्मलिः ||
२१ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १८
वासुदेव उवाच
आजगामाथ तत्रैव यत्र देवाः समीजिरे ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय १५७
वैशम्पाय़न उवाच
आजगामाथ तान्द्रष्टुं व्यासः सत्यवतीसुतः ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
श्रीभगवानु उवाच
आजगामाशु तं देशं यत्र युद्धमवर्तत ||
५५ ग
शल्य पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
आजगामाश्रमं तस्यास्त्रिदशाधिपतिः प्रभुः |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
आजगामाश्रमं प्रीतः कृतकृत्यो महोदरः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय २८२
मार्कण्डेय़ उवाच
आजगामाश्रमं रात्रौ प्रहृष्टा प्रविवेश ह ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
आजग्मुः कुरवस्तत्र वादित्रानुगतास्तदा |
१० क
आदि पर्व
अध्याय २१३
वैशम्पाय़न उवाच
आजग्मुः खाण्डवप्रस्थमादाय़ हरणं वहु ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय १००
लोमश उवाच
आजग्मुः परमामार्तिं त्रिदशा मनुजेश्वर ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय १५७
वैशम्पाय़न उवाच
आजग्मुः पाण्डवान्द्रष्टुं सिद्धात्मानो यतव्रताः |
१३ क
सभा पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
आजग्मुः पाण्डुपुत्रस्य राजसूय़ं महाक्रतुम् ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
आजग्मुः पृथिवीपालाः कम्पय़न्त इवाचलान् ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
आजग्मुः शिविरं हृष्टा दृष्ट्वा दुर्योधनं नृपम् |
४० क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
आजग्मुः सहिता द्रष्टुं भीष्मं कुरुपितामहम् |
९१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८५
वसिष्ठ उवाच
आजग्मुः सहितास्तत्र तदा भृगुकुलोद्वह ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय ११६
वैशम्पाय़न उवाच
आजग्मुः सहितास्तत्र यत्र राजा तथागतः ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
आजग्मुरभिरक्षन्तः कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम् ||
१२ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
आजग्मुरृषय़ः सिद्धा नारदप्रमुखा नृप ||
४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
आजग्मुरृषय़स्तत्र वहवस्तीर्थकारणात् ||
४० ग
वन पर्व
अध्याय ५१
वृहदश्व उवाच
आजग्मुर्देवराजस्य समीपममरोत्तमाः ||
२२ ख
विराट पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
आजग्मुर्नगराभ्याशं पार्थाः शत्रुनिवर्हणाः ||
२९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५७
अश्व उवाच
आजग्मुर्निश्चय़ं ज्ञातुं भार्गवस्यातितेजसः ||
४९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
आजग्मुर्भरतश्रेष्ठं द्रष्टुकामा महर्षय़ः ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८५
वसिष्ठ उवाच
आजग्मुर्मुनय़ः सर्वे देवाश्चाग्निपुरोगमाः |
३ क
सभा पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
आजग्मुर्व्राह्मणास्तत्र विषय़ेभ्यस्ततस्ततः |
४६ क
विराट पर्व
अध्याय ६७
वैशम्पाय़न उवाच
आजग्मुश्चारुसर्वाङ्ग्यः सुमृष्टमणिकुण्डलाः ||
२९ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
आजग्मुस्तत्र कौरव्य देवाः शक्रपुरोगमाः ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८६
भीष्म उवाच
आजग्मुस्तत्र तं द्रष्टुं कुमारं ज्वलनात्मजम् |
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय १५०
वैशम्पाय़न उवाच
आजग्मुस्ते ततः सर्वे भैक्षमादाय़ पाण्डवाः ||
१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
आजग्मुस्ते महात्मानः सवाहाः सपदानुगाः ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०६
सञ्जय़ उवाच
आजघान ततः पश्चात्पुत्रं ते नवभिः शरैः ||
३७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
आजघान ततस्तूर्णमभिमन्युर्महामनाः |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
आजघान त्रिभिर्वाणैस्तोत्त्रैरिव महाद्विपम् ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
आजघान नरव्याघ्र शरेण नतपर्वणा ||
४५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
आजघान भृशं क्रुद्धस्तोत्त्रैरिव महाद्विपम् ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९३
सञ्जय़ उवाच
आजघान भृशं क्रुद्धो ध्वजं च निशितैः शरैः |
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७१
सञ्जय़ उवाच
आजघान भृशं क्रुद्धो नवभिर्नतपर्वभिः ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
आजघान भृशं चैव पञ्चभिर्नतपर्वभिः ||
११९ ख