द्रोण पर्व
अध्याय
१४४
सञ्जय़ उवाच
आजघ्ने वहुभिर्वाणैर्जिघांसन्निव भारत ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
आजघ्ने विशिखैस्तीक्ष्णैर्घोरैर्मर्मास्थिभेदिभिः ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
आजघ्ने समरे क्रुद्धः पञ्चाशद्भिः शिलीमुखैः ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
आजघ्ने सारथिं चास्य सुषेणं च ततस्त्रिभिः |
६० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
आजघ्ने साय़कैस्तीक्ष्णैर्नवभिर्नतपर्वभिः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
युधिष्ठिर उवाच
आजन्ममरणं वा ते स्मरन्त्युत न वानघ ||
७६ ख
सभा पर्व
अध्याय
५०
दुर्योधन उवाच
आजमीढ रिपोर्लक्ष्मीर्मा ते रोचिष्ट भारत |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
आजमीढकुलं प्राप्ता स्नुषा पाण्डोर्महात्मनः |
२२ क
सभा पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
आजमीढाजमीढानां यशः संवर्धितं त्वय़ा |
३६ ख
वन पर्व
अध्याय
१३५
लोमश उवाच
आजमीढावगाह्यैनां सर्वपापैः प्रमोक्ष्यसे ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
आजमीढो महाय़ज्ञैर्वहुभिर्भूरिदक्षिणैः ||
४१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८३
भीष्म उवाच
आजहार क्रतुं वीरो व्रह्मक्षत्रेण पूजितम् ||
३१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
आजहार क्रतूंस्तत्र यथोक्तान्वेदपारगैः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९७
भीष्म उवाच
आजहार दिवोदासस्ततो विप्रकृतोऽभवत् ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय
७९
सहदेव उवाच
आजहार पुरा राज्ञे राजसूय़े महाक्रतौ ||
२६ ख
सभा पर्व
अध्याय
११
नारद उवाच
आजहार महाराज राजसूय़ं महाक्रतुम् ||
५५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३
सूत उवाच
आजहार महाय़ज्ञं सर्पसत्रमिति श्रुतिः ||
३९ ख
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
आजहार यशो दीप्तं जिगाय़ च वसुन्धराम् ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
आजहारार्जुनो राज्ञे राजसूय़ं महाक्रतुम् ||
८४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
आजह्रतुर्महात्मानौ ददतुश्च महात्मने ||
७३ ख
आदि पर्व
अध्याय
११८
वैशम्पाय़न उवाच
आजह्रुः कौरवस्यार्थे वासांसि रुचिराणि च ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८२
भीष्म उवाच
आजह्रुरृतवश्चापि सुगन्धीनि पृथक्पृथक् ||
१० ख
सभा पर्व
अध्याय
४९
दुर्योधन उवाच
आजह्रुस्तत्र सत्कृत्य स्वय़मुद्यम्य भारत |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
१५५
व्राह्मण उवाच
आजह्रे तत्तथा सर्वं द्रुपदः कर्मसिद्धय़े ||
३३ ख
वन पर्व
अध्याय
२५४
द्रौपद्यु उवाच
आजानेय़ा वलिनः साधु दान्ता; महावलाः शूरमुदावहन्ति |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२४
भीष्म उवाच
आजानेय़ा वहन्ति त्वां कस्माच्छोचसि पुत्रक ||
१० ख
सभा पर्व
अध्याय
४५
धृतराष्ट्र उवाच
आजानेय़ा वहन्ति त्वां केनासि हरिणः कृशः ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
आजानेय़ा हय़ा राजन्नविभ्रान्ताः श्रिय़ं दधुः ||
१० ख
सभा पर्व
अध्याय
४७
दुर्योधन उवाच
आजानेय़ान्हय़ाञ्शीघ्रानादाय़ानिलरंहसः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४६
धृतराष्ट्र उवाच
आजानेय़ैः सुवलिभिर्युक्तमश्वैस्त्रिहाय़नैः |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
आजानेय़ैः सैन्धवैः पार्वतीय़ै; र्नदीजकाम्वोजवनाय़ुवाह्लिकैः |
९६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
आजानेय़ैर्महावेगैर्नानादेशसमुत्थितैः |
८ क
शल्य पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
आजानेय़ैस्तथा यातं को नु स्वन्ततरो मय़ा ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९
युधिष्ठिर उवाच
आजिघ्रन्पेशलान्गन्धान्फुल्लानां वृक्षवीरुधाम् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४०
भीष्म उवाच
आजिजीविषवो विद्यां यशस्कामाः समन्ततः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६१
सञ्जय़ उवाच
आजिशीर्षगतं दृष्ट्वा भीमसेनं समासदत् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
आजिहीर्षुर्जगामाशु स पुष्पाण्यपराण्यपि ||
१४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४७
व्रह्मो उवाच
आजीवः सर्वभूतानां व्रह्मवृक्षः सनातनः ||
१३ ग
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५०
व्रह्मो उवाच
आजीवः सर्वभूतानां सर्वप्राणभृतां गतिः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८६
भीष्म उवाच
आजीवकस्य स्तेनस्य वर्णसङ्करकस्य च ||
२१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
आजुहाव ततः पार्थं युद्धाय़ युधि वीर्यवान् ||
६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
आजुहाव ततः पार्थान्गदय़ा युधि वीर्यवान् ||
४८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
आजुहाव ततो नाम्ना तदन्नमुपय़ोजय़न् ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
५४
वृहदश्व उवाच
आजुहाव महीपालान्भीमो राजा स्वय़ंवरे ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
आजुहाव रणे यान्तं भीममाधिरथिस्तदा ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४८
सञ्जय़ उवाच
आजुहावाथ तद्रक्षः तच्चासीत्प्रादुरग्रतः ||
३७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८८
भीष्म उवाच
आजेन मासान्प्रीय़न्ते पञ्चैव पितरो नृप |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८८
भीष्म उवाच
आजेन वापि लौहेन मघास्वेव यतव्रतः |
१३ क
विराट पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
आजौरभ्रं च सुभृशं वहूंश्चोच्चावचान्मृगान् |
८ क
शल्य पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
आज्ञप्तं नृपमुख्येषु मानः प्राप्तः सुदुर्लभः |
२२ क