उद्योग पर्व
अध्याय
९७
नारद उवाच
इदमद्भिः समं प्राप्ता ये केचिद्ध्रुवजङ्गमाः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
इदमद्य करिष्यामि श्वः कर्तास्मीति वादिनम् |
९८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
इदमद्य कुलं श्रेष्ठं सर्वराजसु पार्थिव |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३८
श्रीभगवानु उवाच
इदमद्य मय़ा लव्धमिदं प्राप्स्ये मनोरथम् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२११
भीष्म उवाच
इदमनुपधि वाक्यमच्छलं; परमनिरामय़मात्मसाक्षिकम् |
४८ क
शल्य पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
इदमन्तरमित्येव ततः सा सरितां वरा |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८५
भीष्म उवाच
इदमन्तरमित्येव योक्तुकामोऽस्मि भारत ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
इदमन्तरमित्येव शक्रो नृपममोहय़त् ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४१
भीष्म उवाच
इदमन्तरमित्येवं ततोऽभ्यागादथाश्रमम् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
५१
सूत उवाच
इदमन्तरमित्येवं तदास्तीकोऽभ्यचोदय़त् ||
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
इदमन्यच्च कौन्तेय़ वचः स पुरुषोऽव्रवीत् |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३८
पञ्चचूडो उवाच
इदमन्यच्च देवर्षे रहस्यं सर्वय़ोषिताम् |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१
युधिष्ठिर उवाच
इदमन्यच्च भगवन्यत्त्वां वक्ष्यामि नारद |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
इदमन्यच्च राजेन्द्र शृण्वाश्चर्यतरं भुवि |
३३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
इदमन्यत्तु वक्ष्यामि प्रमाणं विधिनिर्मितम् |
४८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
इदमन्यत्तृतीय़ं ते भावस्पर्शविघातकम् |
६५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१८
नारद उवाच
इदमन्यत्परं पश्य मात्र मोहं करिष्यसि ||
४३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
६२
विदुर उवाच
इदमन्यत्प्रवक्ष्यामि यथा दृष्टं गिरौ मय़ा |
२० क
वन पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
इदमन्यत्समाधत्स्व वाक्यं मे वाक्यकोविद ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
इदमपरमुपस्थितं पुन; स्तव निधनाय़ सुय़ुद्धमद्य वै |
६९ क
वन पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
इदमभ्यधिकं राजन्व्राह्मणा गुरवश्च ते |
७३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१२
भीष्म उवाच
इदममृतपदं विदेहराजः; स्वय़मिह पञ्चशिखेन भाष्यमाणः |
५१ क
वन पर्व
अध्याय
२७३
मार्कण्डेय़ उवाच
इदमम्भः कुवेरस्ते महाराजः प्रय़च्छति |
१० क
शल्य पर्व
अध्याय
३०
दुर्योधन उवाच
इदमम्भः प्रविष्टोऽस्मि श्रमात्त्विदमनुष्ठितम् ||
३७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
नकुल उवाच
इदमर्घ्यं च पाद्यं च वृसी चेय़ं तवानघ |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१००
पृथिव्यु उवाच
इदमस्ति गृहे मह्यमिति नित्यं निवेदय़ेत् ||
१९ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
इदमस्तीत्यसम्भ्रान्तो व्रुवन्नस्त्रेण मेदिनीम् |
५६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३८
श्रीभगवानु उवाच
इदमस्तीदमपि मे भविष्यति पुनर्धनम् ||
१३ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
इदमस्त्रं प्रय़ोक्तव्यं मानुषेषु विशेषतः ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८४
भीष्म उवाच
इदमस्त्रं सुदय़ितं प्रत्यभिज्ञास्यते भवान् |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
२२१
जरितो उवाच
इदमाखोर्विलं भूमौ वृक्षस्यास्य समीपतः |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४३
भीष्म उवाच
इदमाख्यातवांश्चापि ममाख्यानं महामुनिः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
इदमाख्यानमार्षेय़ं पारम्पर्यागतं नृप |
११३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८८
भीष्म उवाच
इदमात्मवधाय़ैव राष्ट्रमिच्छन्ति वाधितुम् ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
३०
सूत उवाच
इदमानीतममृतं निक्षेप्स्यामि कुशेषु वः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
५७
वृहदश्व उवाच
इदमारोप्य मिथुनं कुण्डिनं यातुमर्हसि ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
१७७
युधिष्ठिर उवाच
इदमार्षं प्रमाणं च ये यजामह इत्यपि |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
इदमाश्चर्यमासीच्च मध्ये तेषां महात्मनाम् |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४२
भीष्म उवाच
इदमासीन्मनसि च रुच्या रक्षणकारितम् ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय
१३
सूत उवाच
इदमास्तीकमाख्यानं तुभ्यं शौनक पृच्छते ||
८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४५
नारद उवाच
इदमाह ततः सूतं सञ्जय़ं पृथिवीपते ||
२२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
इदमाह महाराज पार्थवाक्यं नरः स माम् |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
२६६
मार्कण्डेय़ उवाच
इदमाह वचः प्रीतो लक्ष्मणं नरकुञ्जरम् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
२१८
मार्कण्डेय़ उवाच
इदमाहुस्तदा चैव स्कन्दं तत्र महर्षय़ः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
२६५
मार्कण्डेय़ उवाच
इदमित्यव्रवीद्वालां त्रस्तां रौहीमिवावलाम् ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय
२६७
मार्कण्डेय़ उवाच
इदमित्याह रत्नानामाकरैः शतशो वृतः ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७२
भीष्म उवाच
इदमिदमिति तत्र तत्र तत्त; त्स्वपरमतैर्गहनं प्रतर्कय़द्भिः ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७२
भीष्म उवाच
इदमिदमिति तृष्णय़ाभिभूतं; जनमनवाप्तधनं विषीदमानम् |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय
२१५
वैशम्पाय़न उवाच
इदमिन्द्रः सदा दावं खाण्डवं परिरक्षति |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११८
सञ्जय़ उवाच
इदमिन्द्रेण ते साक्षादुपदिष्टं महात्मना |
६ क