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द्रोण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
आददानं गजाश्वानां नृणां चाय़ूंषि भारत ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२१
सञ्जय़ उवाच
आददानं महेष्वासं सन्दधानं च पाण्डवम् |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
आददानं शरैर्योधान्मध्ये सूर्यमिव स्थितम् ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय १५८
वैशम्पाय़न उवाच
आददानं शितान्वाणान्योद्धुकाममवस्थितम् |
४० क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
आददानः शरान्घोरान्स्वरश्मीनिव भास्करः ||
१११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
आददानस्तु शूराणामाय़ूंष्यभवदार्जुनिः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
आददानस्य च धनं निग्रहं च युधिष्ठिर |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय १०
भीम उवाच
आददानस्य चेद्राज्यं ये केचित्परिपन्थिनः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
आददानस्य भूय़श्च सन्दधानस्य चापरान् ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५०
धृतराष्ट्र उवाच
आददानस्य शस्त्रं हि क्षत्रधर्मं परीप्सतः |
५१ क
विराट पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
आददानस्य हि शरान्सन्धाय़ च विमुञ्चतः |
१९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
भीष्म उवाच
आददानाः समुद्धृत्य मूलानि च फलानि च ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
आददानाश्च नाराचान्निर्मुक्ताशीविषोपमान् ||
१७ ख
विराट पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
आददामोऽस्य रत्नानि विविधानि वसूनि च |
९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १२
धृतराष्ट्र उवाच
आददीत वलं राजा मौलं मित्रवलं तथा |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
आददीत वलिं चैव प्रजाभ्यः कुरुनन्दन |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२८
भीष्म उवाच
आददीत विशिष्टेभ्यो नावसीदेत्कथञ्चन ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६६
भीष्म उवाच
आददीतेह भोज्येन तद्गार्हस्थ्यं युधिष्ठिर ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
आददीमहि गां सर्वां तथापि श्रेय़ एव नः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय २९
प्रह्लाद उवाच
आददीरन्नधिकृता यथाकाममचेतसः |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
आददे च शरं घोरं पार्षतस्य वधं प्रति |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
आददे परिघं घोरं नगेन्द्रशिखरोपमम् |
३० ख
आदि पर्व
अध्याय १९६
कर्ण उवाच
आददे सर्वशो मूढ ऐश्वर्यं च स्वय़ं तदा ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४६
सञ्जय़ उवाच
आददेऽन्यद्धनुः शूरो वेगवत्सारवत्तरम् ||
४३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
आददेऽन्यद्धनुः श्रेष्ठं द्रोणस्यान्तचिकीर्षय़ा ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८१
सञ्जय़ उवाच
आददेऽन्यद्धनुर्दिव्यं भारघ्नं वेगवत्तरम् ||
२६ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ७१
भीष्म उवाच
आदद्यान्न च साधुभ्यो नासत्पुरुषमाश्रय़ेत् ||
६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
आदधच्चात्मनस्तेजो हविषेद्ध इवानलः ||
६० ग
द्रोण पर्व
अध्याय ११८
सञ्जय़ उवाच
आदधज्जीवलोकस्य दुःखमुत्तममुत्तमः ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
आदधत्सन्दधन्नेषून्दृष्टः कैश्चिद्रणेऽर्जुनः |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५०
भीष्म उवाच
आदधत्सर्वभूतेषु विस्रम्भं परमं शुभम् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
आदर्श इव शुद्धात्मा शारदश्चन्द्रमा इव |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
आदर्शे विमले कृष्णस्ततः सात्यकिमव्रवीत् ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१५
भीष्म उवाच
आदर्शे स्वामिव छाय़ां पश्यस्यात्मानमात्मना |
२९ क
वन पर्व
अध्याय २९
प्रह्लाद उवाच
आदातुं चास्य वित्तानि प्रार्थय़न्तेऽल्पचेतसः ||
९ ख
सभा पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
आदातुं हि नरव्याघ्रो यं यमिच्छत्ययं यदा |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३७
व्यास उवाच
आदानमनृतं हिंसा धर्मो व्यावस्थिकः स्मृतः ||
८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १०
धृतराष्ट्र उवाच
आदानरुचय़श्चैव परदाराभिमर्शकाः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५६
भीष्म उवाच
आदावेव कुरुश्रेष्ठ राज्ञा रञ्जनकाम्यया |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३९
विदुर उवाच
आदावेव न तत्कुर्यादध्रुवे जीविते सति ||
२७ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
आदावेव मनुष्येण वर्तितव्यं यथा क्षमम् |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२२
भीष्म उवाच
आदावेव हि तच्छास्त्रमोङ्कारस्वरभूषितम् |
३४ क
सभा पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
आदास्यति पुनः क्षत्रमेवं वलसमन्वितम् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय २४
वैशम्पाय़न उवाच
आदास्यते वासमिमं निरुष्य; वनेषु राजा द्विषतां यशांसि ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय १४
सूत उवाच
आदास्यन्नात्मनो भोज्यमन्नं विहितमस्य यत् |
२३ क
विराट पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
आदास्यामो हि गास्तस्य विविधानि वसूनि च ||
१९ ख
विराट पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
आदास्याम्यहमेतस्य धनुर्ज्यामपि चाहवे ||
२ ग
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
आदाय़ कर्णं विव्याध त्रिसप्तत्या नदन्रणे ||
६४ ख
आदि पर्व
अध्याय १३७
वैशम्पाय़न उवाच
आदाय़ कुन्तीं भ्रातृंश्च जगामाशु महावलः ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय १४४
वैशम्पाय़न उवाच
आदाय़ कृष्णां चरता वने मृगगणाय़ुते ||
१२ ख