आदि पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
आदाय़ च कुमारं तं जगामाथ यथेप्सितम् ||
४३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२२१
वैशम्पाय़न उवाच
आदाय़ च न शक्तास्मि पुत्रान्सरितुमन्यतः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
आदाय़ जीवितं तेषामाहरिष्यामि तामहम् ||
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
आदाय़ तरसा राजंस्तस्थौ गिरिरिवाचलः ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
आदाय़ तव पुत्राणां जय़ाशां शर्म वर्म च ||
४६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९९
वैशम्पाय़न उवाच
आदाय़ द्रौपदीं कृष्णां कुन्तीं चैव यशस्विनीम् |
११ क
वन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
आदाय़ पाण्डवांश्चैव तांश्च विप्राननेकशः |
२२ क
विराट पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
आदाय़ प्रय़यौ वीरः स वृहन्नडसारथिः ||
२१ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
आदाय़ रुचिरं चित्रं समार्गणगुणं धनुः ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
आदाय़ वलिषड्भागं यो राष्ट्रं नाभिरक्षति |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
११९
वैशम्पाय़न उवाच
आदाय़ विविशुः पौराः पुरं वारणसाह्वय़म् ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
आदाय़ वेगेन जगाम विष्णु; र्जिष्णुं महावात इवैकवृक्षम् ||
९७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७९
वैशम्पाय़न उवाच
आदाय़ शुक्लं वरमाल्यदाम; जगाम कुन्तीसुतमुत्स्मय़न्ती ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०४
नारद उवाच
आदाय़ सर्वरत्नानि परां तुष्टिमुपागतौ ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११७
नारद उवाच
आदाय़ाश्वांश्च कन्यां च विश्वामित्रमुपागमत् ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
२६८
मार्कण्डेय़ उवाच
आदाय़ैव खमुत्पत्य प्रासादतलमाविशत् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
आदाय़ैव तु भूतानां तेजो विसृजते पुनः ||
३६ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
आदाय़ोपय़यौ वालो रत्नानि विविधानि च ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२९
व्यास उवाच
आदिं ते निधनं चैव कर्म चातीत्य सर्वशः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२४
भीष्म उवाच
आदिकर्ता महाभूतं तमेवाहुः प्रजापतिम् ||
४४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३७
वैशम्पाय़न उवाच
आदिकालोद्भवं विप्रास्तपसाधिगतं मय़ा ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७६
नारद उवाच
आदितस्तन्न कर्तव्यमिच्छता भवमात्मनः ||
४७ ख
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
आदितो मनुजव्याघ्र कृत्स्नस्य जगतः क्षय़े ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०८
नार्यु उवाच
आदित्य इव तं देशं कृत्स्नं स व्यवभासय़त् ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
आदित्य इव दुष्प्रेक्ष्यः समरेष्वपि चाभवत् ||
८३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६५
गन्धर्व उवाच
आदित्य इव मध्याह्ने क्रोधदीप्तवपुर्वभौ |
३४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
आदित्य इव मध्याह्ने दुर्निरीक्ष्यः परन्तपः |
५१ क
सभा पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
आदित्य इव मध्याह्ने सहस्रकिरणावृतः ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६१
तपत्यु उवाच
आदित्यं प्रणिपातेन तपसा निय़मेन च ||
१८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३९
व्रह्मो उवाच
आदित्यः सत्त्वमुद्दिष्टं कुचोरास्तु यथा तमः |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
आदित्यकेतुः सप्तत्या वह्वाशी चापि पञ्चभिः |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
आदित्यकेतुर्वह्वाशी कुण्डधारो महोदरः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
१०८
वैशम्पाय़न उवाच
आदित्यकेतुर्वह्वाशी नागदन्तोग्रय़ाय़िनौ |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
आदित्यकेतोः केतुं च छित्त्वा वाणेन संय़ुगे |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
आदित्यचन्द्रावनिलानलौ च; द्यौर्भूमिरापो वसवोऽथ विश्वे |
४७ क
आदि पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
आदित्यचन्द्रावनिलानलौ च; द्यौर्भूमिरापो हृदय़ं यमश्च |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय
२०४
नारद उवाच
आदित्यचरिताँल्लोकान्विचरिष्यसि भामिनि |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
आदित्यतरुणप्रख्याः श्लाघनीय़मुदावहन् ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
आदित्यतरुणाभासो विधूम इव पावकः |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
आदित्यतापतप्तास्ते विशन्ति शशिमण्डलम् ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
५०
आस्तीक उवाच
आदित्यतेजःप्रतिमानतेजा; भीष्मो यथा भ्राजसि सुव्रतस्त्वम् ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३२
नरनाराय़णावू ऊचतुः
आदित्यदग्धसर्वाङ्गा अदृश्याः केनचित्क्वचित् |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
२५३
वैशम्पाय़न उवाच
आदित्यदीप्तां दिशमभ्युपेत्य; मृगद्विजाः क्रूरमिमे वदन्ति |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
व्यास उवाच
आदित्यपतय़े चैव वसूनां पतय़े तथा ||
९१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
आदित्यपथगः केतुः पार्थस्यामिततेजसः ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
आदित्यपथगः केतुस्तस्याद्भुतमनोरमः |
४२ क
वन पर्व
अध्याय
१९३
उत्तङ्क उवाच
आदित्यपथमावृत्य सप्ताहं भूमिकम्पनम् |
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४०
सञ्जय़ उवाच
आदित्यमिव दुर्धर्षं तपन्तं शत्रुवाहिनीम् |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
२१६
वैशम्पाय़न उवाच
आदित्यमुदके देवं निवसन्तं जलेश्वरम् ||
१ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
३
व्यास उवाच
आदित्यमुपतिष्ठद्भिस्तत्र चोक्तं महर्षिभिः |
३४ क