शान्ति पर्व
अध्याय
१२८
भीष्म उवाच
आपद्गतेन धर्माणामन्याय़ेनोपजीवनम् |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२०
भीष्म उवाच
आपद्द्वारेषु यत्तः स्याज्जलप्रस्रवणेष्विव |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
९७
वैशम्पाय़न उवाच
आपद्धर्ममवेक्षस्व वह पैतामहीं धुरम् ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४६
व्राह्मण्यु उवाच
आपद्धर्मविमोक्षाय़ भार्या चापि सतां मतम् ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
आपद्धर्मश्च पर्वोक्तं मोक्षधर्मस्ततः परम् ||
६४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३४
भीष्म उवाच
आपद्धर्माननुप्रेक्ष्य तत्कार्यमविशङ्कय़ा ||
५४ ख
आदि पर्व
अध्याय
९७
वैशम्पाय़न उवाच
आपद्धर्मार्थकुशलैर्लोकतन्त्रमवेक्ष्य च ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
आपद्धर्मार्थकुशलो महावुद्धिर्युधिष्ठिरः |
६ क
सभा पर्व
अध्याय
६९
विदुर उवाच
आपद्धर्मार्थकृच्छ्रेषु सर्वकार्येषु वा पुनः |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
आपद्धर्माश्च तत्रैव कालहेतुप्रदर्शकाः |
१९८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२८
युधिष्ठिर उवाच
आपद्यथाकर्मसु वर्तमाना; न्विकर्मस्थान्सञ्जय़ गर्हय़ेत ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
८५
अष्टक उवाच
आपद्यमानो नरय़ोनिमेता; माचक्ष्व मे संशय़ात्प्रव्रवीमि ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
आपद्यस्यां सुकष्टाय़ां मरणे समुपस्थिते |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८९
भीष्म उवाच
आपद्येव तु याचेरन्येषां नास्ति परिग्रहः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
आपद्विनाशभूय़िष्ठा शतैकीय़ं च जीवितम् |
३६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२९
युधिष्ठिर उवाच
आपन्नचेतसो व्रूहि किं कार्यमवशिष्यते ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७८
भीष्म उवाच
आपन्नमन्युः संविग्नः सोऽभ्यगात्सुरसत्तमम् ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
आपन्नश्चापदो मुच्येद्वद्धो मुच्येत वन्धनात् |
७४ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१८
गान्धार्यु उवाच
आपन्ना यत्स्पृशन्तीमा रुधिरार्द्रां वसुन्धराम् ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८६
पराशर उवाच
आपन्ने तूत्तरां काष्ठां सूर्ये यो निधनं व्रजेत् |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
आपन्नो मे पिता यक्ष नचिराद्विनशिष्यति |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३४
भीष्म उवाच
आपन्नो रिपुसंस्थो वा व्रह्मशापार्दितोऽपि वा |
५४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
आपवस्तं ततो रोषाच्छशापार्जुनमच्युत |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
आपवात्पुरुषव्याघ्र सर्वधर्मविशारदात् ||
३५ ग
आदि पर्व
अध्याय
९३
शन्तनुरु उवाच
आपवो नाम को न्वेष वसूनां किं च दुष्कृतम् |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४५
वासुदेव उवाच
आपश्चुक्षुभिरे चैव चकम्पे च वसुन्धरा |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
आपश्चुक्षुभिरे सर्वाश्चकम्पे च वसुन्धरा |
४५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६७
असित उवाच
आपश्चैवान्तरिक्षं च पृथिवी वाय़ुपावकौ |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२५
व्यास उवाच
आपस्ततः प्रतिष्ठन्ति ऊर्मिमत्यो महास्वनाः |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
आपस्ततोऽन्या विज्ञेय़ा एष सङ्क्षेप उच्यते ||
१६ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२२५
व्यास उवाच
आपस्तदा आत्तगुणा ज्योतिष्युपरमन्ति च ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६५
भीष्म उवाच
आपस्तम्वश्च मेधावी शङ्खश्च लिखितस्तथा |
११ क
वन पर्व
अध्याय
१२६
लोमश उवाच
आपस्त्वय़ा महाराज मत्तपोवीर्यसम्भृताः |
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
२१२
मार्कण्डेय़ उवाच
आपस्य मुदिता भार्या सहस्य परमा प्रिय़ा |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
आपानभूमिं कालस्य तदा भुक्तोज्झितामिव ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
आपाने पानगलिता दैवेनाभिप्रचोदिताः |
२२१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
आपीडकेय़ूरवराङ्गदानि; ग्रैवेय़निष्काः ससुवर्णसूत्राः ||
२९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
आपीडिनो रक्तदन्ता मत्तमातङ्गविक्रमाः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
आपीडैर्वहुभिर्भाति श्रीमान्द्रमिडराडिव ||
९८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
आपुप्लुवे सिंह इवाचलाग्रं; सम्प्रेक्षमाणस्य धनञ्जय़स्य ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७१
और्व उवाच
आपूर्णकोशाः किल मे मातरः पितरस्तथा |
७ क
वन पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
आपूर्णमासीच्छव्देन तदप्यासीन्महाद्भुतम् ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
आपूर्यत मही कृत्स्ना प्राणिभिर्वहुभिर्भृशम् ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
२२
सूत उवाच
आपूर्यत मही चापि सलिलेन समन्ततः ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५४
भीम उवाच
आपूर्यते कौरवी चाप्यभीक्ष्णं; सेना ह्यसौ सुभृशं हन्यमाना |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
आपूर्यते महाराज सलिलौघपरिप्लुता ||
७० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२४
श्रीभगवानु उवाच
आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं; समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत् |
७० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२४३
व्यास उवाच
आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं; समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत् |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
आपूर्यमाणा निशितैः शरैः पाण्डवचोदितैः |
६२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७०
सञ्जय़ उवाच
आपूर्यमाणेनास्त्रेण सैन्ये क्षीय़ति चाभिभो |
२४ क