आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
श्वशुर उवाच
गणय़ित्वा महाभागे त्वं हि धर्मभृतां वरा ||
५४ ख
वन पर्व
अध्याय
७०
वृहदश्व उवाच
गणय़ित्वा यथोक्तानि तावन्त्येव फलानि च ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७०
वृत्र उवाच
गतं गच्छन्ति चाध्वानं सर्वभूतानि सर्वदा ||
२२ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
गतं तच्च पुनर्हस्ते कालेनैष्यति तस्य ह ||
३८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५९
युधिष्ठिर उवाच
गतं वैरस्य निधनं हतो राजा सुय़ोधनः |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
गतं हि सहसा भूमिं नकुलो मां समाप्नुय़ात् |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय
६५
शकुन्तलो उवाच
गतः पिता मे भगवान्फलान्याहर्तुमाश्रमात् |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
गतः पुण्यकृतां लोकानभिमन्युर्न संशय़ः ||
६४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
गतः पुण्यकृतां लोकान्सर्वकामदुहोऽक्षय़ान् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
गतः शक्रस्य सदनं तत्रापश्यं सुरेश्वरम् ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८१
पराशर उवाच
गतः शुक्रत्वमुशना देवदेवप्रसादनात् |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
४८
सूत उवाच
गतः श्रुत्वैव राजानं दीक्षितं जनमेजय़म् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४६
व्यास उवाच
गतः स दुःखय़ोरन्तं यतमानस्तय़ोर्द्वय़ोः ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
गतः स परमां सिद्धिं तव पुत्रो न संशय़ः ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
गतः स पुरुषव्याघ्रः प्रमथ्येमां महाचमूम् ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
२८१
सावित्र्यु उवाच
गतः स भगवान्देवः प्रजासंय़मनो यमः ||
६४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६६
सञ्जय़ उवाच
गतः स वीरलोकाय़ पिता मम न संशय़ः |
२२ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१०
वैशम्पाय़न उवाच
गतः सानुचरो राजञ्शक्रलोकं महीपतिः ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
कृष्ण उवाच
गतः सुकष्टं नरकं सूक्ष्मधर्मेष्वकोविदः |
४६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६८
भीष्म उवाच
गतः सोऽतिरथत्वं हि धृष्टद्युम्नेन संमितः |
२३ क
शल्य पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
गतज्वरं महेष्वासं तीर्णपारं महारथम् |
४१ क
वन पर्व
अध्याय
२७३
मार्कण्डेय़ उवाच
गततन्द्रीक्लमौ चास्तां क्षणेनोभौ महारथौ ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०७
सुपर्ण उवाच
गतदारो गतामात्यो गतराज्यो वनं गतः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३९
भीष्म उवाच
गतदैवतसङ्कल्पा वृद्धवालविनाकृता |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
गतपूर्वाह्णभूय़िष्ठे तस्मिन्नहनि दारुणे |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
गतपूर्वाह्णभूय़िष्ठे तस्मिन्नहनि भारत |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
गतप्रत्यागताक्षेपैश्चित्रैः शस्त्रविघातिभिः |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
गतप्रत्यागतावृत्तैर्मण्डलैः संनिवर्तनैः |
५२ क
आदि पर्व
अध्याय
४४
सूत उवाच
गतमात्रं तु भर्तारं जरत्कारुरवेदय़त् |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
गतवानस्मि तं देशं युद्धं यत्राभवत्पुरा |
११ ख
वन पर्व
अध्याय
१३८
लोमश उवाच
गतवानेव कोपस्य वशं परमदुर्मतिः ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
१३८
लोमश उवाच
गतवानेव तं क्षुद्रं कालान्तकय़मोपमम् ||
१२ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
गतशोको निराय़ासो मुक्तवैरो भविष्यसि ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२६
वासुदेव उवाच
गतश्च वरदं द्रष्टुं सर्वलोकपितामहम् ||
३४ ख
मौसल पर्व
अध्याय
६
वैशम्पाय़न उवाच
गतश्रिय़ं निरानन्दां पद्मिनीं शिशिरे यथा ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
२५१
जय़द्रथ उवाच
गतश्रीकांश्च्युतान्राज्यात्कृपणान्गतचेतसः |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२६
श्रीभगवानु उवाच
गतसङ्गस्य मुक्तस्य ज्ञानावस्थितचेतसः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
२५६
भीमसेन उवाच
गतसत्त्वमिव ज्ञात्वा कर्तारमशुभस्य तम् |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
गतसत्त्वा महीं प्राप्य प्रमृष्टा दीर्घवाहुना ||
१४ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१६१
सञ्जय़ उवाच
गतसत्त्वा व्यदृश्यन्त तथैव सह सादिभिः ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
२१७
वैशम्पाय़न उवाच
गतसत्त्वाः स्म दृश्यन्ते कूर्ममत्स्याः सहस्रशः ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
गतसत्त्वो निरुत्साहः पतितः खाद्व्यदृश्यत |
५७ ख
वन पर्व
अध्याय
७२
वाहुक उवाच
गतस्ततो यथाकामं नैष जानाति नैषधम् ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
गतस्तव वरारोहे पुत्रः स्वर्गं ज्वरं जहि ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
गतस्य विषय़ं तस्य नकुलोलूकय़ोस्तदा |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१
युधिष्ठिर उवाच
गता किल पृथा तस्य सकाशमिति नः श्रुतम् |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
गता द्विरष्टवर्षता ध्रुवोऽसि पञ्चविंशकः |
६२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२३
एकतद्वितत्रिता ऊचुः
गता निःश्रेय़सार्थं हि कदाचिद्दिशमुत्तराम् ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
गता स्वर्गं महाभागा पूजिता निय़तात्मभिः ||
८ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१५८
धृतराष्ट्र उवाच
गता हि वासवी हत्वा तृणभूतं घटोत्कचम् ||
१० ख