शान्ति पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
आमिषे गृध्यमानानामशुनां नः शुनामिव |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
आमिषे तु प्रसक्तः स कदाचिदवलोकय़न् |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
आमिषेप्सू गवां मध्ये सिंहाविव वलोत्कटौ ||
११ ग
वन पर्व
अध्याय
२९०
वैशम्पाय़न उवाच
आमुक्तकवचं देवं कुण्डलाभ्यां विभूषितम् ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
आमुक्तकवचः कर्णो यस्तु जज्ञे महारथः |
८९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
आमुक्तकवचः खड्गी जाम्वूनदकिरीटभृत् |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
१०४
वैशम्पाय़न उवाच
आमुक्तकवचः श्रीमान्देवगर्भः श्रिय़ावृतः ||
१० ग
शल्य पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
आमुक्तकवचौ कृष्णौ लोकमध्ये विरेजतुः ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
२९६
वैशम्पाय़न उवाच
आमुक्तखड्गो मेधावी तत्सरः प्रत्यपद्यत ||
२१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३१
युधिष्ठिर उवाच
आमुञ्च कवचं वीर मूर्धजान्यमय़स्व च |
५२ क
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
आमुञ्चतां च वर्माणि सम्भ्रमः सुमहानभूत् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
१२१
लोमश उवाच
आमूर्तरय़सश्चेह राजा वज्रधरं प्रभुम् |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
आमूर्तरय़सस्तस्मात्ततो भूमिशय़ो नृपः ||
७३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९२
उतथ्य उवाच
आमूलं निर्दहत्येव मा स्म दुर्वलमासदः ||
१५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४६
व्रह्मो उवाच
आमूलफलभिक्षाभिरर्चेदतिथिमागतम् |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७५
भीष्म उवाच
आम्नाता मे ददतीराश्रय़ं तु; तथानुक्ताः सन्तु सर्वाशिषो मे ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११
शकुनिरु उवाच
आम्नाय़दृढवादीनि तथा सिद्धिरिहेष्यते |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६०
भीष्म उवाच
आम्नाय़मनुपश्यन्हि पुराणं शाश्वतं ध्रुवम् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६०
स्यूमरश्मिरु उवाच
आम्नाय़मार्षं पश्यामि यस्मिन्वेदाः प्रतिष्ठिताः |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५२
युधिष्ठिर उवाच
आम्नाय़वचनं सत्यमित्ययं लोकसङ्ग्रहः |
९ क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
आम्नाय़सारिणीमृद्धां मम शोकनिवर्हिणीम् ||
५५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५२
युधिष्ठिर उवाच
आम्नाय़ेभ्यः परं वेदाः प्रसृता विश्वतोमुखाः ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
२९
वासुदेव उवाच
आम्नाय़ेषु नित्यसंय़ोगमस्य; तथाश्वमेधे राजसूय़े च विद्धि |
१६ क
सभा पर्व
अध्याय
४८
दुर्योधन उवाच
आम्रपत्रसवर्णानामददद्धेममालिनाम् ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१८
नारद उवाच
आम्रपुष्पोपमा यस्य निवृत्तिरुपलभ्यते ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
आम्रानाम्रातकान्फुल्लान्नारिकेलान्सतिन्दुकान् |
४० क
आदि पर्व
अध्याय
१९९
वैशम्पाय़न उवाच
आम्रैराम्रातकैर्नीपैरशोकैश्चम्पकैस्तथा ||
३९ ख
आदि पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
आम्लेच्छाटविकान्सर्वान्स भुङ्क्ते रिपुमर्दनः |
५ क
वन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
आम्विकेय़ेन दुर्धर्ष राज्ञा दुर्योधनेन च ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
आम्विकेय़ो महाराज धृतराष्ट्रोऽन्वपृच्छत ||
७ ख
विराट पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
आरक्षाश्च विधीय़न्तां यत्र योत्स्यामहे परान् ||
३१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
यातुधान्यु उवाच
आरक्षिणीं मां पद्मिन्या वित्त सर्वे तपोधनाः ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
आरट्टा नाम ते देशा नष्टधर्मान्न तान्व्रजेत् |
३६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
आरट्टा नाम ते देशा वाह्लीका नाम ते जनाः |
४७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
आरट्टा नाम वाह्लीका न तेष्वार्यो द्व्यहं वसेत् ||
४३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
आरट्टा नाम वाह्लीका वर्जनीय़ा विपश्चिता ||
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
आरट्टानां महीजानां सिन्धुजानां च सर्वशः ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
आरणेय़ं ततः पर्व वैराटं तदनन्तरम् |
४८ क
वन पर्व
अध्याय
२९८
वैशम्पाय़न उवाच
आरणेय़ं ददुस्तस्मै व्राह्मणाय़ तपस्विने ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
आरणेय़मुपाख्यानं यत्र धर्मोऽन्वशात्सुतम् |
१२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३११
भीष्म उवाच
आरणेय़स्तथा दिव्यं प्राप्य जन्म महाद्युतिः |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१२
भीष्म उवाच
आरणेय़स्तु शुद्धात्मा त्रिसन्देहस्त्रिकर्मकृत् |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१४
भीष्म उवाच
आरणेय़ो विशुद्धात्मा नभसीव दिवाकरः ||
२५ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३३१
जनमेजय़ उवाच
आरण्यकं च वेदेभ्य ओषधिभ्योऽमृतं यथा ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
आरण्यकं जगौ देवो हरिर्नाराय़णो वशी ||
८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
आरण्यकं महाराज व्यासस्यानुमते तदा ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२३
भीष्म उवाच
आरण्यकपदोद्गीता भागास्तत्रोपकल्पिताः ||
१० ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१३३
भीष्म उवाच
आरण्यकान्प्रव्रजितान्व्राह्मणान्परिपालय़न् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२६
भीष्म उवाच
आरण्यकेन विधिना राज्ञे सर्वं न्यवेदय़त् ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
आरण्यकेन सहितं नाराय़णमुखोद्गतम् ||
२८ ग