शान्ति पर्व
अध्याय
२७५
नारद उवाच
उरसेव प्रणमसे वाहुभ्यां तरसीव च |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३०
कुन्त्यु उवाच
उरस्तः क्षत्रिय़ः सृष्टो वाहुवीर्योपजीविता |
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
उरस्यपि च पृष्ठे च पार्श्वय़ोश्च भृशाहतः |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
उरस्यभून्नरश्रेष्ठ महत्या सेनय़ा वृतः ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८१
भीष्म उवाच
उरस्यविध्यत्सङ्क्रुद्धो जामदग्न्यो महावलः ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६२
सञ्जय़ उवाच
उरस्यैर्मणिभिर्निष्कैश्चूडामणिभिरेव च |
४६ क
वन पर्व
अध्याय
१७०
अर्जुन उवाच
उरांसि पाणिभिर्घ्नन्त्यः प्रस्रस्तस्रग्विभूषणाः ||
५७ ख
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
उरांसि पाणिभिर्घ्नन्त्यो व्यलपन्करुणं स्त्रिय़ः ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
उरांस्युरोभिरन्योन्यं समाश्लिष्य निजघ्निरे ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय
१९८
व्याध उवाच
उरुण्डा वामनाः कुव्जाः स्थूलशीर्षास्तथैव च |
३५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
६
वैशम्पाय़न उवाच
उरो मुखं च शनकैः पर्यमार्जत धर्मवित् ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
२६३
मार्कण्डेय़ उवाच
उरोगतविशालाक्षं महोदरमहामुखम् ||
२५ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३१९
भीष्म उवाच
उर्वशी पूर्वचित्तिश्च यं नित्यमुपसेवते |
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
उर्वशी पूर्वचित्तिश्च सहजन्या च मेनका |
६७ क
वन पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
उर्वशी मिश्रकेशी च डुण्डुर्गौरी वरूथिनी ||
२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
उर्वशी मेनका रम्भा मिश्रकेशी अलम्वुषा |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२६
अङ्गिरा उवाच
उर्वशीकृत्तिकाय़ोगे गत्वा यः सुसमाहितः |
४३ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
उर्वशीतीर्थमासाद्य ततः सोमाश्रमं वुधः |
१३६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१९
भीष्म उवाच
उर्वश्या वचनं श्रुत्वा शुकः परमधर्मवित् |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
उर्वश्येकादशीत्येता जगुराय़तलोचनाः ||
५४ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
१५७
सञ्जय़ उवाच
उलूक गच्छ कैतव्य पाण्डवान्सहसोमकान् |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५८
युधिष्ठिर उवाच
उलूक न भय़ं तेऽस्ति व्रूहि त्वं विगतज्वरः |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५७
सञ्जय़ उवाच
उलूक मद्वचो व्रूय़ा असकृद्भीमसेनकम् ||
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
उलूकं च पतत्रिं च चकार विरथावुभौ ||
५२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
उलूकं चन्द्रकं नाम तीक्ष्णतुण्डं क्षपाचरम् ||
३२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
उलूकं चापि कैतव्यं ये च सारस्वता गणाः |
२३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
उलूकं ताडय़ामास वज्रेणेन्द्र इवाचलम् ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४६
सञ्जय़ उवाच
उलूकं त्रिभिराजघ्ने त्रिभिरेव महाय़सैः ||
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
उलूकं पञ्चभिर्वाणैराजघान स्तनान्तरे ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
उलूकं समरे राजन्सहदेवः समभ्ययात् ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७७
धृष्टद्युम्न उवाच
उलूकः कैतवो राजा चित्राङ्गदशुभाङ्गदौ |
२० क
शल्य पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
उलूकः पुरुषव्याघ्र कैतव्यो दृढविक्रमः ||
२५ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
उलूकः प्राद्रवत्तत्र दृष्ट्वा द्रोणं निपातितम् ||
८० ख
शल्य पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
उलूकः शकुनिश्चैव कृतवर्मा च सात्वतः ||
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
उलूकः सौवलश्चैव राजा च सह सोदरैः ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
उलूकदूतागमनं पर्वामर्षविवर्धनम् ||
५३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
उलूकनकुलौ तूर्णं जग्मतुः स्वं स्वमालय़म् ||
११४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३९
भीष्म उवाच
उलूकपक्षध्वजिभिर्देवताय़तनैर्वृतम् |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
उलूकवदनाः केचिद्गृध्रगोमाय़ुदर्शनाः |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२७
भीष्म उवाच
उलूकवदनैर्भीमैः श्येनभासमुखैस्तथा |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
उलूकश्च पतत्री च शकुनिश्चापि सौवलः |
३२ क
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
उलूकश्च रणे भीमं विव्याध दशभिः शरैः ||
२ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
उलूकश्चापि तं वाणैर्निशितैर्लोमवाहिभिः ||
७५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
उलूकश्चेह तिष्ठन्तं मार्जारः पाशसङ्क्षय़ात् ||
३७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२८
सूत उवाच
उलूकश्वसनाभ्यां च निमेषेण च पक्षिणा |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
उलूकस्तं तु विंशत्या विद्ध्वा हेमविभूषितैः |
६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
उलूकस्तस्य भल्लेन तैलधौतेन मारिष |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
उलूकस्तु ततः क्रुद्धस्तव पुत्रस्य संय़ुगे |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
उलूकस्तु ततो यानादवप्लुत्य विशां पते |
४१ क
शल्य पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
उलूकस्तु महेष्वासं नकुलं युद्धदुर्मदम् |
२५ क