द्रोण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
आरोप्य वै रथे सूत सर्वोपकरणानि च ||
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
आरोप्य स्वरथे तूर्णमपोवाह रथान्तरम् ||
६६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११९
भीष्म उवाच
आरोप्यः श्वा स्वकात्स्थानादुत्क्रम्यान्यत्प्रपद्यते ||
२ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२५
गान्धार्यु उवाच
आरोप्याङ्के रुदन्त्येताश्चेदिराजवराङ्गनाः ||
२२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
आरोप्यारोप्य गच्छन्ति विमानेष्वप्सरोगणाः ||
५६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
आरोपय़द्रथं तूर्णं गौतमं रथिनां वरम् ||
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
आरोपय़द्रथं तूर्णं पश्यतां सर्वधन्विनाम् ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
आरोपय़द्रथं राजन्दुर्योधनममर्षणम् ||
१८ ख
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
आरोपय़ितुमारेभे यत्नादिव कथञ्चन ||
५२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६९
भीष्म उवाच
आरोपय़ेच्छतघ्नीश्च स्वाधीनानि च कारय़ेत् ||
४३ ख
वन पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
आरोह त्वं मय़ा सार्धं लव्धास्त्रः पुनरेष्यसि ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८०
भीष्म उवाच
आरोह स्यन्दनं वीर कवचं च महाभुज |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७१
भीष्म उवाच
आरोहणं तत्कृतमेव विद्धि; स्थानं तथा निःसरणं च तेषाम् ||
३६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
आरोहणो निरोहश्च शैलहारी महातपाः ||
१२१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
श्वशुर उवाच
आरोहत यथाकामं धर्मोऽस्मि द्विज पश्य माम् ||
८० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
आरोहति महद्यानं हंससारसवाहनम् ||
४४ ग
वन पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
आरोहतु भवाञ्शीघ्रं रथमिन्द्रस्य संमतम् ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
आरोहन्दमय़ंश्चैव क्रीडंश्च परिधावति ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३३
वैशम्पाय़न उवाच
आरोहमाणा भीष्मस्य पादौ जगृहुरार्तवत् ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५१
भीष्म उवाच
आरोहमाणांस्त्रिदिवं मत्स्यांश्च भरतर्षभ ||
४१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
आरोहिष्ये कथं त्वश्वं कथं यास्यामि वै पुरम् |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७२
धृतराष्ट्र उवाच
आरोहे पर्यवस्कन्दे सरणे सान्तरप्लुते |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८९
धृतराष्ट्र उवाच
आरोहे पर्यवस्कन्दे सरणे सान्तरप्लुते |
५ क
विराट पर्व
अध्याय
४
धौम्य उवाच
आरोहेत्संमतोऽस्मीति स राजवसतिं वसेत् ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९३
सञ्जय़ उवाच
आरोहय़द्धय़ं तूर्णं भ्राता दुःशासनस्तदा ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०६
भगीरथ उवाच
आर्काय़णैः षोडशभिश्च व्रह्मं; स्तेषां फलेनेह न चागतोऽस्मि ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
आर्क्षे संवरणे राजन्प्रशासति वसुन्धराम् |
३१ क
वन पर्व
अध्याय
१२५
लोमश उवाच
आर्चीकपर्वतश्चैव निवासो वै मनीषिणाम् |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
१२५
लोमश उवाच
आर्चीकपर्वते तेपुस्तान्यजस्व युधिष्ठिर ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
आर्चीको जनय़ामास जमदग्निः सुदारुणम् |
२९ क
विराट पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
आर्च्छेतां वहुसंरव्धौ केशाकेशि नखानखि ||
१५ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
आर्छत्पार्थो गुरुं भारं सर्वभारसहो युधि ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
आर्छेतामर्जुनं सङ्ख्ये भ्रातरौ वृषकाचलौ ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२३
भीष्म उवाच
आर्जवं चैव राजेन्द्र निश्चितं धर्मलक्षणम् ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३०
महेश्वर उवाच
आर्जवं धर्म इत्याहुरधर्मो जिह्म उच्यते |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
११८
भीष्म उवाच
आर्जवं प्रकृतिं सत्त्वं कुलं वृत्तं श्रुतं दमम् ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३५
विदुर उवाच
आर्जवं प्रतिपद्यस्व पुत्रेषु सततं विभो |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८५
विदुर उवाच
आर्जवं प्रतिपद्यस्व मा वाल्याद्वहुधा नशीः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६०
भीष्म उवाच
आर्जवं भृत्यभरणं नवैते सार्ववर्णिकाः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५६
भीष्म उवाच
आर्जवं सर्वकार्येषु श्रय़ेथाः कुरुनन्दन |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७४
भीष्म उवाच
आर्जवे च तथा शूराः शमे वर्तन्ति मानवाः ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
२०३
व्याध उवाच
आर्जवे वर्तमानस्य व्राह्मण्यमभिजाय़ते |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१२
भीष्म उवाच
आर्जवेणैव गन्तव्यं न सुखान्वेषिणा पथा |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७२
भीष्म उवाच
आर्जवेन च सम्पन्नो धृत्या वुद्ध्या च भारत |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३९
विदुर उवाच
आर्जवेन नरं युक्तमार्जवात्सव्यपत्रपम् |
४९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
आर्जवेनागतं दृष्ट्वा राजपुत्रं शिखण्डिनम् |
५० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३४२
भीष्म उवाच
आर्जवेनापरे युक्ता निहतानार्जवैर्जनैः |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१५
प्रह्राद उवाच
आर्जवेनाप्रमादेन प्रसादेनात्मवत्तय़ा |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
आर्जवेनाभिगन्तव्या विनाशाय़ ह्यनार्जवम् ||
७४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३४८
नागभार्यो उवाच
आर्जवेनाभिजानामि नासौ देवोऽनिलाशन |
५ क