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अनुशासन पर्व
अध्याय १३०
महेश्वर उवाच
आर्जवेनेह संय़ुक्तो नरो धर्मेण युज्यते ||
३० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९४
भीष्म उवाच
आर्जवेनैव युद्धेन योद्धव्य इतरो जनः |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय १९५
वैशम्पाय़न उवाच
आर्जवेनैव युद्धेन विजेष्यामो वय़ं परान् ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
आर्जवेनैव युद्धेन वीर वर्षशतैरपि ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३०
महेश्वर उवाच
आर्जवो भुवने नित्यं वसत्यमरसंनिधौ |
३१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
आर्जुनिं कोसलेन्द्रस्तु विद्ध्वा पञ्चभिराय़सैः |
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
आर्जुनिं तु ततस्तूर्णं द्रौणिर्विव्याध पत्रिणा |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
आर्जुनिं प्रति सङ्क्रुद्धो द्रोणं दृष्ट्वा स्मय़न्निव ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३७
धृतराष्ट्र उवाच
आर्जुनिं मामकाः सर्वे के त्वेनं समवाकिरन् ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
आर्जुनिं रथवंशेन समन्तात्पर्यवारय़न् ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
आर्जुनिं शरवर्षेण समन्तात्पर्यवारय़न् ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
धृतराष्ट्र उवाच
आर्जुनिं समरे शूरं विनिघ्नन्तं महारथम् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३४
सञ्जय़ उवाच
आर्जुनिः क्षत्रधर्मा च वृहत्क्षत्रश्च वीर्यवान् |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
आर्जुनिः शरजालेन छादय़ामास भारत ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७७
सञ्जय़ उवाच
आर्जुनिः समरे राजंस्तव पुत्रानय़ोधय़त् ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३७
सञ्जय़ उवाच
आर्जुनिः समरे शूरो मृदुपूर्वमय़ुध्यत ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
आर्जुनिः समरे सैन्यं तावकं संममर्द ह |
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
आर्जुनिः सात्यकिश्चैव यय़तुः सौवलं वलम् ||
३३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
आर्जुनिर्नृपतिं विद्ध्वा शरैः संनतपर्वभिः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
आर्जुनिर्व्यचरद्व्योम्नि भृशं वै पक्षिराडिव ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
आर्जुनिश्चित्रसेनेन विद्धो वहुभिराशुगैः |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
आर्जुनिस्तस्य समरे हय़ान्हत्वा महारथः |
६७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
आर्जुनिस्तु हय़ांस्तस्य चतुर्भिर्निशितैः शरैः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३७
सञ्जय़ उवाच
आर्जुनेः कर्म तद्दृष्ट्व प्रणेदुश्च समन्ततः |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५९
सञ्जय़ उवाच
आर्तं वातात्मजं दृष्ट्वा क्रोधेनाभिहतं भृशम् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७३
भीष्म उवाच
आर्तः स पतितः क्रुद्धस्त्यक्त्वात्मानमथाव्रवीत् |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय ३५
वैशम्पाय़न उवाच
आर्तनादं ततश्चक्रे तौ तु शुश्रुवतुर्मुनी ||
२६ ख
शल्य पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
आर्तनादं महच्चक्रे श्रुत्वा विनिहतं नृपम् ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
आर्तनादं रणे चक्रुर्गर्जन्तो जलदा इव ||
३३ ख
वन पर्व
अध्याय १०५
लोमश उवाच
आर्तनादमकुर्वन्त वध्यमानानि सागरैः ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६६
भीष्म उवाच
आर्तनादश्च सुमहानभूत्तस्य निवेशने ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६२
सञ्जय़ उवाच
आर्तनादस्वनवतीं पताकावस्त्रफेनिलाम् |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
आर्तनादान्विकुर्वाणा विद्रवन्ति दिशो दश ||
२७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
आर्तनादो महांस्तत्र प्रेतानामिव सम्प्लवे ||
४२ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
आर्तनादो महानासीत्स्त्रीणां भरतसत्तम ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
आर्तप्रलापांश्च वहून्मनुजाधिपसत्तम ||
२ ग
शल्य पर्व
अध्याय ३०
युधिष्ठिर उवाच
आर्तप्रलापान्मा तात सलिलस्थः प्रभाषथाः |
५१ क
सभा पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
आर्तवाक्यं तु तत्तस्य प्रणय़ोक्तं निशम्य सः |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय १५०
युधिष्ठिर उवाच
आर्तस्य व्राह्मणस्यैवमनुक्रोशादिदं कृतम् |
२६ ख
मौसल पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
आर्तस्यार्ततरः पार्थः पादौ जग्राह भारत ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
आर्तस्वरं सादिपदातिय़ूनां; विषाणगात्रावरताडितानाम् ||
१९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
आर्तस्वरं हन्यमानं हतं च; विकीर्णकेशास्थिकपालसङ्घम् |
५७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
आर्तस्वरेण महता पुत्रं ते पर्यवारय़न् ||
६९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३१
महेश्वर उवाच
आर्तहस्तप्रदो नित्यं प्रजा धर्मेण पालय़न् |
३६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११८
भीष्म उवाच
आर्तहस्तप्रदो नित्यमाप्तंमन्यो नय़े रतः ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२८
महेश्वर उवाच
आर्तहस्तप्रदो राजा प्रेत्य चेह महीय़ते |
५२ क
वन पर्व
अध्याय २३१
वैशम्पाय़न उवाच
आर्ता दीनस्वराः सर्वे युधिष्ठिरमुपागमन् ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय १२८
लोमश उवाच
आर्ता निपेतुः सहसा पृथिव्यां कुरुनन्दन |
५ ख
सभा पर्व
अध्याय ६०
दुर्योधन उवाच
आर्ता प्रदुद्राव यतः स्त्रिय़स्ता; वृद्धस्य राज्ञः कुरुपुङ्गवस्य ||
२१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २०
गान्धार्यु उवाच
आर्ता वाला पतिं वीरं शोच्या शोचत्यनिन्दिता ||
४ ख