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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६६
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जीवय़ैनं दुर्धर्ष मृतं त्वमभिमन्युजम् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय १७५
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्ज्ञा मुमोह सहसा वरदानेन तस्य ह ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय २८१
मार्कण्डेय़ उवाच
सञ्ज्ञां च सत्यवाँल्लव्ध्वा सावित्रीमभ्यभाषत |
६२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
सञ्ज्ञां चैवालभद्वीरः कालं सञ्चिन्त्य भारत |
८७ क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
सञ्ज्ञां नोपलभे सूत मनो विह्वलतीव मे ||
१५९ ख
वन पर्व
अध्याय २४७
देवदूत उवाच
सञ्ज्ञामोहश्च पततां रजसा च प्रधर्षणम् |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०५
याज्ञवल्क्य उवाच
सञ्ज्ञालोपो निरूष्मत्वं सद्योमृत्युनिदर्शनम् ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्ज्ञाश्च विविधास्तास्तास्तेषां चक्रे युधिष्ठिरः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्ज्ञैषा लौकिकी राजन्न हिनस्ति न हन्यते ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२९
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़ं च महाभागमृषींश्चैव तपोधनान् |
१३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़ं च महामात्रं कृपं चापि महारथम् |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
सञ्जय़ं प्रेषय़ामास शमार्थं पाण्डवान्प्रति |
१४० क
शान्ति पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़ं योजय़ामास ऋद्धमृद्धैर्गुणैर्युतम् ||
१० ख
स्त्री पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़ं योजय़ेत्युक्त्वा विदुरं प्रत्यभाषत ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़ं संशितात्मानमपृच्छद्भरतर्षभ ||
२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़ः कुशली चाय़ं कच्चिन्नु तपसि स्थितः ||
१४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४५
नारद उवाच
सञ्जय़ः षष्ठभक्तेन वर्तय़ामास भारत ||
१४ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़ः सुहृदश्चान्ये द्वाःस्था ये चास्य संमताः |
३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़श्च महामात्रः सूतो गावल्गणिस्तथा ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
सञ्जय़श्च महामात्रो विद्वान्गावल्गणिर्वशी ||
२१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़श्चेतनां लव्ध्वा प्रत्याश्वस्येदमव्रवीत् |
१३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४५
नारद उवाच
सञ्जय़स्तं तथा दृष्ट्वा प्रदक्षिणमथाकरोत् |
२९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४५
नारद उवाच
सञ्जय़स्तु महामात्रस्तस्माद्दावादमुच्यत |
३२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़स्त्वदनुध्यानात्पूतः स्वर्गमवाप्स्यति ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़स्य वचः श्रुत्वा प्रज्ञाचक्षुर्नरेश्वरः |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७१
भगवानु उवाच
सञ्जय़स्य श्रुतं वाक्यं भवतश्च श्रुतं मय़ा |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४९
धृतराष्ट्र उवाच
सञ्जय़ाचक्ष्व केनास्मान्पाण्डवा अभ्ययुञ्जत |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
धृतराष्ट्र उवाच
सञ्जय़ाचक्ष्व तत्त्वेन परं कौतूहलं हि मे ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १५
धृतराष्ट्र उवाच
सञ्जय़ाचक्ष्व मे वीरं येन शर्म न विद्महे ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५०
धृतराष्ट्र उवाच
सञ्जय़ाचक्ष्व मे शूरं भीमसेनममर्षणम् ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
सञ्जय़ाधिरथो वीरः सिंहद्विरदविक्रमः |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़े प्रतिय़ाते तु धर्मराजो युधिष्ठिरः |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५८
वासुदेव उवाच
सञ्जय़ेदं वचो व्रूय़ा धृतराष्ट्रं मनीषिणम् |
१८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४५
नारद उवाच
सञ्जय़ेन च सूतेन साग्निहोत्रः सय़ाजकः ||
११ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
सञ्जय़ेनाथ गान्धार्या तदिदं तप्यतेऽद्य माम् ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़ेमे महीपालाः शूरा युद्धाभिनन्दिनः |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८९
धृतराष्ट्र उवाच
सञ्जय़ैकरथेनैव युय़ुधाने च मामकम् ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
सञ्जय़ैवङ्गते प्राणांस्त्यक्तुमिच्छामि माचिरम् |
१६१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३२
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़ो द्रौपदीं चैव सर्वाश्चान्याः कुरुस्त्रिय़ः ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३२
विदुरो उवाच
सञ्जय़ो नामतश्च त्वं न च पश्यामि तत्त्वय़ि |
७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४५
नारद उवाच
सञ्जय़ो नृपतेर्नेता समेषु विषमेषु च |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़ो मुनिकल्पस्तु जज्ञे सूतो गवल्गणात् |
८२ क
वन पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़ो वाढमित्युक्त्वा प्राद्रवत्काम्यकं वनम् ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३३
धृतराष्ट्र उवाच
सञ्जय़ो विदुर प्राप्तो गर्हय़ित्वा च मां गतः |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़ोऽप्यरुदत्तत्र दृष्ट्वा राजानमातुरम् |
४६ क
कर्ण पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़ोऽहं क्षितिपते कच्चिदास्ते सुखं भवान् |
२९ क
शल्य पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़ोऽहं नरव्याघ्र नमस्ते भरतर्षभ |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
सञ्जय़ोऽहं भूमिपते नमस्ते; प्राप्तोऽस्मि गत्वा नरदेव पाण्डवान् |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
सञ्जय़ोऽहं महाराज नमस्ते भरतर्षभ |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३२
द्वाःस्थ उवाच
सञ्जय़ोऽय़ं भूमिपते नमस्ते; दिदृक्षय़ा द्वारमुपागतस्ते |
४ क