उद्योग पर्व
अध्याय
१३९
कर्ण उवाच
आवाहाश्च विवाहाश्च सह सूतैः कृता मय़ा ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४४
भीष्म उवाच
आवाह्यमावहेदेवं यो दद्यादनुकूलतः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
११३
वैशम्पाय़न उवाच
आवाहय़ामि कं देवं व्रूहि तत्त्वविदां वर |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७७
भीष्म उवाच
आविकं चर्म च समं यस्य स्यान्मुक्त एव सः ||
३५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
आविकं चौष्ट्रिकं चैव क्षीरं गार्दभमेव च |
३९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८४
धृतराष्ट्र उवाच
आविकं वहु सुस्पर्शं पार्वतीय़ैरुपाहृतम् |
९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७
संवर्त उवाच
आविक्षित शुभा वुद्धिर्धीय़तां तव कर्मसु |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
आविक्षितं मरुत्तं मे मृतं सृञ्जय़ शुश्रुहि |
१६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६
व्यास उवाच
आविक्षितं महाराज वाचा सञ्जीवय़न्निव ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०
वैशम्पाय़न उवाच
आविक्षितः पार्थिवो वै मरुत्तः; स्वृद्ध्या मर्त्यो योऽजय़द्देवराजम् |
१३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१०
इन्द्र उवाच
आविक्षितस्य तु वलं न मृष्ये; वज्रमस्मै प्रहरिष्यामि घोरम् ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
आविक्षितस्य वै सत्रे विश्वे देवाः सभासदः |
१९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६
व्यास उवाच
आविक्षितो महीपालः संवर्तमुपशिक्षितुम् ||
३० ख
शल्य पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
आविग्नं च वलं सर्वं गदाहस्ते वृकोदरे ||
२९ ग
शल्य पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
आविग्नं त्रिदिवं सर्वं कारणं च न वुध्यते ||
३६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
आविग्नमनसः सर्वे वभूवुर्भरतर्षभ ||
५७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६२
सञ्जय़ उवाच
आविग्नमभवत्सर्वं कौरवाणां महद्वलम् |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
आविद्धनरनागाश्वं पतितध्वजकूवरम् |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
आविद्धरथनागाश्वं पतितध्वजकूवरम् |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
आविद्धा सर्ववेगेन भीमेन महती गदा |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय
२१७
वैशम्पाय़न उवाच
आविद्धाविव दृश्येते रथिनौ तौ रथोत्तमौ ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६८
सञ्जय़ उवाच
आविध्य च गदां गुर्वीं भीमां काञ्चनमालिनीम् |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
आविध्य व्यसृजत्तूर्णं ज्वलन्तमिव पन्नगम् ||
३३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
आविध्यत गदां गुर्वीं प्रहारं तमचिन्तय़न् ||
२४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
आविध्यत गदां राजन्समुद्दिश्य सुतं तव ||
५२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
आविध्यतो गदां तस्य कौन्तेय़स्य महात्मनः |
१७ क
शल्य पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
आविध्यतो गदां तस्य भीमसेनस्य संय़ुगे |
१३ क
सभा पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
आविध्यदजिनं कृष्णं भविष्यद्भूतजल्पकः |
७ क
शल्य पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
आविध्यन्तं गदां दृष्ट्वा भीमसेनं तवात्मजः |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
आविध्यन्तमभिप्रेक्ष्य धार्तराष्ट्रोऽथ पाण्डवम् |
१४ क
शल्य पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
आविध्यन्नुत्तरीय़ाणि सिंहनादांश्च नेदिरे |
४ क
मौसल पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
आविध्याविध्य ते राजन्प्रक्षिपन्ति स्म यत्तृणम् |
३९ क
वन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
आविध्याविध्य तौ वृक्षान्मुहूर्तमितरेतरम् |
५० क
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
आविवेश ततस्तीव्रं तावकानां महद्भय़म् |
६५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
द्रौणिरु उवाच
आविवेश ददौ चास्मै विमलं खड्गमुत्तमम् ||
६४ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
आविवेश रविं कर्णः पितरं पुरुषर्षभ |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
२१४
वैशम्पाय़न उवाच
आविवेशतुरापूर्णं रत्नैरुच्चावचैः शुभैः |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय
४६
वैशम्पाय़न उवाच
आविशद्भिस्तदा राजञ्शूरैः परिघवाहुभिः |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
१८
सूत उवाच
आविशध्वं हय़ं क्षिप्रं दासी न स्यामहं यथा |
७ क
वन पर्व
अध्याय
२१९
मार्कण्डेय़ उवाच
आविशन्ति च यं यक्षाः पुरुषं कालपर्यये |
५१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
आविश्य प्रदिशः सर्वाः पुनरेव व्युपारमत् ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
आविश्य योगेनात्मानं त्रीणि वर्षशतान्यपि ||
६० ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२३
गान्धार्यु उवाच
आविश्य शेते भगवान्स्कन्दः शरवणं यथा ||
१८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१९
गान्धार्यु उवाच
आविश्य शय़ने शेते पुनः सत्पुरुषोचितम् ||
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१७
सिद्ध उवाच
आविश्य हृदय़ं जन्तोः सत्त्वं चाशु रुणद्धि वै |
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७२
भीष्म उवाच
आविश्यमाने दैत्ये तु ज्वरेणाथ महासुरे |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
व्यास उवाच
आविश्येमां धरणीं येऽभ्यरक्ष; न्पुरा पुराणां तव देव सृष्टिम् ||
६६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
आविश्येमां धरणीं येऽभ्यरक्ष; न्पुरातनीं तस्य देवस्य सृष्टिम् ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
आविष्कृतवलं कर्णं ज्ञात्वा राजा तु मागधः |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
आविष्ट इव मद्रेशो मन्युना पौरुषेण च |
२४ क