वन पर्व
अध्याय
७०
वृहदश्व उवाच
अवसं त्वय़ि राजेन्द्र सुदुःखमपराजित |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय
३७
कृश उवाच
अवसक्तः पितुस्तेऽद्य मृतः स्कन्धे भुजङ्गमः ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
३८
सूत उवाच
अवसक्तो धनुष्कोट्या स्कन्धे भरतसत्तम |
१८ ख
विराट पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
अवसत्परिचारार्हा सुदुःखं जनमेजय़ ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
८२
वैशम्पाय़न उवाच
अवसत्पृथिवीपालो दीर्घकालमिति श्रुतिः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३२
वैशम्पाय़न उवाच
अवसत्स महातेजा नारदो भगवानृषिः |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७०
सञ्जय़ उवाच
अवसत्स्याम्यसलिले सगणो द्रौणिगोष्पदे ||
२९ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
अवसद्द्वारकामेत्य वृष्णिभिः परमार्चितः ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
अवसद्यो महद्द्युम्नि प्रार्थय़न्नागमुख्यताम् |
१४६ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१४
वैशम्पाय़न उवाच
अवसन्पृथिवीपालांस्त्रासय़न्तः स्वतेजसा ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४४
वासुदेव उवाच
अवसन्मद्गृहे तात व्राह्मणो हरिपिङ्गलः |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७०
युधिष्ठिर उवाच
अवसानं च गोविन्द किञ्चिदेवात्र पञ्चमम् ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३१
युधिष्ठिर उवाच
अवसानं भवेदत्र किञ्चिदेव तु पञ्चमम् ||
१९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
अवसानं महावाहो किञ्चिदेव तु पञ्चमम् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३९
भीष्म उवाच
अवसीदन्ति मे प्राणाः स्मृतिर्मे नश्यति क्षुधा |
४८ क
वन पर्व
अध्याय
३३
द्रौपद्यु उवाच
अवसीदेत्सुदुर्वुद्धिरामो घट इवाम्भसि ||
१२ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
अवस्कन्दं करिष्यामि शिविरस्याद्य दुष्करम् ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५०
वैशम्पाय़न उवाच
अवस्कन्द्याथ वाहेभ्यः संय़म्य प्रचलं मनः |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२२२
वैशम्पाय़न उवाच
अवस्करे चिरस्थानं निष्कुटेषु च वर्जय़े ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६७
सञ्जय़ उवाच
अवस्थां तादृशीं प्राप्य हते द्रोणे द्रुतं वलम् |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
अवस्थाने मतिं कृत्वा पुत्रस्तव महामनाः |
४१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
अवस्थाप्य नरश्रेष्ठः सर्वाः स्वप्रकृतीस्तदा ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
अवस्थाप्य वनद्वारि सेनामिदमुवाच सः ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
२७१
मार्कण्डेय़ उवाच
अवस्थाप्याथ सौमित्रिं सङ्क्रुद्धावभ्यधावताम् ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
अवस्थाय़ामवस्थाय़ां दीपस्येवार्चिषो गतिः ||
१२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
अवस्थितं च प्रणिपत्य कृष्णं; प्रीतोऽर्जुनः काञ्चनचित्रमाली |
९९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
अवस्थितं रणे ज्ञात्वा पाण्डवास्त्वां महारथम् |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
अवस्थितास्तदा योधाः प्रार्थय़न्तो महद्यशः ||
३८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५६
भीष्म उवाच
अवस्थितेन नित्यं च सत्येनामत्सरी भवेत् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
अवस्फूर्जन्दिशः सर्वास्तलनेमिस्वनेन च ||
१४ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
अवस्रष्टा कुरुषूद्वृत्तचेता; स्तदा युद्धं धार्तराष्ट्रोऽन्वतप्स्यत् ||
१२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
अवहच्छोणितोन्मिश्रं तोय़ं संवत्सरं तदा ||
३७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३८
वैशम्पाय़न उवाच
अवहत्तत्र पृष्ठेन रोधःसु विषमेषु च ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
अवहत्सर्वमाल्यानि गन्धवन्ति शुभानि च ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७९
भीष्म उवाच
अवहन्मां भृशं राजन्मनोमारुतरंहसः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
११८
वैशम्पाय़न उवाच
अवहन्यानमुख्येन सह माद्र्या सुसंवृतम् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
अवहन्रथमुख्यानामय़ुतानि चतुर्दश ||
५९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
अवहसदवमन्य वीर्यवा; न्प्रतिषिषिधे च जगाद चोत्तरम् ||
६१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५२
कुरुरु उवाच
अवहस्य ततः शक्रो जगाम त्रिदिवं प्रभुः |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
२७
सूत उवाच
अवहस्यात्यगाच्छीघ्रं लङ्घय़ित्वावमन्य च ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
अवहारं ततः कृत्वा भारद्वाजस्य संमते |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
अवहारं ततः कृत्वा सहिताः कुरुपाण्डवाः |
७९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
अवहारं ततश्चक्रे पिता देवव्रतस्तव |
३५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
अवहारमकुर्वन्त सैन्यानां भरतर्षभ ||
६३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
अवहारमथो चक्रे तावकानां महारथः ||
४२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
अवहासं तु तं पार्थो नामृष्यत वृकोदरः |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
अवहासं तु तं मत्वा पुत्रो दुर्योधनस्तव |
४२ क
शल्य पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
अवहासस्य वोऽस्याद्य प्रतिवक्तास्मि पाण्डवाः |
४४ क
आदि पर्व
अध्याय
१७९
वैशम्पाय़न उवाच
अवहास्या भविष्यन्ति व्राह्मणाः सर्वराजसु |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०४
सञ्जय़ उवाच
अवहास्योऽस्य लोकस्य भविष्यसि मय़ा सह ||
५२ ख