विराट पर्व
अध्याय
१९
द्रौपद्यु उवाच
आसे कालमुपासीना सर्वं दुःखं किलार्तवत् ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५८
वैशम्पाय़न उवाच
आसेदुः पुरुषव्याघ्रा गङ्गाय़ां पाण्डुनन्दनाः ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
१७४
वैशम्पाय़न उवाच
आसेदुरत्यर्थमनोरमं वै; तमाश्रमाग्र्यं वृषपर्वणस्ते ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
आसेवन्निममध्याय़ं नरः पापात्प्रमुच्यते ||
१९८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
आसैन्धववधाद्राजन्सुदृढेनान्तरात्मना ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
आस्तां ते स्तिमिते सेने रक्ष्यमाणे परस्परम् |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
२१०
वैशम्पाय़न उवाच
आस्तां प्रिय़सखाय़ौ तौ नरनाराय़णावृषी ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४
सूत उवाच
आस्तां भगिन्यौ रूपेण समुपेतेऽद्भुतेऽनघे ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११३
भीष्म उवाच
आस्ताथ वर्षमभ्यागात्सुमहत्प्लावय़ज्जगत् ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय
२००
वैशम्पाय़न उवाच
आस्तामवध्यावन्येषां त्रिषु लोकेषु विश्रुतौ ||
१८ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
आस्तामृषिवरौ तत्र ज्वलिताविव पावकौ ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
२१९
मार्कण्डेय़ उवाच
आस्तिकं श्रद्दधानं च वर्जय़न्ति सदा ग्रहाः ||
५७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
आस्तिकः सततं शृण्वन्न कृच्छ्रेष्ववसीदति ||
१९९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६१
वैशम्पाय़न उवाच
आस्तिका नास्तिकाश्चैव निय़ताः संय़मे परे |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
१९८
व्याध उवाच
आस्तिका मानहीनाश्च द्विजातिजनपूजकाः |
७७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
आस्तिकाः श्रद्दधानाश्च वहुभिर्जन्मभिः स्तवैः ||
१५६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३६
व्यास उवाच
आस्तिके श्रद्दधाने तु विधिरेष विधीय़ते ||
४२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८७
पराशर उवाच
आस्तिक्यव्यवसाय़ाभ्यामुपाय़ाद्विस्मय़ाद्धिय़ा |
४२ क
आदि पर्व
अध्याय
४९
वासुकिरु उवाच
आस्तीक परिघूर्णामि हृदय़ं मे विदीर्यते |
२२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४३
सूत उवाच
आस्तीक विविधाश्चर्यो यज्ञोऽय़मिति मे मतिः |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
१३
सूत उवाच
आस्तीकं च सुतं प्राप्य धर्मं चानुत्तमं मुनिः |
४४ क
आदि पर्व
अध्याय
५३
सूत उवाच
आस्तीकं प्रेषय़ामास गृहानेव सुसत्कृतम् |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
४८
सूत उवाच
आस्तीकः किल यज्ञं तं वर्तन्तं भुजगोत्तमे |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय
५३
सूत उवाच
आस्तीकः सत्यसन्धो मां पन्नगेभ्योऽभिरक्षतु ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३
शौनक उवाच
आस्तीकश्च द्विजश्रेष्ठः किमर्थं जपतां वरः |
२ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
आस्तीकश्चाभवत्प्रीतः परिमोक्ष्य भुजङ्गमान् ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय
५३
सूत उवाच
आस्तीकस्तिष्ठ तिष्ठेति वाचस्तिस्रोऽभ्युदैरय़त् ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४
शौनक उवाच
आस्तीकस्य कवेः साधोः शुश्रूषा परमा हि नः ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
५३
सूत उवाच
आस्तीकस्य कवेर्विप्र श्रीमच्चरितमादितः ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३
सूत उवाच
आस्तीकस्य पिता ह्यासीत्प्रजापतिसमः प्रभुः |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
१३
शौनक उवाच
आस्तीकस्य पुराणस्य व्राह्मणस्य यशस्विनः ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
५३
सूत उवाच
आस्तीकस्य वरे दत्ते तथैवोपरराम च ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
११
डुण्डुभ उवाच
आस्तीकाद्द्विजमुख्याद्वै सर्पसत्रे द्विजोत्तम ||
१७ ग
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
आस्तीके सर्वनागानां गरुडस्य च सम्भवः |
७३ क
आदि पर्व
अध्याय
१२
रुरुरु उवाच
आस्तीकेन तदाचक्ष्व श्रोतुमिच्छाम्यशेषतः ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
५१
सूत उवाच
आस्तीकेनैवमुक्तस्तु राजा पारिक्षितस्तदा |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
१३
सूत उवाच
आस्तीको नाम पुत्रश्च तस्यां जज्ञे महात्मनः ||
३७ ख
आदि पर्व
अध्याय
३४
व्रह्मो उवाच
आस्तीको नाम यज्ञं स प्रतिषेत्स्यति तं तदा |
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
आस्तीर्णा वसुधा सर्वा शूराणामनिवर्तिनाम् ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
आस्तीर्णा सम्वभौ सर्वा प्रेतीभूतैः समन्ततः ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
आस्तीर्य वसुधां पार्थ क्षिप्रमाय़ाति सात्यकिः ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५३
अर्जुन उवाच
आस्तीर्यमाणां पृथिवीं द्रष्टासि श्वो मय़ा युधि ||
४५ ख
वन पर्व
अध्याय
२२०
मार्कण्डेय़ उवाच
आस्ते गिरौ निपतितं मिञ्जिकामिञ्जिकं यतः ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
आस्ते गुरुः प्रय़शाः सर्वराज्ञां; पश्चाच्चमूमिन्द्र इवाभिरक्षन् ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
९४
लोमश उवाच
आस्ते तेजस्विनी कन्या रोहिणीव दिवि प्रभो ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
१२९
लोमश उवाच
आस्ते देवर्षिमुख्येन संवर्तेनाभिपालितः ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
आस्ते देव्या सहाचिन्त्यो यं प्रार्थय़सि शत्रुहन् ||
५१ ग
सभा पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
आस्ते ध्याय़न्नधोवक्त्रो निःश्वसन्पन्नगो यथा ||
४० ख
वन पर्व
अध्याय
३६
भीमसेन उवाच
आस्ते परमसन्तप्तो नूनं सिंह इवाशय़े ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
आस्ते परिघवाहुः स मध्यमः पाण्डवोऽच्युत |
२८ क