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शान्ति पर्व
अध्याय १३९
भीष्म उवाच
आहारान्वेषणे युक्तः परं यत्नं समास्थितः ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय १३१
राजो उवाच
आहारार्थं समारम्भस्तव चाय़ं विहङ्गम |
१५ क
वन पर्व
अध्याय १३१
श्येन उवाच
आहारेण विवर्धन्ते तेन जीवन्ति जन्तवः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय १९७
मार्कण्डेय़ उवाच
आहारेणाथ भक्ष्यैश्च वाक्यैः सुमधुरैस्तथा ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०३
गरुड उवाच
आहारो विहितो धात्रा किमर्थं वार्यते त्वय़ा ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२१
भीष्म उवाच
आहार्यं चाष्टकैर्द्रव्यैर्वलमन्यद्युधिष्ठिर ||
४२ ख
मौसल पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
आहार्यमाणे कृमय़ो व्यदृश्यन्त नराधिप ||
१२ ख
सभा पर्व
अध्याय ४८
दुर्योधन उवाच
आहार्षुः क्षत्रिय़ा वित्तं शतशोऽजातशत्रवे ||
१६ ख
सभा पर्व
अध्याय ४७
दुर्योधन उवाच
आहार्षुर्दशसाहस्रान्विनीतान्दिक्षु विश्रुतान् ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
आहारय़ोजनं चैव नित्यमास्तिक्यमेव च ||
६६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४८
भीष्म उवाच
आहिण्डिको निषादेन वैदेह्यां सम्प्रजाय़ते |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३८
विदुर उवाच
आहितं भारतैश्वर्यं त्वय़ा दुर्योधने महत् ||
४३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
आहिताग्निं सदाय़ज्ञं कृशभृत्यं प्रिय़ातिथिम् |
७३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२८
महेश्वर उवाच
आहिताग्निरधीय़ानो जुह्वानः संय़तेन्द्रिय़ः |
३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३१
महेश्वर उवाच
आहिताग्निरधीय़ानो व्रह्मभूय़ाय़ कल्पते ||
५६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८१
पराशर उवाच
आहिताग्निर्हि धर्मात्मा यः स पुण्यकृदुत्तमः |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३१
महेश्वर उवाच
आहिताग्निस्तथा यज्वा स शूद्रगतिभाग्भवेत् ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८४
देवा ऊचुः
आहिते ज्वलनेनाथ गर्भे तेजःसमन्विते |
५५ क
आदि पर्व
अध्याय १४५
व्राह्मण उवाच
आहुः केचित्परं मोक्षं स च नास्ति कथञ्चन |
२३ क
शल्य पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
आहुः केचिद्धते सूते प्रय़ातो यत्र सौवलः |
३८ क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
आहुः केचिन्न तस्यैते तस्यैत इति चापरे |
७४ क
आदि पर्व
अध्याय १७९
वैशम्पाय़न उवाच
आहुः परस्परं केचिन्निपुणा वुद्धिजीविनः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४७
भीष्म उवाच
आहुः षष्टिं भूतगुणान्वै; भूतविशिष्टा नित्यविषक्ताः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१७
वलिरु उवाच
आहुः सर्वमिदं चिन्त्यं जनाः केचिन्मनीषय़ा |
४७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२६
वैशम्पाय़न उवाच
आहुकः पुनरस्माभिर्ज्ञातिभिश्चापि सत्कृतः |
३८ क
वन पर्व
अध्याय २२
वासुदेव उवाच
आहुकस्य वचो वीर तस्यैव परिचारकः |
११ क
सभा पर्व
अध्याय १३
श्रीकृष्ण उवाच
आहुकस्य शतं पुत्रा एकैकस्त्रिशतावरः ||
५५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८४
धृतराष्ट्र उवाच
आहुकानामधिपतिः पुरोगः सर्वसात्वताम् |
२ क
वन पर्व
अध्याय १६
वासुदेव उवाच
आहुकेन सुगुप्ता च राज्ञा राजीवलोचन ||
२३ ख
सभा पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
आहुको विपृथुश्चैव गदः सारण एव च ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय २०९
मार्कण्डेय़ उवाच
आहुतिष्वेव यस्याग्नेर्हविषाज्यं विधीय़ते |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
आहुरन्योन्यमुक्तानि प्रव्रुवाणा मदोत्कटाः ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७१
भगवानु उवाच
आहुराश्रमिणः सर्वे यद्भैक्षं क्षत्रिय़श्चरेत् ||
३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४८
व्रह्मो उवाच
आहुरेके च विद्वांसो ये ज्ञाने सुप्रतिष्ठिताः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९०
भीष्म उवाच
आहुरेतज्जना व्रह्मन्न चैतच्छ्रद्दधाम्यहम् |
६ क
वन पर्व
अध्याय २३९
वैशम्पाय़न उवाच
आहुर्दैत्याश्च तां तत्र सुप्रीतेनान्तरात्मना |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२९
व्यास उवाच
आहुर्द्विवहुपादानि जङ्गमानि द्वय़ानि च |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१८
श्रीरु उवाच
आहुर्मां दुःसहेत्येवं विधित्सेति च मां विदुः ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
आहुश्चेमां परिषदं पुत्रास्ते भरतर्षभ |
४७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१७
वलिरु उवाच
आहुश्चैनं केचिदग्निं केचिदाहुः प्रजापतिम् |
५२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
आहुस्त्वां पाण्डवा राजन्नभिवाद्य प्रसाद्य च |
४० क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
आहुस्त्वां राजशार्दूल मुख्यं सर्वधनुष्मताम् |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३२
अर्जुन उवाच
आहुस्त्वामृषय़ः सर्वे देवर्षिर्नारदस्तथा |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय ७१
वैशम्पाय़न उवाच
आहूतः प्रादुरभवत्कचोऽरिष्टोऽथ विद्यया |
३१ ख
वन पर्व
अध्याय २१२
मार्कण्डेय़ उवाच
आहूतः सर्वभूतानां हव्यं वहति सर्वदा ||
१९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १२
धृतराष्ट्र उवाच
आहूतश्चाप्यथो याय़ादनृतावपि पार्थिवः ||
१३ ख
सभा पर्व
अध्याय ४५
शकुनिरु उवाच
आहूतश्चैष्यति व्यक्तं दीव्यावेत्याह्वय़स्व तम् ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
आहूतस्तैर्नरव्याघ्रैः पार्थः परपुरञ्जय़ः |
३८ क
आदि पर्व
अध्याय १९९
वैशम्पाय़न उवाच
आहूता धृतराष्ट्रेण राज्ञा शान्तनवेन च ||
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
आहूता वलवद्भिर्हि तत्र तत्र सरस्वती ||
३ ख