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उद्योग पर्व
अध्याय १७२
भीष्म उवाच
आगताहं महावाहो त्वामुद्दिश्य महाद्युते ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय ११६
अकृतव्रण उवाच
आगताय़ च रामाय़ तदाचष्ट पिता स्वय़म् |
२२ क
वन पर्व
अध्याय ७८
वृहदश्व उवाच
आगताय़ां तु वैदर्भ्यां सपुत्राय़ां नलो नृपः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
आगतिश्च गतिश्चैव पूर्वं ते कथिता मय़ा |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
आगतिश्च गतिश्चैव लोकस्य विदिता तव |
६ क
वन पर्व
अध्याय २४१
वैशम्पाय़न उवाच
आगते हास्तिनपुरं मोक्षिते पाण्डुनन्दनैः |
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४१
भीष्म उवाच
आगतेऽथ गुरौ राजन्विपुलः प्रिय़कर्मकृत् |
२९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
आगतो वहुवृत्तान्तं द्रष्टुमाय़ोधनं तदा |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
भीष्म उवाच
आगतो ह्याश्रमपदं पूजितश्च तपस्विभिः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय २९०
वैशम्पाय़न उवाच
आगतोऽस्मि वशं भद्रे तव मन्त्रवलात्कृतः |
१० क
वन पर्व
अध्याय ७१
वृहदश्व उवाच
आगतोऽस्मीत्युवाचैनं भवन्तमभिवादकः ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३४९
व्राह्मण उवाच
आगतोऽहं महाभाग तव दर्शनलालसः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय ६५
वैशम्पाय़न उवाच
आगतोऽहं महाभागमृषिं कण्वमुपासितुम् |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७७
वैशम्पाय़न उवाच
आगतोऽय़ं महावाहो तस्य मन्दस्य पौत्रकः |
३५ क
वन पर्व
अध्याय २८१
सत्यवानु उवाच
आगतौ स्वः पथा येन फलान्यवचितानि च |
१०६ क
वन पर्व
अध्याय ७४
वृहदश्व उवाच
आगत्य केशिनी क्षिप्रं दमय़न्त्यै न्यवेदय़त् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६
शल्य उवाच
आगत्य च ततस्तूर्णं तमाचष्ट वृहस्पतेः |
१२ क
वन पर्व
अध्याय १६२
वैशम्पाय़न उवाच
आगत्य च सहस्राक्षो रथादवरुरोह वै ||
५ ख
विराट पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
आगत्य भीमधन्वानं वीभत्सुं पर्यवारय़न् ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
भीष्म उवाच
आगत्य हेहय़ा भूय़ः पर्यधावन्त भारत ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५२
वैशम्पाय़न उवाच
आगन्तव्यं च भवता समय़े मम पार्थिव |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
आगन्तव्यं त्वय़ा काले सत्यमेतद्व्रवीमि ते ||
२ ग
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८३
वैशम्पाय़न उवाच
आगन्तव्यं परां चैत्रीमश्वमेधे नृपस्य नः ||
२७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८५
वैशम्पाय़न उवाच
आगन्तव्यं परां चैत्रीमश्वमेधे नृपस्य नः ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय २८४
वैशम्पाय़न उवाच
आगन्ता कुण्डलार्थाय़ कवचं चैव भिक्षितुम् ||
१४ ख
मौसल पर्व
अध्याय ७
वसुदेव उवाच
आगन्ता क्षिप्रमेवेह न मेऽत्रास्ति विचारणा ||
१४ ग
शान्ति पर्व
अध्याय १०७
मुनिरु उवाच
आगन्ता मद्गृहं तात वैदेहः सत्यसङ्गरः |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
आगन्ता हि महावाहुरानृशंस्यार्थमच्युतः ||
१४ ग
आदि पर्व
अध्याय १८९
व्यास उवाच
आगन्तारः पुनरेवेन्द्रलोकं; स्वकर्मणा पूर्वजितं महार्हम् |
२६ क
वन पर्व
अध्याय २४२
वैशम्पाय़न उवाच
आगन्तारस्तदा स्मेति वाच्यस्ते स सुय़ोधनः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
भीष्म उवाच
आगन्तुश्चानुरक्तोऽपि काममस्तु वहुश्रुतः |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय १३८
वैशम्पाय़न उवाच
आगमंस्ते वनोद्देशमल्पमूलफलोदकम् |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
आगमः क्रिय़तां व्यक्तं कुमारो वै सुतो मम |
२४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
आगमद्द्वारकावासी ममाप्तः पुरुषो नृप |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
आगमश्च परस्त्वत्तः सर्वेषां नः परन्तप |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
आगमश्च पुराणानां महर्षीणां च सम्भवः ||
८० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८
अश्मो उवाच
आगमस्तु सतां चक्षुर्नृपते तमिहाचर ||
५३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २११
भीष्म उवाच
आगमस्थः स भूय़िष्ठमात्मतत्त्वे न तुष्यति ||
५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
आगमा वः शिवाः सन्तु स्वस्था भवत पुत्रकाः |
४० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०७
भीष्म उवाच
आगमांस्त्वनतिक्रम्य दद्याच्चैव यजेत च ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८
अश्मो उवाच
आगमांस्त्वनतिक्रम्य श्रद्धातव्यं वुभूषता ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २११
भीष्म उवाच
आगमात्परमस्तीति व्रुवन्नपि पराजितः ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
आगमाधिगतो योगाद्वशी तत्त्वे प्रसीदति ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय ३२
युधिष्ठिर उवाच
आगमाननतिक्रम्य सतां वृत्तमवेक्ष्य च |
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
आगमानां हि सर्वेषामाचारः श्रेष्ठ उच्यते |
१४७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८६
भीष्म उवाच
आगमानुगमं कृत्वा वध्नीय़ान्मोक्षय़ेत वा ||
२४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३५
वैशम्पाय़न उवाच
आगमापाय़तत्त्वज्ञा कच्चिदेषा न शोचति ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २४
श्रीभगवानु उवाच
आगमापाय़िनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३३
महेश्वर उवाच
आगमाल्लोकधर्माणां मर्यादाः पूर्वनिर्मिताः |
६० क
वन पर्व
अध्याय २९२
वैशम्पाय़न उवाच
आगमाश्च तथा पुत्र भवन्त्वद्रोहचेतसः ||
११ ख