chevron_left  आय़ुष्मन्तंarrow_drop_down
शान्ति पर्व
अध्याय ३१
सृञ्जय़ उवाच
आय़ुष्मन्तं महाभागं देवराजसमद्युतिम् ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
आय़ुष्मन्तः सर्व एव व्रह्मभूता हि मे मताः ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
आय़ुष्मन्तो महावीरा धनुर्धरवरा युधि |
१० क
वन पर्व
अध्याय ६५
वृहदश्व उवाच
आय़ुष्मन्तौ कुशलिनौ तत्रस्थौ दारकौ च ते |
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
आय़ुष्मन्द्रवते सैन्यं कौरवेय़ं समन्ततः |
५० क
वन पर्व
अध्याय २०
वासुदेव उवाच
आय़ुष्मन्नुपदेशस्तु सारथ्ये वर्ततां स्मृतः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१८
नारद उवाच
आय़ुष्माञ्जाय़ते पुत्रः कथं प्रेतः पितैव सः ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय ७८
शुक्र उवाच
आय़ुष्मान्कीर्तिमांश्चैव वह्वपत्यस्तथैव च ||
४१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
युधिष्ठिर उवाच
आय़ुष्मान्केन भवति स्वल्पाय़ुर्वापि मानवः |
२ क
वन पर्व
अध्याय १९५
मार्कण्डेय़ उवाच
आय़ुष्मान्धृतिमांश्चैव श्रुत्वा भवति पर्वसु |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१
नारद उवाच
आय़ुष्मान्मे भवेत्पुत्रो भवतस्तपसा मुने |
१९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
आय़ुष्यं पाण्डुपुत्राणामाशास्ते स नराधिपः ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
आय़ुष्यं प्राङ्मुखो भुङ्क्ते यशस्यं दक्षिणामुखः |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय १४
सूत उवाच
आय़ुष्यमिदमाख्यानमास्तीकं कथय़ामि ते |
४ क
आदि पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
आय़ुष्यश्चैव पुण्यश्च धन्यः श्रुतिसुखावहः |
५३ क
सभा पर्व
अध्याय ५
नारद उवाच
आय़ुष्या च यशस्या च धर्मकामार्थदर्शिनी ||
९१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३९
विदुर उवाच
आय़ुष्याणि वुधाः प्राहुर्मित्राणां चाविमानना ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२४
भीष्म उवाच
आय़ूंषि चाशिषश्चैव वेदस्यैव च यत्फलम् ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४८
भीष्म उवाच
आय़ोगवीषु जाय़न्ते हीनवर्णासु ते त्रय़ः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८५
पराशर उवाच
आय़ोगाः करणा व्रात्याश्चण्डालाश्च नराधिप |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय ३
सञ्जय़ उवाच
आय़ोधनं चातिघोरं रुद्रस्याक्रीडसंनिभम् ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
आय़ोधनं जहुर्वीरा दृष्ट्वा तमतिमानुषम् ||
८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २०
गान्धार्यु उवाच
आय़ोधनशिरोमध्ये शय़ानं पश्य माधव ||
३२ ग
वन पर्व
अध्याय २३७
दुर्योधन उवाच
आय़ोधितास्तु गन्धर्वाः सुचिरं सोदरैर्मम |
२ क