कर्ण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
अभिषिक्तस्तु राधेय़ः प्रभय़ा सोऽमितप्रभः |
४३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३८
वासुदेव उवाच
अभिषिक्तस्य कौन्तेय़ कौन्तेय़ो धारय़िष्यति ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय
२६३
मार्कण्डेय़ उवाच
अभिषिक्तस्य वदनं सोमं साभ्रलवं यथा ||
३० ख
सभा पर्व
अध्याय
१७
कृष्ण उवाच
अभिषिक्ते जरासन्धे तदा राजा वृहद्रथः |
२२ क
शल्य पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
अभिषिक्ते ततस्तस्मिन्सिंहनादो महानभूत् |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
अभिषिक्ते तदा शल्ये तव सैन्येषु मानद |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
अभिषिक्तेन स ऋषिरभिषिक्तः पुरोहितः ||
३५ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
अभिषिक्तो महाप्राज्ञो राज्यं प्राप्य युधिष्ठिरः |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
अभिषिक्तो महाराज देवसेनापतिः सुरैः ||
९१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११६
युधिष्ठिर उवाच
अभिषिक्तो हि यो राजा राज्यस्थो मित्रसंवृतः |
५ क
आदि पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
अभिषिक्तोऽङ्गराज्ये स श्रिय़ा युक्तो महावलः ||
३६ ग
सभा पर्व
अध्याय
१७
कृष्ण उवाच
अभिषिच्य जरासन्धं मगधाधिपतिस्तदा |
२१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४६
वैशम्पाय़न उवाच
अभिषिच्य ततो देवा वरुणं यादसां पतिम् |
१० क
वन पर्व
अध्याय
१०६
लोमश उवाच
अभिषिच्य तु तं राज्ये दिलीपो वनमाश्रितः |
४० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
अभिषिच्य स पुत्राणां शतं राजा वनं गतः ||
२० ग
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
अभिषिच्य स्वराज्ये तु तं राजानं परिक्षितम् |
७ क
वन पर्व
अध्याय
२१८
शक्र उवाच
अभिषिच्यस्व चैवाद्य प्राप्तरूपोऽसि सत्तम ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
२१८
शक्र उवाच
अभिषिच्यस्व देवानां सेनापत्ये महावल |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय
५
दुर्योधन उवाच
अभिषिच्यस्व राजेन्द्र देवानामिव पावकिः |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११
शल्य उवाच
अभिषिच्यस्व राजेन्द्र भव राजा त्रिविष्टपे ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
अभिषिच्यैव नृपतिं श्रावय़ेदिममागमम् |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय
१२९
वैशम्पाय़न उवाच
अभिषिञ्चाम साध्वद्य सत्यं करुणवेदिनम् ||
७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
अभिषूय़ ततो राजन्सोमं सोमपसत्तमाः |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
अभिषेकं कुमारस्य दृष्ट्वा हृष्टा रणप्रिय़ाः |
१०७ क
शल्य पर्व
अध्याय
४६
जनमेजय़ उवाच
अभिषेकं कुमारस्य दैत्यानां च वधं तथा |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
अभिषेकं कुमारस्य प्रभावं च महात्मनः ||
५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४६
जनमेजय़ उवाच
अभिषेकं कुमारस्य विस्तरेण यथाविधि ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
अभिषेकं च यज्ञान्ते सर्वजित्तेन चोच्यते ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
अभिषेककृतस्तत्र निय़तो निय़ताशनः |
५६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
अभिषेकांश्च निय़मान्देवताय़तनेषु च |
१८ क
सभा पर्व
अध्याय
४९
दुर्योधन उवाच
अभिषेकार्थमव्यग्रा भाण्डमुच्चावचं नृपाः ||
४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
अभिषेकार्थमाजग्मुः शैलेन्द्रं सहितास्ततः ||
५० ख
आदि पर्व
अध्याय
२०६
वैशम्पाय़न उवाच
अभिषेकाय़ कौन्तेय़ो गङ्गामवततार ह ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
अभिषेकाय़ निष्क्रान्ते भृगौ धर्मभृतां वरे |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
२६१
मार्कण्डेय़ उवाच
अभिषेकाय़ रामस्य यौवराज्येन भारत |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
अभिषेक्तुकामं नृपतिं पूरुं पुत्रं कनीय़सम् |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
अभिषेक्ष्यति मां राज्ये स पाञ्चाल्यो यदा तदा ||
२९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
अभिषेचय़ राजानं धर्मात्मानं युधिष्ठिरम् |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
अभिषेचय़ सेनान्ये स्वय़मात्मानमात्मना ||
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१
सूत उवाच
अभिष्टुतः पिवसि च सोममध्वरे; वषट्कृतान्यपि च हवींषि भूतय़े ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२१
नारद उवाच
अभिष्टुतश्च विविधैर्देवराजर्षिचारणैः |
५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
द्रौणिरु उवाच
अभिष्टुत्य महात्मानमित्युवाच कृताञ्जलिः ||
५३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९२
वैशम्पाय़न उवाच
अभिष्टौषि च यत्क्षत्तुः समीपे द्विपदां वर ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
अभिष्वतः परिक्षित्तु शवलाश्वश्च वीर्यवान् |
४५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६३
सञ्जय़ उवाच
अभिसंश्लिष्टय़ोस्तत्र तय़ोराहवशौण्डय़ोः |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
अभिसंहत्य कौन्तेय़ पदातिप्रय़ुतानि च |
४८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३१
भीष्म उवाच
अभिसन्दधते ये न विनाशाय़ास्य भारत |
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
अभिसन्धाय़ तान्वीरानुपावृत्तोऽसि केशव |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३९
श्रीभगवानु उवाच
अभिसन्धाय़ तु फलं दम्भार्थमपि चैव यत् |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७०
सञ्जय़ उवाच
अभिसन्धाय़ पाण्डूनां पाञ्चालानां च वाहिनीम् ||
१५ ख