chevron_left  वेदव्रतोपवासेनarrow_drop_down
शान्ति पर्व
अध्याय २३४
भीष्म उवाच
वेदव्रतोपवासेन चतुर्थे चाय़ुषो गते |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १६
वासुदेव उवाच
वेदशास्त्रपुराणोक्ताः पञ्चैता गतय़ः स्मृताः |
६५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९३
करालजनक उवाच
वेदशास्त्रप्रमाणं च प्रमाणं तत्सनातनम् ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
वेदशास्त्राणि सर्वाणि धर्मांश्च मनुजेश्वर |
३१ क
शल्य पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
वेदश्चैनं चतुर्मूर्तिरुपतस्थे कृताञ्जलिः ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३३
नारद उवाच
वेदश्रुतिः प्रणष्टा च पुनरध्यापिता सुतैः |
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२३
वासुदेव उवाच
वेदश्रुतिभिराख्यानैरर्थानभिजिगीषते |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६६
धृतराष्ट्र उवाच
वेदस्नातो व्रतस्नातो धनुर्वेदे च पारगः |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
वेदस्मृतिं वेतसिनीं त्रिदिवामिष्कुमालिनीम् |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
वेदस्मृतिर्वैदसिनी मलवासाश्च नद्यपि ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
भीष्म उवाच
वेदस्याध्ययनं हीदं तच्च कार्यं महत्स्मृतम् |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८८
हंस उवाच
वेदस्योपनिषत्सत्यं सत्यस्योपनिषद्दमः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २४३
व्यास उवाच
वेदस्योपनिषत्सत्यं सत्यस्योपनिषद्दमः |
१० क
वन पर्व
अध्याय १९८
व्याध उवाच
वेदस्योपनिषत्सत्यं सत्यस्योपनिषद्दमः |
६२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२२
भीष्म उवाच
वेदा धर्मा मुनय़ः शान्ता; देवाः सर्वे तस्य विसर्गाः ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८४
व्रह्मो उवाच
वेदा धर्माश्च नोत्सादं गच्छेय़ुः सुरसत्तमाः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
श्रीभगवानु उवाच
वेदा न प्रतिभान्ति स्म ऋषीणां भावितात्मनाम् ||
५२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
वेदा मे परमं चक्षुर्वेदा मे परमं वलम् |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
वेदा मे परमं धाम वेदा मे व्रह्म चोत्तमम् ||
२९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४६
व्रह्मो उवाच
वेदा यज्ञाश्च लोकाश्च न तपो न पराक्रमः |
४८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५
कृष्ण उवाच
वेदा यज्ञाश्च सोमश्च दक्षिणा पावको हविः |
३४ क
स्त्री पर्व
अध्याय २३
गान्धार्यु उवाच
वेदा यस्माच्च चत्वारः सर्वास्त्राणि च केशव |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८१
पराशर उवाच
वेदा हि सर्वे राजेन्द्र स्थितास्त्रिष्वग्निषु प्रभो ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
वेदांश्च चतुरः साङ्गान्निखिलेनाववुध्यसे ||
३१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४३
भीष्म उवाच
वेदांश्च यो वेदय़तेऽधिदेवो; विधींश्च यश्चाश्रय़ते पुराणान् |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६२
कपिल उवाच
वेदांश्च वेदितव्यं च विदित्वा च यथास्थिति |
४० क
शान्ति पर्व
अध्याय २३७
व्यास उवाच
वेदांश्च वेद्यं च विधिं च कृत्स्न; मथो निरुक्तं परमार्थतां च |
३० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९५
वैशम्पाय़न उवाच
वेदांश्च व्रह्मचर्येण न्याय़तः प्रार्थय़ामहे ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय ४४
सूत उवाच
वेदांश्चाधिजगे साङ्गान्भार्गवाच्च्यवनात्मजात् ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय ५४
सूत उवाच
वेदांश्चाधिजगे साङ्गान्सेतिहासान्महाय़शाः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
वेदांस्तानानय़ेन्नष्टान्कस्य चाहं प्रिय़ो भवे ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२२
वसुहोम उवाच
वेदाः प्रतिष्ठा ज्योतिर्भ्यस्ततो हय़शिराः प्रभुः ||
४६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४७
युधिष्ठिर उवाच
वेदाः प्रत्यक्षमाचारः प्रमाणं तत्त्रय़ं यदि |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६२
कपिल उवाच
वेदाः प्रमाणं लोकानां न वेदाः पृष्ठतःकृताः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
वेदाः शास्त्राणि विज्ञानमेतत्सर्वं जनार्दनात् ||
१३९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
वेदाः संस्कारनिष्ठा हि त्वय़ीदं जगदाश्रितम् ||
५६ ख
वन पर्व
अध्याय २८२
गौतम उवाच
वेदाः साङ्गा मय़ाधीतास्तपो मे सञ्चितं महत् |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२२
भीष्म उवाच
वेदाः स्वधीता मम लोकनाथ; तप्तं तपो नानृतमुक्तपूर्वम् |
३ क
वन पर्व
अध्याय ७८
वृहदश्व उवाच
वेदाक्षहृदय़ं कृत्स्नमहं सत्यपराक्रम |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
वैशम्पाय़न उवाच
वेदाख्याने श्रुतिः कार्या त्वय़ा मतिमतां वर |
३९ ख
वन पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
वेदाचारविधानोक्तैर्यज्ञैर्धार्यन्ति देवताः |
२९ क
वन पर्व
अध्याय १४८
हनूमानु उवाच
वेदाचाराः प्रशाम्यन्ति धर्मय़ज्ञक्रिय़ास्तथा ||
३३ ख
वन पर्व
अध्याय ३२
युधिष्ठिर उवाच
वेदाच्छूद्र इवापेय़ात्स लोकादजरामरात् ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
भीष्म उवाच
वेदाध्ययनघोषैश्च नादितं भरतर्षभ |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६६
भीष्म उवाच
वेदाध्ययननित्यत्वं क्षमाथाचार्यपूजनम् |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय ६६
भीष्म उवाच
वेदाध्ययनशीलानां विप्राणां साधुकर्मणाम् |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७४
भीष्म उवाच
वेदाध्ययनशूराश्च शूराश्चाध्यापने रताः ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८२
भृगुरु उवाच
वेदाध्ययनसम्पन्नः षट्सु कर्मस्ववस्थितः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८२
भृगुरु उवाच
वेदाध्ययनसम्पन्नः स वैश्य इति सञ्ज्ञितः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७८
राजो उवाच
वेदाध्ययनसम्पन्नस्तपस्वी सर्वधर्मवित् |
२४ क