द्रोण पर्व
अध्याय
८
धृतराष्ट्र उवाच
करिणां वृंहतां युद्धे शङ्खदुन्दुभिनिस्वनम् |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
१५०
वैशम्पाय़न उवाच
करिष्य इति भीमेन प्रतिज्ञाते तु भारत |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
३८
काश्यप उवाच
करिष्य इति मे वुद्धिर्विद्यावलमुपाश्रितः ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय
५२
देवा ऊचुः
करिष्य इति संश्रुत्य पूर्वमस्मासु नैषध |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५४
सञ्जय़ उवाच
करिष्यतः किं च नो भीमपार्थौ; तपन्तमेनं जहि रक्षो निशीथे |
४९ क
वन पर्व
अध्याय
१०७
लोमश उवाच
करिष्यति च ते कामं पितॄणां हितकाम्यया ||
२३ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२७३
व्रह्मो उवाच
करिष्यति नरो मोहात्तमेषानुगमिष्यति ||
३९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
करिष्यति महाभागो ध्रुवं सोऽपचितिं मम ||
३८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७६
भीष्म उवाच
करिष्यति वचो धर्म्यं श्रुत्वा मे स नराधिपः ||
३२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
करिष्यन्ति तु यत्प्राप्तं सर्व एव तपोधनाः ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३८
विदुर उवाच
करिष्यन्न प्रभाषेत कृतान्येव च दर्शय़ेत् |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
करिष्यसि गतश्चासि यमस्य सदनं प्रति ||
६६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
दुर्योधन उवाच
करिष्यसि जगत्सर्वमपाञ्चालं किलाच्युत |
८० क
वन पर्व
अध्याय
२१४
मार्कण्डेय़ उवाच
करिष्यसि न चेदेवं मृतां मामुपधारय़ ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५९
सत्यवानु उवाच
करिष्यामः पुनर्व्रह्मन्न पापमिति वादिनः ||
१४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
करिष्यामः प्रिय़ं सर्वं तव कौरवनन्दन ||
३३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८३
वैशम्पाय़न उवाच
करिष्यामि तवातिथ्यं प्रहर प्रहरामि वा ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
करिष्यामि प्रय़त्नेन भ्रातुरन्वेषणं यदि |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
१०७
लोमश उवाच
करिष्यामि महाराज वचस्ते नात्र संशय़ः |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
करिष्यामि यथाशक्ति प्रेक्षेदानीं सवान्धवः ||
४१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
करिष्यामि रणे साह्यमसह्यं तव शत्रुभिः ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७०
भगवानु उवाच
करिष्यामि हि तत्सर्वं यत्त्वं वक्ष्यसि भारत ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३३
पुत्र उवाच
करिष्यामि हि तत्सर्वं यथावदनुशासनम् ||
२१ ग
वन पर्व
अध्याय
२९
द्रौपद्यु उवाच
करिष्यामि हि तत्सर्वं यथावदनुशासनम् ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
१८९
युधिष्ठिर उवाच
करिष्यामि हि तत्सर्वमुक्तं यत्ते मय़ि प्रभो ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
शल्य उवाच
करिष्यामि हि ते कामं भागिनेय़ यथेप्सितम् |
७८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८३
भीष्म उवाच
करिष्यामि हि ते वाक्यं यद्यन्मां विप्र वक्ष्यसि ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
करिष्यामीति चैनां स प्रत्युवाचाथ गुह्यकः ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
२७८
राजो उवाच
करिष्याम्येतदेवं च गुरुर्हि भगवान्मम ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय
२०१
पितामह उवाच
करिष्यावेदमिति यन्महदभ्युत्थितं तपः |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
करिष्ये जीविते यत्नं यावदुच्छ्वासनिग्रहम् ||
३८ ख
आदि पर्व
अध्याय
९
रुरुरु उवाच
करिष्ये तं तथा श्रुत्वा त्रातुमर्हति मां भवान् ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७७
भगवानु उवाच
करिष्ये तदहं पार्थ न त्वाशंसे शमं परैः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
करिष्ये न हि तानृद्धान्पुनर्द्रष्टुमिहोत्सहे ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८६
युधिष्ठिर उवाच
करिष्ये परमं यत्नमात्मनो रक्षणं प्रति |
४० क
आदि पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
करिष्ये पश्यतां नृणां मात्मना विस्मय़ं गमः ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
९४
लोमश उवाच
करिष्ये पितरः कामं व्येतु वो मानसो ज्वरः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
करिष्ये प्रलय़ं घोरमात्मज्ञातिविनाशनम् ||
९२ ग
वन पर्व
अध्याय
१०२
लोमश उवाच
करिष्ये भवतां कामं लोकानां च महत्सुखम् ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५९
सञ्जय़ उवाच
करिष्ये युध्यमानस्य सारथ्यं विदितात्मनः ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय
४२
जरत्कारुरु उवाच
करिष्ये वः प्रिय़ं कामं निवेक्ष्ये नात्र संशय़ः |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
करीषिणीं चित्रवहां चित्रसेनां च निम्नगाम् ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
६०
वृहदश्व उवाच
करुणं वहु शोचन्तीं विलपन्तीं मुहुर्मुहुः ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
करूषमथ शर्यातिं तथैवात्राष्टमीमिलाम् ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
करूषाः कोसलाः काश्या मागधाश्चापि दुद्रुवुः ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८८
वैशम्पाय़न उवाच
करे गृहीत्वा राजानं राजवेश्म समाविशत् ||
२० ख
शल्य पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
करेण गृह्य महतीं गदामभ्यपतद्वली |
२८ ख
वन पर्व
अध्याय
९८
लोमश उवाच
करेणुभिर्वारणैश्च प्रभिन्नकरटामुखैः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
करेणुय़ूथैः सह यूथपानां; मदोत्कटानामचलप्रभाणाम् |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
१०६
वैशम्पाय़न उवाच
करेण्वोरिव मध्यस्थः श्रीमान्पौरन्दरो गजः ||
९ ख