आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ताः सैनिकास्ते तु सज्जीभूता विशां पते |
३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४२
व्रह्मो उवाच
इत्युक्तानीन्द्रिय़ाणीमान्येकादश मय़ा क्रमात् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
भीष्म उवाच
इत्युक्तास्तं सुतं त्यक्त्वा भूमौ शोकपरिप्लुताः |
७९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तास्तु वय़ं तेन वेदव्यासेन धीमता |
९९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१०
व्यास उवाच
इत्युक्तास्ते चक्रुराशु प्रतीता; दिवौकसः शक्रवाक्यान्नरेन्द्र |
२७ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तास्ते ततः सर्वे समन्तादवभाषिरे |
४० क
मौसल पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तास्ते तदा राजन्विप्रलम्भप्रधर्षिताः |
७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५०
गुरुरु उवाच
इत्युक्तास्ते तु मुनय़ो व्रह्मणा गुरुणा तथा |
४० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४२
व्रह्मो उवाच
इत्युक्तास्ते द्विजान्प्राहुर्जय़तेह कपानिति |
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५०
भीष्म उवाच
इत्युक्तास्ते निषादास्तु सुभृशं भय़कम्पिताः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१००
भीष्म उवाच
इत्युक्तास्ते नृपतिना योधाः परपुरञ्जय़ ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय
६५
वृहदश्व उवाच
इत्युक्तास्ते यय़ुर्हृष्टा व्राह्मणाः सर्वतोदिशम् |
५ क
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तास्तेन ते पौराः पार्थेनाक्लिष्टकर्मणा |
१३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१४
धृतराष्ट्र उवाच
इत्युक्तास्तेन ते राज्ञा पौरजानपदा जनाः |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
११३
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ताहं तदा तेन पितृवेश्मनि भारत |
३६ क
विराट पर्व
अध्याय
२०
द्रौपद्यु उवाच
इत्युक्ते चाव्रुवं सूतं कामातुरमहं पुनः |
२२ क
शल्य पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ते चास्या जग्राह पाणिं गालवसम्भवः |
१४ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१७
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ते जानती सर्वमहं स्वं व्यसनागमम् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६६
भीष्म उवाच
इत्युक्ते तस्य ते दासाः शूलमुद्गरपाणय़ः |
२२ क
शल्य पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ते तु तदा तेन क्षणादेव विशां पते |
५१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ते धर्मराजस्तमर्जुनं प्रत्यपूजय़त् |
५ क
शल्य पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
इत्युक्ते धर्मराजेन वासुदेवोऽव्रवीदिदम् |
३५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ते धृतराष्ट्रेण क्षत्तापि विदुरोऽव्रवीत् |
४० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ते नृपतौ तस्मिन्व्यासेनाद्भुतकर्मणा |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ते फल्गुनस्तत्र धर्मराजानमव्रवीत् |
३९ क
वन पर्व
अध्याय
२९९
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ते भीमसेनेन व्राह्मणाः परमाशिषः |
२५ क
मौसल पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ते युय़ुधानेन पूजय़ामास तद्वचः |
१८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ते राजशार्दूल वृष्ण्यन्धकपतिस्तदा |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
इत्युक्ते वचने कृष्णो यत्रोवाच महामतिः ||
१३७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६७
यम उवाच
इत्युक्ते स तदा तेन यमदूतेन वै गृहान् |
२२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ते सर्वमेवैतदभवत्तस्य धीमतः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०
वासुदेव उवाच
इत्युक्तेन मय़ा पश्चाच्छप्तस्त्वमपि मत्सरात् |
३६ ख
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तेऽभिमुखा वीरा वासुदेवमुपस्थिता |
१२० क
आदि पर्व
अध्याय
२४
सूत उवाच
इत्युक्तो गरुडः सर्पैस्ततो मातरमव्रवीत् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८७
भीष्म उवाच
इत्युक्तो जनको राजन्यथातथ्यं मनीषिणा |
४५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५३
भीष्म उवाच
इत्युक्तो जाजलिर्भूतैः प्रत्युवाच महातपाः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५३
भीष्म उवाच
इत्युक्तो जाजलिर्भूतैर्जगाम विमनास्तदा |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९६
जनमेजय़ उवाच
इत्युक्तो जातसन्त्रासः स तत्रान्तरधीय़त |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
ईश्वर उवाच
इत्युक्तो जामदग्न्यस्तु देवदेवेन शूलिना |
१३६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
इत्युक्तो देवदेवाभ्यां सहस्राक्षोऽव्रवीद्वचः |
५७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८९
भीष्म उवाच
इत्युक्तो देवदेवेन स्त्रीपुमांस्ते भविष्यति ||
५ ख
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तो देवराजस्तु पार्थभीष्मसमागमम् |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१५
भीष्म उवाच
इत्युक्तो दैत्यपतिना शक्रो विस्मय़मागमत् |
३६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तो धर्मराजः स विनिवृत्य ततः पुनः |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तो धर्मराजस्तु मात्रा वाष्पाकुलेक्षणः |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
२०५
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तो धर्मराजस्तु सहसा वाक्यमप्रिय़म् |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तो धर्मराजस्य केशवस्य च संनिधौ |
२३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
इत्युक्तो धर्मराजेन तथेत्युक्त्वा धनञ्जय़ः |
३६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७६
युधिष्ठिर उवाच
इत्युक्तो धर्मराजेन तदा शान्तनवो नृप |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
१३७
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तो धर्मराजेन भीमसेनो महावलः |
२३ क