अनुशासन पर्व
अध्याय
१०३
भीष्म उवाच
इत्युक्तो नहुषस्तेन योजय़ामास तं मुनिम् |
१७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तो नारदस्तेन वाक्यं सर्वमनोनुगम् |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
१५५
व्राह्मण उवाच
इत्युक्तो नाहमित्येवं तमृषिः प्रत्युवाच ह |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तो भगवान्देवः स्मय़न्निव निरीक्ष्य ताम् |
११ क
सभा पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तो भरतश्रेष्ठो धर्मराजो युधिष्ठिरः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
२५५
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तो भीमसेनस्तु गुडाकेशेन धीमता |
३९ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तो भीमसेनेन प्रत्युवाच युधिष्ठिरः |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८५
भीष्म उवाच
इत्युक्तो भृगुणा राजन्भरद्वाजः प्रतापवान् |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५०
भीष्म उवाच
इत्युक्तो मत्स्यमध्यस्थश्च्यवनो वाक्यमव्रवीत् |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
इत्युक्तो रथमास्थाय़ तथेति प्राह भारत ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
२७४
मातलिरु उवाच
इत्युक्तो राघवस्तथ्यं वचोऽशङ्कत मातलेः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
२६६
मार्कण्डेय़ उवाच
इत्युक्तो लक्ष्मणस्तेन वानरेन्द्रेण धीमता |
२० क
वन पर्व
अध्याय
२६६
मार्कण्डेय़ उवाच
इत्युक्तो लक्ष्मणो भ्रात्रा गुरुवाक्यहिते रतः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३९
वाय़ुरु उवाच
इत्युक्तो वचनात्तस्य नारदेन जलेश्वरः |
१९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३९
वाय़ुरु उवाच
इत्युक्तो वरुणेनाथ नारदः प्राप्य तं मुनिम् |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
९५
भीष्म उवाच
इत्युक्तो वामदेवेन सर्वं तत्कृतवान्नृपः |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
इत्युक्तो वासुदेवेन तथेत्युक्त्वा द्विजोत्तमः |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
इत्युक्तो वासुदेवेन तिर्यग्दृष्टिरधोमुखः |
३५ क
शल्य पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
इत्युक्तो वासुदेवेन पाण्डवः संशितव्रतः |
१५ क
शल्य पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
इत्युक्तो वासुदेवेन भीमप्रिय़हितैषिणा |
३६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
इत्युक्तो वासुदेवेन वीभत्सुरपराजितः |
९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तो वासुदेवेन स वालो भरतर्षभ |
२४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तो विदुरेणाथ धृतराष्ट्रोऽभिनन्द्य तत् |
१५ क
सभा पर्व
अध्याय
४५
धृतराष्ट्र उवाच
इत्युक्तो विदुरो धीमान्नैतदस्तीति चिन्तय़न् |
५८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४०
भीष्म उवाच
इत्युक्तो विपुलस्तेन तपस्वी निय़तेन्द्रिय़ः |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७४
भीष्म उवाच
इत्युक्तो व्रह्मणा देवो भागे चापि प्रकल्पिते |
४७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तो व्राह्मणेनाथ कर्णो दैन्यादधोमुखः |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तोऽङ्गिरसां श्रेष्ठमामन्त्र्य प्रतिपूज्य च |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३१
भीष्म उवाच
इत्युक्तोऽभिप्रशस्यैतत्परमर्षेस्तु शासनम् |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७०
नाचिकेत उवाच
इत्युक्तोऽहं धर्मराज्ञा महर्षे; धर्मात्मानं शिरसाभिप्रणम्य |
५६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७७
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तोऽहं नरेन्द्रेण न हन्तव्या नृपा इति |
८ क
वन पर्व
अध्याय
१६४
अर्जुन उवाच
इत्युक्तोऽहं मातलिना गिरिमामन्त्र्य शैशिरम् |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४४
वासुदेव उवाच
इत्युक्तोऽहं शरीरं स्वमपश्यं श्रीसमाय़ुतम् ||
३९ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१८५
भृगुरु उवाच
इत्युक्तोऽय़ं मय़ा धर्मः सङ्क्षेपाद्व्रह्मनिर्मितः |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
२५५
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तौ तौ नरव्याघ्रौ यय़तुर्यत्र सैन्धवः |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२४
सञ्जय़ उवाच
इत्युक्तौ तौ महात्मानावुभौ केशवपाण्डवौ |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्त्वा केशवं तत्र तथा चोक्त्वा विनिश्चय़म् |
५७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्त्वा केशवं तत्र राजमध्ये युधिष्ठिरः |
४९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२४
धृतराष्ट्र उवाच
इत्युक्त्वा च यय़ौ तत्र यतो वृत्तं नराधिप ||
५३ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
भीष्म उवाच
इत्युक्त्वा चरणाभ्यां तु नेत्रे नृपसुतस्य सा |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८३
वसिष्ठ उवाच
इत्युक्त्वा चोर्ध्वमनय़त्तद्रेतो वृषवाहनः |
४७ क
आदि पर्व
अध्याय
११६
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्त्वा तं चिताग्निस्थं धर्मपत्नी नरर्षभम् |
३१ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्त्वा तं ततो देवा देवदूतमुपादिशन् |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
२९३
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्त्वा तं ददौ पुत्रं राधाय़ै स महीपते ||
९ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्त्वा तं महावाहुर्जगामानवलोकय़न् |
२६ क
विराट पर्व
अध्याय
२१
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्त्वा तं महावाहुर्भीमो भीमपराक्रमः |
४७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८४
देवा ऊचुः
इत्युक्त्वा तं शमीगर्भे वह्निमालक्ष्य देवताः |
४२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्त्वा तं सुरगुरुर्धर्मराजं युधिष्ठिरम् |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८४
देवा ऊचुः
इत्युक्त्वा तांस्ततो देवाः पुनरेव महीमिमाम् |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
इत्युक्त्वा तांस्तदा हंसानशेत शरतल्पगः ||
१०० ख