शान्ति पर्व
अध्याय
७०
भीष्म उवाच
अनवाप्तं च लिप्सेत लव्धं च परिपालय़ेत् ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६९
पुत्र उवाच
अनवाप्तेषु कामेषु मृत्युरभ्येति मानवम् |
१२ क
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
अनवाप्य शमं तत्र कृष्णः पुरुषसत्तमः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१९
नमुचिरु उवाच
अनवाप्यं च शोकेन शरीरं चोपतप्यते |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
विदुर उवाच
अनवाप्यं च शोकेन शरीरं चोपतप्यते |
४३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४४
कर्ण उवाच
अनवेक्ष्य कृतं पापा विकुर्वन्त्यनवस्थिताः ||
१६ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
२
युधिष्ठिर उवाच
अनवेक्ष्य परं पार्थ तेनासि पतितः क्षितौ ||
२५ ख
आदि पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
अनवेक्ष्य यय़ौ वेश्म क्रोधवेगपराय़णा ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
अनवेक्ष्य सुखादानं तथैवोर्ध्वं प्रतिष्ठितः |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
श्वशुर उवाच
अनवेक्ष्य सुतस्नेहं कलत्रस्नेहमेव च |
६७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
अनवेक्ष्यैव पितरं गाङ्गेय़ं विदुरं तथा |
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
अनश्नती वहुतिथं शरीरमुपशोषय़त् ||
२२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
अनश्नन्त्या पचन्त्या च समा द्वादश पारिताः ||
४२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
अनश्नन्त्याः पचन्त्याश्च शृण्वन्त्याश्च कथाः शुभाः |
३७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०९
अङ्गिरा उवाच
अनश्नन्देहमुत्सृज्य फलं प्राप्नोति मानवः ||
५८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३५
विदुर उवाच
अनसूय़ः कृतप्रज्ञः शोभनान्याचरन्सदा |
५५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
नकुल उवाच
अनसूय़वो गतक्रोधाः साधवो गतमत्सराः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१३
भीष्म उवाच
अनसूय़ा क्षमा शान्तिः सन्तोषः प्रिय़वादिता |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
१९८
व्याध उवाच
अनसूय़ा क्षमा शान्तिः सन्तोषः प्रिय़वादिता |
९१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३४
विदुर उवाच
अनसूय़ार्जवं शौचं सन्तोषः प्रिय़वादिता |
६९ क
वन पर्व
अध्याय
२४५
वैशम्पाय़न उवाच
अनसूय़ाविहिंसा च शौचमिन्द्रिय़संय़मः |
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
२००
व्याध उवाच
अनसूय़ुः कृतज्ञश्च कल्याणान्येव सेवते |
४० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
अनसूय़ुरजिह्मश्च शतं वर्षाणि जीवति ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३६
व्यास उवाच
अनसूय़ुरधःशाय़ी कर्म लोके प्रकाशय़न् |
३ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
अनसूय़ुरनुप्रष्टा सत्कृतस्ते पुरोहितः ||
२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
अनसूय़ुरपापस्थो द्वादशाहफलं लभेत् ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
८८
यय़ातिरु उवाच
अनसूय़ुर्द्विजाग्रेभ्यः स लभेन्नः सलोकताम् ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१३
जनक उवाच
अनसूय़ुर्यथान्याय़माहिताग्निस्तथैव च ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
अनसूय़ुस्त्वमप्यन्नं तस्माद्देहि गतज्वरः ||
४३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
अनस्तङ्गत आदित्ये हन्ता सैन्धवमर्जुनः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
अनस्तङ्गत आदित्ये हन्यात्सैन्धवकं नृपम् ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
अनस्तमित आदित्ये समेष्याम्यहमर्जुनम् ||
४३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६०
सञ्जय़ उवाच
अनस्त्रविदय़ं सर्वो हन्तव्योऽस्त्रविदा जनः ||
१० ग
शल्य पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
अनागःसु च पार्थेषु तस्य पश्य महत्फलम् ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
अनागःस्वपि चागस्कृदस्मासु भरतर्षभ ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८१
वैशम्पाय़न उवाच
अनागच्छत्सु पुत्रेषु भैक्षकालेऽतिगच्छति ||
३७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४६
व्रह्मो उवाच
अनागतं च न ध्याय़ेन्नातीतमनुचिन्तय़ेत् |
४० क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
अनागतं त्रिभिर्वर्षैः कृष्णद्वैपाय़नः प्रभुः |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०५
भीष्म उवाच
अनागतं यन्न ममेति विद्या; दतिक्रान्तं यन्न ममेति विद्यात् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३८
भीष्म उवाच
अनागतं विजानीय़ाद्यच्छेद्भय़मुपस्थितम् |
३५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११
धृतराष्ट्र उवाच
अनागतमतिक्रान्तं वर्तमानं च सञ्जय़ |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८३
भीष्म उवाच
अनागतमतीतं च यच्च सम्प्रति वर्तते ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०५
मुनिरु उवाच
अनागतमतीतं च यथा तथ्यविनिश्चय़ात् |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
अनागतमनर्थं हि सुनय़ैर्यः प्रवाधते |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३१
शुक उवाच
अनागतमनैतिह्यं कथं व्रह्माधिगच्छति ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
अनागतविधातारः कालज्ञानविशारदाः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
अनागतविधानं तु यो नरः कुरुते क्षमम् |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३८
भीष्म उवाच
अनागतसुखाशा च नैष वुद्धिमतां नय़ः ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
युधिष्ठिर उवाच
अनागता तथोत्पन्ना दीर्घसूत्रा विनाशिनी ||
१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२२
इन्द्रिय़ाण्यू ऊचुः
अनागतानतीतांश्च स्वप्ने जागरणे तथा ||
२५ ख