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सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
इदं वरमिदं मेध्यमिदं स्वाद्विति चाव्रुवन् ||
१३१ ख
आदि पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
इदं वर्षसहस्राय़ राज्यं कारय़ितुं वशी ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय ४५
सूत उवाच
इदं वर्षसहस्राय़ राज्यं कुरुकुलागतम् |
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
इदं वाक्यं महातेजा वभाषे पुष्करेक्षणः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय १६५
गन्धर्व उवाच
इदं वासिष्ठमाख्यानं पुराणं परिचक्षते |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१६
नारद उवाच
इदं विश्वं जगत्सर्वमजगच्चापि यद्भवेत् |
४४ क
वन पर्व
अध्याय २०१
व्याध उवाच
इदं विश्वं जगत्सर्वमजय़्यं चापि सर्वशः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय १६९
मातलिरु उवाच
इदं वृतं निवासाय़ देवेभ्यश्चाभय़ं युधि ||
२९ ख
सभा पर्व
अध्याय ५३
युधिष्ठिर उवाच
इदं वै देवनं पापं माय़या कितवैः सह |
७ क
आदि पर्व
अध्याय २२३
द्रोण उवाच
इदं वै सद्म तिग्मांशो वरुणस्य पराय़णम् |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय १३१
वैशम्पाय़न उवाच
इदं वै हास्तिनपुरं सुखिनः पुनरेष्यथ ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
इदं व्यवसितं युद्धं मम भीमस्य चोभय़ोः |
३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
इदं व्रह्मा पुरा कृत्वा सर्वलोकपितामहः |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
इदं व्रूय़ाः सञ्जय़ राजमध्ये; सुय़ोधनं पापकृतां प्रधानम् ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
इदं शतसहस्रं हि श्लोकानां पुण्यकर्मणाम् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३१
जनमेजय़ उवाच
इदं शतसहस्राद्धि भारताख्यानविस्तरात् |
२ क
आदि पर्व
अध्याय १३५
वैशम्पाय़न उवाच
इदं शरणमाग्नेय़ं मदर्थमिति मे मतिः |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय ३५
श्रीभगवानु उवाच
इदं शरीरं कौन्तेय़ क्षेत्रमित्यभिधीय़ते |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
इदं शरीरं वसु यच्च मे गृहे; निवेदितं पार्थ सदा युधिष्ठिरे |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८६
पराशर उवाच
इदं शरीरं वैदेह म्रिय़ते यत्र तत्र ह |
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२२
भीष्म उवाच
इदं श्रेय़ इदं व्रह्म इदं हितमनुत्तमम् |
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७६
भीष्म उवाच
इदं श्रेय़ इदं श्रेय़ इति नानाप्रधाविताः ||
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४८
ऋषय़ ऊचुः
इदं श्रेय़ इदं श्रेय़ इत्येवं प्रस्थितो जनः |
२६ क
वन पर्व
अध्याय १८४
तार्क्ष्य उवाच
इदं श्रेय़ः परमं मन्यमाना; व्याय़च्छन्ते मुनय़ः सम्प्रतीताः |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११
ऋषय़ ऊचुः
इदं श्रेय़ः परमिति वय़मेवाभ्युपास्महे |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
इदं संनिहितं तात समग्रं पार्थिवं वलम् |
४७ क
आदि पर्व
अध्याय १७६
द्रुपद उवाच
इदं सज्यं धनुः कृत्वा सज्येनानेन साय़कैः |
११ क
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
इदं सत्यं द्विजातीनां साधूनामात्मजस्य च |
८४ क
वन पर्व
अध्याय २९८
वैशम्पाय़न उवाच
इदं समुत्थानसमागमं मह; त्पितुश्च पुत्रस्य च कीर्तिवर्धनम् |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय १५८
वैशम्पाय़न उवाच
इदं समुपसर्पन्ति तत्किं समुपसर्पथ ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
इदं सर्वं वलं हन्मो येन स्म परिवारिताः |
४१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १९
व्राह्मण उवाच
इदं सर्वरहस्यं ते मय़ोक्तं द्विजसत्तम |
४७ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
इदं सर्वैः कविवरैराख्यानमुपजीव्यते |
२४१ क
वन पर्व
अध्याय ७३
वृहदश्व उवाच
इदं सुसदृशं भद्रे मिथुनं मम पुत्रय़ोः |
२७ क
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
इदं स्वर्ग्यमिदं रम्यमिदं पावनमुत्तमम् ||
८५ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
इदं हर्षाच्च सुमहदाददे वाक्यमुत्तमम् ||
१४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
इदं हि नकुलोलूकं पापवुद्ध्यभितः स्थितम् |
५२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
इदं हि मे मतं नित्यं भ्रातॄणां च ममानघाः ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
इदं हि वेदैः समितं पवित्रमपि चोत्तमम् |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११३
भीष्म उवाच
इदं हि सद्भिः कथितं विधिज्ञैः; पुरा महेन्द्रप्रतिमप्रभाव |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९५
सञ्जय़ उवाच
इदं हि समनुप्राप्तं वर्षपूगाभिचिन्तितम् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९५
वामदेव उवाच
इदंवृत्तं मनुष्येषु वर्तते यो महीपतिः |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
इदमंशावतरणं श्रोतव्यमनसूय़ता ||
१०१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
इदमङ्गिरसा पूर्वं महर्षिभ्यः प्रदर्शितम् |
६७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
इदमङ्गिरसा प्रोक्तमुपवासफलात्मकम् |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७८
अर्जुन उवाच
इदमङ्गिरसे प्रादाद्देवेशो वर्म भास्वरम् |
१९ क
वन पर्व
अध्याय २५५
वैशम्पाय़न उवाच
इदमत्यद्भुतं चात्र चकार पुरुषोऽर्जुनः |
५३ क
आदि पर्व
अध्याय ५३
सूत उवाच
इदमत्यद्भुतं चान्यदास्तीकस्यानुशुश्रुमः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय ११४
वैशम्पाय़न उवाच
इदमत्यद्भुतं चासीज्जातमात्रे वृकोदरे |
११ क
वन पर्व
अध्याय २९३
वैशम्पाय़न उवाच
इदमत्यद्भुतं भीरु यतो जातोऽस्मि भामिनि |
८ क