अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
इन्द्रोऽहमस्मि दुर्वुद्धे वैरं ते यातितं मय़ा ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय
१३१
श्येन उवाच
इन्द्रोऽहमस्मि धर्मज्ञ कपोतो हव्यवाडय़म् |
२८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२८
यतिरु उवाच
इन्धनस्य तु तुल्येन शरीरेण विचेतसा |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८०
भरद्वाज उवाच
इन्धनस्योपय़ोगान्ते स चाग्निर्नोपलभ्यते ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
जम्वुक उवाच
इमं कनकवर्णाभं भूषणैः समलङ्कृतम् |
६० क
आदि पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
इमं कुमारं राजेन्द्र तव शोकप्रणाशनम् ||
५८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
भीष्म उवाच
इमं कुलकरं पुत्रं कथं त्यक्त्वा गमिष्यथ ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
जम्वुक उवाच
इमं क्षितितले न्यस्य वालं रूपसमन्वितम् |
८५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७६
भीष्म उवाच
इमं गवां प्रभवविधानमुत्तमं; पठन्सदा शुचिरतिमङ्गलप्रिय़ः |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१२
भीष्म उवाच
इमं गुणसमाहारमात्मभावेन पश्यतः |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
इमं च दृष्ट्वा तव कर्मदोषं; पादोदर्कं घोरमवर्णरूपम् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५२
वासुदेव उवाच
इमं च राजशार्दूल भूतग्रामं चतुर्विधम् |
२० क
वन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
इमं च लोकं शोचन्तमनुशोचन्ति देवताः |
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२३
भीष्म उवाच
इमं च व्रह्मलोकं च लोकं च वलवत्तरम् |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०३
भीष्म उवाच
इमं च शृणु मे पार्थ सङ्कल्पं पूर्वचिन्तितम् |
७४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६१
स्यूमरश्मिरु उवाच
इमं च संशय़ं घोरं भगवान्प्रव्रवीतु मे ||
३८ ग
विराट पर्व
अध्याय
२०
भीमसेन उवाच
इमं च समुपालम्भं त्वत्तो राजा युधिष्ठिरः |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
व्रह्मो उवाच
इमं चाप्यपरं भूय़ इतिहासं निवोध मे |
१२९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३
युधिष्ठिर उवाच
इमं ज्ञातिवधं कृत्वा सुमहान्तं द्विजोत्तम |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०३
कण्व उवाच
इमं तावन्ममैकं त्वं वाहुं सव्येतरं वह |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०९
अङ्गिरा उवाच
इमं तु कौन्तेय़ यथाक्रमं विधिं; प्रवर्तितं ह्यङ्गिरसा महर्षिणा |
६८ क
वन पर्व
अध्याय
२२३
द्रौपद्यु उवाच
इमं तु ते मार्गमपेतदोषं; वक्ष्यामि चित्तग्रहणाय़ भर्तुः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६५
देवा ऊचुः
इमं तु देशं मुनय़ः पर्युपासन्त नित्यदा ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय
६२
जनमेजय़ उवाच
इमं तु भूय़ इच्छामि कुरूणां वंशमादितः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
इमं तु वंशं निय़मेन यः पठे; न्महात्मनां व्राह्मणदेवसंनिधौ |
५४ क
आदि पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
इमं तु वालं सन्त्यक्तुं नार्हस्यात्मजमात्मना ||
७१ ख
आदि पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
इमं त्वप्सरसां वंशं विदितं पुण्यलक्षणम् |
४७ क
सभा पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
इमं त्वस्य न शक्ष्यामि क्षन्तुमद्य व्यतिक्रमम् |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
इमं दृष्ट्वा निय़मं पाण्डवस्य; मन्ये परं कर्म दैवं मनुष्यात् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
इमं देशमनुप्राप्ता मम दर्शनलालसाः ||
११ ख
सभा पर्व
अध्याय
६३
विदुर उवाच
इमं धर्मं कुरवो जानताशु; दुर्दृष्टेऽस्मिन्परिषत्सम्प्रदुष्येत् |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२४
भीष्म उवाच
इमं धर्मपथं नारी पालय़न्ती समाहिता |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७१
भीष्म उवाच
इमं पश्यत सङ्गत्या मम दैवमुपप्लवम् ||
१० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
इमं पापमतिं क्षुद्रमत्यन्तं पाण्डवान्प्रति |
५८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
इमं पुरुषशार्दूलमप्रधृष्यं दुरासदम् |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
जम्वुक उवाच
इमं प्रेक्ष्य पुनर्भावं दुःखशोकाभिवर्धनम् ||
८१ ख
आदि पर्व
अध्याय
८७
यय़ातिरु उवाच
इमं भौमं नरकं क्षीणपुण्यः; प्रवेष्टुमुर्वीं गगनाद्विप्रकीर्णः |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
८५
यय़ातिरु उवाच
इमं भौमं नरकं ते पतन्ति; नावेक्षन्ते वर्षपूगाननेकान् ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय
८५
यय़ातिरु उवाच
इमं भौमं नरकं ते पतन्ति; लालप्यमाना नरदेव सर्वे |
४ क
वन पर्व
अध्याय
२८९
व्राह्मण उवाच
इमं मन्त्रं गृहाण त्वमाह्वानाय़ दिवौकसाम् ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
१३४
वन्द्यु उवाच
इमं मुहूर्तं पितरं द्रक्ष्यतेऽय़; मष्टावक्रश्चिरनष्टं कहोडम् ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४६
भीष्म उवाच
इमं लोकं विमुच्य त्वमवाङ्मूर्धा पतिष्यसि |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२४
भीष्म उवाच
इमं लोकमनुप्राप्ता तस्मात्तत्त्वं वदस्व मे ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०६
भगीरथ उवाच
इमं लोकमनुप्राप्तो मा भूत्तेऽत्र विचारणा ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३
वैशम्पाय़न उवाच
इमं लोकममुं लोकं साधय़न्तीति नः श्रुतम् ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
इमं वंशमहं व्रह्मन्भार्गवं ते महामुने |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२६
श्रीभगवानु उवाच
इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम् |
१ क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
इमं शिलोच्चय़ं पुण्यं शृङ्गैर्वहुभिरुच्छ्रितैः |
३५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८७
वैशम्पाय़न उवाच
इमं श्राद्धविधिं कृत्स्नं प्रवक्तुमुपचक्रमे ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८९
भीष्म उवाच
इमं श्राद्धविधिं श्रुत्वा शशविन्दुस्तथाकरोत् |
१५ क