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आदि पर्व
अध्याय १९७
विदुर उवाच
इमौ हि वृद्धौ वय़सा प्रज्ञय़ा च श्रुतेन च |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
इरावतः शिरो रक्षः पातय़ामास भूतले ||
७० ख
सभा पर्व
अध्याय ९
नारद उवाच
इरावती वितस्ता च सिन्धुर्देवनदस्तथा ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
इरावतीं वितस्तां च पय़ोष्णीं देविकामपि ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय १३
अर्जुन उवाच
इरावत्यां तथा भोजः कार्तवीर्यसमो युधि |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय ८७
धृतराष्ट्र उवाच
इरावन्तं तु निहतं दृष्ट्वा पार्था महारथाः |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
इरावन्तं तु निहतं सङ्ग्रामे वीक्ष्य राक्षसः |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
इरावन्तमभिक्रुद्धं मोहय़न्निव माय़या ||
५७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
इरावन्तमभिद्रुत्य सर्वतः पर्यवारय़न् ||
३० ग
भीष्म पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
इरावन्तमभिप्रेक्ष्य समेय़ातां रणोत्कटौ |
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७१
सञ्जय़ उवाच
इरावांश्च ततः पुच्छे मकरस्य व्यवस्थितौ ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
इरावांस्तु ततः क्रुद्धो भ्रातरौ तौ महारथौ |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
इरावांस्तु ततो राजन्ननुविन्दस्य साय़कैः |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
इरावांस्तु सुसङ्क्रुद्धो भ्रातरौ देवरूपिणौ |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
इरावानथ निर्भिन्नः प्रासैस्तीक्ष्णैर्महात्मभिः |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
इरावानथ सङ्क्रुद्धः श्रुताय़ुषममर्षणम् |
६६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
इरावानथ सङ्क्रुद्धः सर्वांस्तान्निशितैः शरैः |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
इरावानपि खड्गेन दर्शय़न्पाणिलाघवम् |
३८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
इरावानपि सङ्क्रुद्धस्त्वरमाणः पराक्रमी |
५० क
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
इरावानपि सङ्क्रुद्धो माय़ां स्रष्टुं प्रचक्रमे ||
६५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
इरावानपि सङ्क्रुद्धो राक्षसं तं महावलम् |
६१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
इरावानस्मि भद्रं ते पुत्रश्चाहं तवाभिभो ||
११ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
इरावान्क्रोधसंरव्धः प्रत्यधावन्महावलः ||
५५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
इलावृतं मध्यमं तु पञ्च वर्षाणि चैव ह ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
इलास्पदं च तत्रैव तीर्थं भरतसत्तम ||
६३ ग
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
इलाय़ाः पुरूरवाः |
७ 5
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
इलिनं जनय़ामास कालिन्द्यां तंसुरात्मजम् ||
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
इलिनं तु सुतं तंसुर्जनय़ामास वीर्यवान् |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
इलिनस्तु रथन्तर्यां दुःषन्ताद्यान्पञ्च पुत्रानजनय़त् ||
२९ क
आदि पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
इलिनो जनय़ामास दुःषन्तप्रभृतीन्नृप ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय ९७
लोमश उवाच
इल्वलश्च विषण्णोऽभूद्दृष्ट्वा जीर्णं महासुरम् ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय ९७
लोमश उवाच
इल्वलस्तान्विदित्वा तु महर्षिसहितान्नृपान् |
१ क
वन पर्व
अध्याय ९४
लोमश उवाच
इल्वलो नाम दैतेय़ आसीत्कौरवनन्दन |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३९
कर्ण उवाच
इषवोऽत्र परिस्तोमा मुक्ता गाण्डीवधन्वना |
४१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६६
वैशम्पाय़न उवाच
इषीका द्रोणपुत्रेण भीमसेनार्थमुद्यता |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २४०
व्यास उवाच
इषीका वा यथा मुञ्जे पृथक्च सह चैव च |
२२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १९
व्राह्मण उवाच
इषीकां वा यथा मुञ्जात्कश्चिन्निर्हृत्य दर्शय़ेत् |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
इषीकय़ा मय़ा वाल्यादेका विद्धा शकुन्तिका ||
७८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १७१
वोध्य उवाच
इषुकारः कुमारी च षडेते गुरवो मम ||
६१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
इषुजालावृतं घोरमन्धकारमनन्तरम् |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
इषुजालेन महता तदद्भुतमिवाभवत् ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय ५५
वैशम्पाय़न उवाच
इषुधी चाक्षय़ैर्वाणै रथं च कपिलक्षणम् ||
३७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
इषुधी चास्य चिच्छेद रथं च तिलशोऽच्छिनत् ||
३४ ग
कर्ण पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
इषुधेर्धनुषो ज्याय़ा अङ्गुलीभ्यश्च मारिष |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
इषुपातमतिक्रम्य पेतुरश्वनरद्विपाः ||
३७ ख
विराट पर्व
अध्याय ४८
अर्जुन उवाच
इषुपाते च सेनाय़ा हय़ान्संय़च्छ सारथे |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८४
पराशर उवाच
इषुप्रपातमात्रं हि स्पर्शय़ोगे रतिः स्मृता |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
इषुभिः कार्मुकं चास्य चकर्त पुरुषर्षभः |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय २४
अर्जुन उवाच
इषुभिः प्रतिय़ोत्स्यामि पूजार्हावरिसूदन ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
इषुभिरजय़दग्निगौरवा; त्स्वभिलषितं च हविर्ददौ जय़ः ||
६५ ख