मौसल पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कालपरीतास्ते वृष्ण्यन्धकमहारथाः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
श्रीरु उवाच
ततः कालविपर्यासे तेषां गुणविपर्ययात् |
४९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३००
याज्ञवल्क्य उवाच
ततः कालाग्निमासाद्य तदम्भो याति सङ्क्षय़म् |
८ क
वन पर्व
अध्याय
१८८
मार्कण्डेय़ उवाच
ततः कालान्तरेऽन्यस्मिन्पुनर्लोकविवृद्धय़े |
८६ क
वन पर्व
अध्याय
१८१
मार्कण्डेय़ उवाच
ततः कालान्तरेऽन्यस्मिन्पृथिवीतलचारिणः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
७८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः काले तु कस्मिंश्चिद्देवय़ानी शुचिस्मिता |
११ क
वन पर्व
अध्याय
२८०
मार्कण्डेय़ उवाच
ततः काले वहुतिथे व्यतिक्रान्ते कदाचन |
१ क
वन पर्व
अध्याय
१०५
लोमश उवाच
ततः काले वहुतिथे व्यतीते भरतर्षभ |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
ततः कालेन पृथिवी प्रविवेश रसातलम् |
६३ क
वन पर्व
अध्याय
२८३
मार्कण्डेय़ उवाच
ततः कालेन महता सावित्र्याः कीर्तिवर्धनम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
१०४
लोमश उवाच
ततः कालेन वैदर्भी गर्भालावुं व्यजाय़त |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
१०७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कालेन सा गर्भं धृतराष्ट्रादथाग्रहीत् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
२९२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कालेन सा गर्भं सुषुवे वरवर्णिनी |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
ततः काल्यं समुत्थाय़ कृतपौर्वाह्णिकक्रिय़ाः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
७५
वैशम्पाय़न उवाच
ततः काव्यो भृगुश्रेष्ठः समन्युरुपगम्य ह |
१ क
सभा पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः काश्मीरकान्वीरान्क्षत्रिय़ान्क्षत्रिय़र्षभः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
७४
वृहदश्व उवाच
ततः काषाय़वसना जटिला मलपङ्किनी |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
ततः काष्ठैः सह तदा पपात धरणीतले ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
ततः किम्पुरुषावासं सिद्धचारणसेवितम् |
३४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
६२
विदुर उवाच
ततः किरातास्तद्दृष्ट्वा प्रार्थय़न्तो महीपते |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
ततः किरीटं वहुरत्नमण्डितं; जहार नागोऽर्जुनमूर्धतो वलात् |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः किरीटी तस्यानु प्रविवेश महामनाः |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
ततः किरीटी परवीरघाती; हताश्वमालोक्य नरप्रवीरम् |
५५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३२
सञ्जय़ उवाच
ततः किरीटी भीमश्च सहसा संन्यवर्तताम् |
३९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३६
सञ्जय़ उवाच
ततः किरीटी भीमश्च सहसा संन्यवर्तताम् |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
ततः किरीटी रणमूर्ध्नि कोपा; त्कृत्वा त्रिशाखां भ्रुकुटिं ललाटे |
५९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
ततः किरीटी संरव्धो भीष्ममेवाभ्यवर्तत |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
ततः किरीटी संरव्धो भीष्ममेवाभ्यवर्तत |
४६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः किरीटी सञ्चिन्त्य तेषां राज्ञां चिकीर्षितम् |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
ततः किरीटी सहसा द्रोणानीकमुपाद्रवत् |
४४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७५
होत्रवाहन उवाच
ततः किल महावीर्यो भीष्मः शान्तनवो नृपान् |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
ततः किलकिलाभूतमनीकं पाण्डवस्य ह |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
ततः किलकिलाशव्दः क्षणेन समपद्यत |
४७ क
शल्य पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
ततः किलकिलाशव्दः प्रादुरासीद्विशां पते |
४६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
सञ्जय़ उवाच
ततः किलकिलाशव्दः शङ्खभेरीरवैः सह |
३७ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततः कुञ्जः सरस्वत्यां कृतो भरतसत्तम |
९३ क
शल्य पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुञ्जान्वहून्कृत्वा संनिवृत्ता सरिद्वरा |
५१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
ततः कुणिन्देषु हतेषु तेष्वथ; प्रहृष्टरूपास्तव ते महारथाः |
३९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
ततः कुण्डानि पात्रीश्च पिठराण्यासनानि च |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय
१८७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुन्ती च कृष्णा च भीमसेनार्जुनावपि |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुन्ती च विप्रश्च सहितावनिलात्मजम् |
२० क
आदि पर्व
अध्याय
१५६
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुन्ती भीमसेनमर्जुनं यमजौ तथा |
१० क
स्त्री पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुन्ती महाराज सहसा शोककर्शिता |
६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुन्ती श्वशुरय़ोः प्रणम्य शिरसा तदा |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
१४२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुन्ती समीक्ष्यैनां विस्मिता रूपसम्पदा |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
१५६
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुन्ती सुतान्दृष्ट्वा विभ्रान्तान्गतचेतसः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
११५
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुन्तीं पुनः पाण्डुर्विविक्त इदमव्रवीत् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुन्तीसुतो राजा गतमन्युर्गतज्वरः |
१ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुन्तीसुतो राजा देवदूतश्च जग्मतुः |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुन्तीसुतो राजा पौरजानपदं जनम् |
१ क